लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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होली रंगों का त्योहार है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है | ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है | भारत पहले से ही कला और संस्कृति के क्षेत्र में अग्रणी रहा हैं अगर भारतीय समाज के त्यौहार की बात की जाए तो हमारे देश मे हर एक प्रसंग के लिए अलग त्यौहार है। भारतवर्ष त्यौहारों, कला, संस्कृति और सभ्यता से ओत- प्रोत है। हर एक त्यौहार का अपना विशेष महत्व होता है। इन सारे त्यौहारों में से एक होली जो दोस्त, यार, परिवार और सभी अपने के दिलों में प्यार का रंग भर देता है। यह त्यौहार खुशियों का, बुराई पर अच्छाई की विजय का, पुराने गिले-शिकवे भुला कर एक दूसरे के रंग में रंग जाने का त्यौहार है होली।

होली रंगों का एक शानदार उत्सव है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है। ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है जो दिवाली की तरह सबसे ज्यादा खुशी देने वाला त्योहार है। ये हर साल चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दौरान पूरी प्रकृति और वातावरण बेहद सुंदर और रंगीन नजर आते है।इस दिन सभी लोग सामाजिक विभेद को भुलाकर एक-दूसरे पर रंगों की बौछार करते है साथ ही स्वादिष्ट पकवानों और मिठाईयाँ बाँटकर अपनी खुशी जाहिर करते है।प्राचीन काल में पलाश के फूलों से तैयार सात्विक रंग अथवा गुलाल, कुमकुम, हल्दी से होली खेली जाती थी । लेकिन आज के परिवर्तन-प्रधान युग में अनेक प्रकार के रासायनिक तत्त्वों से बने पक्के रंगो का तथा कई स्थानों पर तो वार्निश, आईलपेंट व चमकीले पेंटो का भी होली खेलने में उपयोग किया जाता है |

इस बसंती त्योहार में लोग अपने कपड़ों, बालों, त्वचा तथा रंगरूप की परवाह किए बिना रंगों से सराबोर रहना पसंद करते हैं। लेकिन इन सबसे बालों को नुकसान हो सकता है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है |रंगों से याद आया, रंग में कई तरह की मिलावटें आती हैं जिनकी वजह से बाल और हमारी स्किन को काफी नुकसान पहुँचता है। इससे बचने के उपाय भी हम कर लेते हैं लेकिन कोई फर्क नही पड़ता। होली भी खेलना है और स्किन को भी बचाना है तो काफी मेहनत का काम है। तो चलिए हम आपको बता देते हैं स्किन को बचाने के कुछ तरीके जिन्हें अपनाकर आप आराम से होली खेल सकते हैं।

जानिए होली खेलते समय क्या रखें बालों के लिए सावधानी—

होली खेलने से 15 मिनट पहले आप अपने बालों पर पर्याप्त तेल से मालिश कर लें. इसके लिए नारियल, जैतून, सरसों या किसी भी अन्य तेल का चयन कर सकते हैं. यह ध्यान रखें कि तेल गर्म न हो. इससे बालों को नुकसान हो सकता है |

बालों पर जमे रंगों को जल्दी निकालने की चाहत में शैम्पू को बालों पर बार-बार मत रगड़िए, क्योंकि बालों पर जमा रंग साफ होने में कुछ समय लग सकता है| होली के रंगों को बालों से हटाने के लिए बेबी शैम्पू या प्राकृतिक शैम्पू का इस्तेमाल कर सकते हैं |

होली खेलते समय टोपी के नीचे प्लास्टिक शॉवर कैप पहनने से बालों की सुरक्षा दोगुनी हो जाती है | सूखे रंगों से होली खेलने के बाद बालों को अच्छी तरह ब्रश कर लें. ब्रश करने मात्र से ही सिर पर जमे रंगों को हटाने में काफी मदद मिलती है |

ध्यान रखें,होली खेलने के दौरान बालों को कभी खुला नहीं छोड़ना चाहिए। खुले बाल ज्यादा रंग सोखते हैं, जिससे खोपड़ी पर रंगों का ज्यादा जमाव होता है। होली खेलने के दौरान बालों को टोपी या स्कार्फ से पूरी तरह ढक लेना चाहिए |

इसके साथ साथ होली के रंगों से सने बालों को गर्म पानी से नहीं धोना चाहिए, इससे बाल खराब हो सकते हैं। गर्म पानी बालों को शुष्क बना देता है। होली में बाल धोने के बाद उसे ब्लो-ड्राई न करें, बल्कि प्राकृतिक तरीके से सूखने दें।
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होली में गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ख्याल—-
होली का त्योहार सबके लिए खुशियां लेकर आता जरूर है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये चिंता का सबब भी बन कर आता है। इन कुछ लोगों में शामिल है- गर्भवती महिलाएं।आइये जाने इस वर्ष होली खेल
गर्भवती महिलाओं के लिए होली में मजे करना काफी कठिन होता है या यूं कहें कि वे होली का आनंद उठा ही नहीं क्योंकि उनके साथ एक नन्ही जान की भी जिम्मेदरी होती है जिसपर थोड़ी सी लापरवाही बड़ी भारी पड़ सकती है। इसलिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही होली के रंग का आनंद लें। फिर भी अगर आप होली का आनंद लोना चाहती हैं तो इन कुछ बातों का ख्याल रखें।

प्रतिरोधक क्षमता होती है कमजोर
अन्य इंसानों की तुलना में गर्भवती महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जिस कारण उनके संक्रमित होने का खतरा अन्य महिलाओं से अधिक होता है। साथ ही ये भी माना जाता है कि गर्भवस्था के दौरान रासायनिक रंगों से होली खेलने से महिलाएं और उनके गर्भ में पलने वाले बच्चे पर नकरात्मक असर पड़ता है। ऐसे में इस दिन रासायनिक रंगों से दूर रहना ही समझदारी है। क्योंकि इन रासायनिक रंगों को बनाने में कई बार व्यापारी एसिड, माइका, ग्लास पाउडर, अल्कालिस, लीड, बेंजीन, तथा एरोमेटिक कंपाउंड का इस्तेमाल करते हैं। ये पदार्थ तंत्रिका तंत्र, गुर्दे तथा जनन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञ परामर्श देते हैं कि होली में गर्भवती महिलाएं रंगों से दूर ही रहें, जिससे कि गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य भी न बिगड़े और उनमें त्योहार का उत्साह भी बना रहे।

इन रंगों को इस्तेमाल करें—–
अगर किसी गर्भवती महिला को होली का आनंद लेना भी है तो वो हर्बल रंग का इस्तेमाल कर सकती हैं। या फिर घर पर ही हल्दी, बीटरूट, प्याज ,पालक और धनिया पत्ता से बने रंगों का इस्तेमाल कर सकती हैं। ये नैचुरल रंग होते हैं जिसके कारण इनसे कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता।

इस होली पर गर्भवती महिलाएं ये सावधानियां बरतें—
बैठकर होली खेलें – होली खेलते वक्त बैठकर ही होली खेलें। भागम-भाग ना करें। क्योंकि एक भी कदम अगर फिसला तो आपके साथ आपके गर्भ में पल रहे शिशु की जान पर आफत आ सकती है।
भांग से दूर रहें – होली के दौरान अधिकतर मिठाइयों व पेय पदार्थों में भांग का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी चीजों से दूर रहें। भले ही भांग एक प्राकृतिक चीज है, मगर उसका भी नशा बच्चे के जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वैसे भी भांग का नशा एक-दो दिन तक रहता है और उसका हैंगओवर उतारना काफी मुश्किल होता है। तो बाहर से लाई गई या किसी के द्वारा दी गई मिठाईयों का सेवन ना करें। इस दिन पीने के लिए केवल शुद्ध पानी का ही इस्तेमाल करेँ।
अच्छे से खुद को साफ करें – होली खेलने के बाद शाम को खुद को अच्छे से साफ कर लें। आप रंगों को हटाने के लिए बेसन औऱ दूध का प्रयोग करें।
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जानिए होली खेलने के दौरान बरतें ये सावधानी-

— नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें |
—- भांग और एल्कोहल से दूर रहे |
—- बहुत अधिक गहरे रंगों का इस्तेमाल न करें |
—आप होठों पर अच्छी तरह से पेट्रोलियम जेली लगा सकते हैं।
—आप अपने दांतों को हो रंगों से बचा सकते हैं। पेट्रोलियम जेली को गर्म करके दांतों पर लगाएं इससे रंग दांतों पर नही चिपकेगा।
—-होली खेलते समय हमेशा पूरी बांह वाले कपडे ही पहने जिससे आपकी त्वचा सही सलामत बची रहेगी।
—-– होली खेलने के दौरान कड़ी धूप के संपर्क में आने से आपके बाल बहुत रूखे हो सकते हैं और नमी भी खो सकती है, इसलिए तेल अवश्य लगाएं, यह आपके बालों के लिए सुरक्षा कवच का भी काम करेगा और बालों से रंग भी बहुत आसानी से निकल जाएगा।
– रंगों के संपर्क में आने के कारण आपकी त्वचा पहले से ही संवेदनशील हो जाती है, ऐसे में होली के दिन जब तक बेहद जरूरी न हो तब तक दो बार से ज्यादा न नहाएं क्योंकि इससे त्वचा की नमी जा सकती है और त्वचा की पीएच बैलेंस में भी बहुत बदलाव हो सकता है। नहाने के बाद मॉइश्चराइजर लगाना कभी नहीं भूलें।
—- रंग छुड़ाते समय बहुत अधिक साबुन का इस्तेमाल न करें |
—नेचर फ्रेंडली रंग ही खरीदें या फिर फूलों से घर पर ही रंग बना ले।
—-त्वचा को धूप से बचाने के लिए चेहरे पर वाटरप्रूफ सनस्क्रीन लगाएं।
—-होली खेलने से पहले शरीर पर अच्छी तरह से मॉश्चराइज,नारियल या सरसों का तेल लगाएं। ताकि स्किन से रंग भी आसानी से छूट जाए।
—-साथ ही अगर आपके नाख़ून लंबे है तो उन्हें काट ले या फिर उन पर कोई भी नेल पेंट अप्लाई कर ले ताकि रंग नाखुनो पर ना पहुंचे।
—– चेहरे पर रंग लगा होने से आपकी त्वचा पहले से ही बहुत रूखी होती है, ऐसे में त्वचा को ज्यादा रगड़े नहीं और हल्के हाथों से स्क्रब करें क्योंकि ज्यादा रगड़ने से आपकी त्वचा में खूब जलन हो सकता है या दाने पड़ सकते हैं। रंग छुड़ाने के लिए सोडियम लॉरेथ युक्त क्लींजर का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल के बाद मॉइश्चराइजर अवश्य लगाएं।
—– रंग निकलने के बाद त्वचा और बालों में अगर रूखापन रहे तो रात में बालों में अच्छी कंपनी का हेयर सीरम और त्वचा पर माॉइश्चराइजर या नाइट क्रीम अवश्य लगाएं। रात में त्वचा की कोशिकाएं और बाल खुद को अछि तरह रिपेयर करते हैं। आपको इन उत्पादों का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर दो से चार सप्ताह के भीतर बहुत बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
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होली खेलते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने से आप हानिकारक रसायन युक्त रंगों के दुष्प्रभाव से बच सकते है :—

१) सावधानी रखिये कि कही होली का रंग आँख या मुँह में न चला जाय अन्यथा आँखों की ज्योति अथवा फेफड़ों व आँतो में हानि पहुँचा सकता है । अत: जब कोई रंग लगाये तब मुँह व आँखे बंद रखिये ।

२) रंग खेलने से पहले ही अपने शरीर पर नारियल, सरसों अथवा खाद्य तेल की अच्छी तरह से मालिश क्र लीजिये ताकि त्वचा पर पक्के रंगों का प्रभाव न पड़े और साबुन लगाने मात्र से ही वे रंग निकल जायें । अपने बालों में भी तेल की अच्छी तरह से मालिश कर लीजिये ताकि रासायनिक रंगो का सिर पर कोई प्रभाव न पड़े ।
इसप्रकार की मालिश के आभाव में रासायनिक रंग त्वचा पर गहरा प्रभाव छोड़ते है तथा त्वचा में कुछ दिनों तक जलन एवं शुष्कता बनी रहती है ।

३) जो लोग होली खेलने में वार्निश, आईलपेंट या अन्य किसीप्रकार के चमकदार पेंट का उपयोग करते हैं, ऐसे लोगो से सावधान रहिये । भूलकर भी उस टोली में शामिल न होइये, जिसमें इसप्रकार के घातक पदार्थो से होली खेली जाती हो । ये रंग चेहरे की त्वचा के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित हुए है । कभी-कभी तो पूरा चेहरा ही काला या दागदार बन जाता है । यदि कोई आप पर ऐसा रंग जबरन लगा भी दे तो तुरंत ही घर पहुँचकर रुई के फाहे को मिटटी के तेल में डुबोकर उससे धीरे-धीरे रंग साफ़ कर लीजिये । फिर साबुन लगाकर चेहरा धो डालिये ।

४) त्वचा पर लगे पक्के रंग को बेसन, आटा, दूध, हल्दी व तेल के मिश्रण से बना उबटन बार-बार लगाकर एवं उतारकर साफ़ किया जा सकता है । यदि उबटन के पूर्व उस स्थान को नींबू से रगड़कर साफ़ कर लिया जाय तो और भी लाभ होगा । नाखूनों के आस-पास की त्वचा में जमे रंग को भी नींबू द्वारा घिसकर साफ़ किया जा सकता है ।

५) रंग घर के बजाय बरामदे में या सडक पर ही खेले ताकि घर के भीतर रखी वस्तुओं पर उनका दुष्प्रभाव न पड़े ।

६) होली खेलते समय फटे या घिसे हुए पतले वस्त्र न पहने ताकि किसी भी प्रकार की लज्जाजनक स्थिति का सामना न करना पड़े ।

७) होली के अवसर पर देहातो में भाँग व शहरों में शराब पीने का अत्यधिक प्रचलन है । पर नशे के मद में चूर होकर व्यक्ति विवेकहीन पशुओं जैसे कृत्य करने लगता है ।
क्योंकि नशा मस्तिष्क से विवेक का नियंत्रण हटा देता है, बुद्धि में उचित निर्णय लेने की क्षमता का ह्रास कर देता है और वह मन, वचन व कर्म से अनेक प्रकार के
असामाजिक कार्य कर बैठता है । अत: इस पर्व पर सभी प्रकार के नशों से सावधान रहें ।

८) शिष्टता व संयम का पालन करें । भाई सिर्फ भाइयों की टोली में व बहनें सिर्फ बहनों की ही टोली में होली मनाये । बहनें घर के परिसर में ही होली मना लें तो और भी अच्छा है ताकि दुष्ट प्रवृति के लोगो की कुदृष्टि उन पर न पड़े ।

९) जो लोग कीचड़-गंदगी व पशुओं के मल-मूत्र जैसे दूषित पदार्थो से होली खेलते है, वे खुद तो अपवित्र होते ही है, औरों को भी अपवित्र करने का पाप अपने सर पर चढाते है। अत: मल-मुत्रवाले गंदे कीचड़ आदि का प्रयोग न करें ।

१०) रंग खेलते समय शरीर पर गहने आधी कीमती चीजें धारण न करें, अन्यथा भीड़ में उनके चोरी या गुम हो जाने की संभावना बनी रहती है ।
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होली के बाद कैसे साफ करें रंग-

– अगर आप पूरी तरह रंग से रंग चुके हैं, तो चलते पानी के नीचे दस मिनट खड़े रहें। स्किन पर लगे होली के रंग को छुड़ाने के लिए स्क्रब न करें। इससे स्किन खराब और ड्राई हो जाएगी।
– साधारण साबुन से कलर छुड़ाने के बजाए लिक्विड सोप का इस्तेमाल करें। ये आपकी स्किन को स्मूथ भी बनाए रखेगा साथ ही होली का रंग जल्दी छूट जाएगा। इसके बाद हर्बल फेसपैक ही चेहरे पर लगाएं। इससे किसी प्रकार की एलर्जी नहीं होगी।
– चेहरा साफ करने के लिए रूई में ऑलिव ऑयल लें। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। तो ये सभी उपाय अपनाएं और होली को बनाए सेफ और हेल्दी होली।

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