लेखक परिचय

गोपाल बघेल 'मधु'

गोपाल बघेल 'मधु'

President Akhil Vishva Hindi Samiti​ टोरोंटो. ओंटारियो, कनाडा

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हलके से जब मुसका दिए, उनको प्रफुल्लित कर दिए;

उनकी अखिलता लख लिए, अपनी पुलक उनको दिए !
थे प्रकट में कुछ ना कहे, ना ही उन्हें कुछ थे दिए;

पर हिया आल्ह्वादित किए, कुछ उन्हें वे थिरकित किए !

जो रहा अन्दर जगाए, उर तन्तु को खिलखिलाए;

सब नाड़ियाँ झँकृत किए, हर चक्र को झिलमिलाए !
निज आत्म का आभास दे, उस आत्म को अहसास दे;

परमात्म का सुर दे दिए, आह्वान अद्भुत भर दिए !

विश्वास उनको दे दिए, सहचर्य सुख ले दे दिए;

जग तंत्र ‘मधु’ तन्त्रित किए, प्रभु यन्त्र को यन्त्रित किए !

रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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