लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

Posted On by &filed under धर्म-अध्यात्म.


भारत ही नहीं वरन् विश्व का हिन्दू अयोध्या में भगवान् राम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर की सदियों से राह देख रहा है ! भगवान् राम तो लोभ-मोह से परे एक बार वनवास में चले गए थे – तब पिता का सम्मान रखना था उन्हें ! अब फिर से भगवान् राम की जन्मभूमि पर के मंदिर को यानी कि भगवान् राम को ही फिर से वनवास भेजा गया ! 450 वर्ष का अन्याय 4,00,000 हिन्दुओं का बलिदान, कोठारी बन्धुओं के वृद्ध माता-पिता के आंसुओं में से भी धधकती हुई राम मंदिर की आशा, जिन लोगों का राम जन्मभूमि पर इंच भर भी हक नहीं, ऐसे-ऐसे लोगों के साथ हिन्दुओं के सम्मान्य साधु-संतों को बिठा-बिठाकर किए गए समझौते के अनेकानेक प्रयास…….यह सब कुछ सरयू के जल में बह गया क्या ? तब भगवान् राम ने पिता के सम्मान के लिए वनवास भी झेला।

अब हम भी भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च न्यायपालिका के सम्मान के लिए यह दुःख भी झेलेंगे कि अब फिर से भगवान् राम वनवास भेजे गए ! उनके अपने जन्मस्थान पर उनका अपना एक मंदिर हो – मंदिर भगवान् का घर माना जाता है – इसके लिए भगवान् को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर करने वालों ने यानी कि बार-बार निरर्थक अर्जियां प्रस्तुत कर देश और हिन्दुओं का अपमान करनेवालों ने तो न्यायपालिका का सम्मान नहीं किया ! लेकिन इस देश का हिन्दू आज दुःखी है ! किसी भी अन्य देश में 85 प्रतिशत से अधिक संख्या में शांति से रहने वालों पर 15 प्रतिशत द्वारा बड़े-बड़े अन्याय नहीं किए जाते – लेकिन भारत में हिन्दू भी अब भगवान् राम के साथ वनवास भेजे गए ! भगवान् राम को और करोड़ों हिन्दुओं की आशा जगी हुई थी कि इतने वर्षों के न्यायालयीन प्रयासों के बाद अब भगवान् राम को उनकी अपनी जन्मभूमि पर एक मंदिर मिलेगा ! लेकिन नहीं !

यह देरी करने में याचिकाकर्ता का क्या मतलब और क्या दुर्हेतु है, यह देश के हिन्दू नहीं समझते ऐसा भी नहीं है, लेकिन भगवान् राम तो अवश्य देख और समझ रहे होंगे कि उनको उनके मंदिर से कौन, क्यों, कब तक वंचित रख रहे हैं !

अयोध्या की परिक्रमा मार्ग में 400 मुस्लिम परिवारों को गरीब आवास योजना में अभी-अभी घर दिए गए – लेकिन अयोध्या में भगवान् राम को उनकी अपनी जन्मभूमि पर मंदिर के लिए कितनी राह देखनी होगी ? और तो और जब दूसरे दिन इसका निर्णय होनेवाला हो उस दिन फिर से भगवान् राम वनवास में ? 1 अक्टूबर को प्रयाग (जिसे कुछ लोग अल्लाहाबाद कहते हैं) के न्यायालय के एक न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो रहे हैं – इसका अर्थ यह है कि फिर से नए सिरे से ट्रायल चलेगी ? फिर अब तक इतने वर्षों से जो सुनवाइयां हुईं, जो निर्णय लिखा भी गया होगा, उसका क्या ? यह देरी करने में याचिकाकर्ता का क्या मतलब और क्या दुर्हेतु है, यह देश के हिन्दू नहीं समझते ऐसा भी नहीं है, लेकिन भगवान् राम तो अवश्य देख और समझ रहे होंगे कि उनको उनके मंदिर से कौन, क्यों, कब तक वंचित रख रहे हैं ! समझौते का बुरका पहनाकर हिन्दुओं को जलील करने की चाल आज तक बहुत चली गयी-न्यायालयों का सम्मान करनेवाले हिन्दू सब दुःख सहते रहेंगे – लेकिन कब तक भगवान् राम अपने मंदिर से वंचित रखे जायेंगे ? क्यों ? इतनी हताशा हिन्दुओं में निर्माण हो, यह किस का प्रयास चल रहा है ?

सेकुलर दिखने की यह फैशन भारत में कैंसर की तरह फैली है – जिनके मन में आज लड्डू फूट रहे होंगे कि वाह-वाह ! देखो हिन्दुओं के राम का मंदिर नहीं बन रहा है ना – वे यह अच्छी तरह समझ लें कि हिन्दू धर्म ने भगवान् राम की न्यायप्रियता देखी है और महाभारत के काल में शिशुपाल और भगवान् श्रीकृष्ण की कहानी भी देखी है ! जो यह सोचकर आज उत्सव मना रहे होंगे कि अब उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश सेवानिवृत्त होंगे, फिर नयी बेंच बनेगी, फिर नए सिरे से सुनवाई होगी और भगवान् राम को मंदिर कभी भी नहीं मिलेगा – ऐसे लोग यह भी समझ लें कि भारत का हिन्दू अब न्यायालयों की परम्परागत देरियों से उकता गया है, दुःखी है, आहत है ! हमारे जैसे लोग संपूर्ण देश में, समाज के हर वर्ग में प्रवास करते रहते हैं – हर वर्ग के हर उम्र के हिन्दुओं से मांग आ रही है कि अब बस ! यदि शाहबानो केस में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बावजूद भारत की संसद अलग कानून बना सकती है, तो भगवान् राम के मंदिर के लिए क्यों नहीं ? क्यों भारत की संसद भगवान् राम को भावी जन्मभूमि पर मंदिर के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर रही है ? भारत की संसद यह भी समझे कि भारत का हिन्दू 6 दशकों से स्वतन्त्र भारत में न्याय की राह देख रहा था – यह न्याय अपने लिए हिन्दू नहीं मांग रहे हैं !

भगवान् राम की अपनी जन्मभूमि पर उनका अपना मंदिर बने, जो पहले से ही था, इसके लिए हिन्दू तरस रहा था – अब हिन्दुओं को और ना तरसाओ, यही मांग भारत का हिन्दू भारत की संसद से कर रहा है ! बहुत देख ली न्यायालयीन प्रक्रियाओं की देरी, बहुत देखी ली झूठ-मूठ की याचिकाएं और बहुत देख लिए राजनीति से प्रेरित समझौते के खोखले प्रयास ! विदेशी बाबर के ढांचे को सम्मान देने वाले सेकुलर भी भारत ने बहुत देख लिए, अब बस ! बस हुआ भगवान् राम का कलियुगी वनवास ! नहीं राह देखनी है हिन्दुओं को न्यायालयीन देरी की – हिन्दू न्यायालयों का सम्मान करते हैं, करते रहेंगे लेकिन बस ! यह मसला भारत की अस्मिता का मसला है।

अब भारत की संसद भगवान् राम का मंदिर बनाने का कानून भगवान् सोमनाथ की तर्ज पर बनाए, यही एक तात्कालिक मांग है ! और सभी राजकीय पक्ष इसमें एक होकर हिन्दुओं का श्रद्धा स्थान और भारत का सम्मान ऐसे भगवान् राम के मंदिर के लिए कानून बनाए और वह भी अब बिना देरी के ! भारत के हिन्दुओं के धर्मसंयम की और परीक्षा अब ना ले कोई, यही भगवान् राम से प्रार्थना है !

Leave a Reply

9 Comments on "भगवान श्रीराम को फिर से वनवास????- डॉ0 प्रवीण तोगड़िया"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
Shandilya Sharma
Guest

प्रवीण भैया, आपने रुला दिया मुझे।

प्रवक्‍ता ब्यूरो
Guest

मंदिर तोडना आसन था अब बनाना मुश्किल पद रहा है .तोगड़िया जी तोड़ने की नहीं जोड़ने की राजनीती करो बेहतर होगा जिस दिन भारतीयों को आप यह विशवास दिला देंगे मंदिर अपने आप बन जाएगा

shrikant upadhayay
Guest
माननीय प्रविण तोगड़िया जी क्या अब हम ये मान ले की भारत में हिन्दू बचे ही नहीं है क्योकि भारत में अनेक राजनैतिक पार्टिया है जो समयानुसार राम को अपने लिए खेलते आये है भारतीय जनता पार्टी जैसे दल ने तो भगवान राम को चुनाव जितने के लिए अपना ब्रांड एम्बेसडर बना लिया था लेकिन दुबारा राम को ही भूल गए और श्री राम जनता पार्टी को भूल गए ये तो होना ही था !मैंने आपका आलेख पढ़ा क्या अब हम विचारो की अभिवयक्ति मात्र से भगवान राम को न्याय दिला सकेगे या हमे १९९२-९३ की घटना की पुनरावृति करनी… Read more »
amarjeet singh chhabra
Guest
आज हिन्दुओ को खतरा मुस्लिमो से ज्यादा दोगुले हिन्दुओ से है हिन्दू होते हुए भी पता नहीं क्यों ये मुस्लिमो के लिए मुस्लिमो से ज्यादा सोचते है छत्तीसगढ़ राज्य में हमने इस बात को देखा है सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर २०० -३०० वर्ष पुराने मंदिरों को तोडा गया आस्था के प्रतीक मूर्तियों को नगर निगम की कचरा ले जाने वाली गाडियों में ले जाया गया जबकि मुस्लिमो के किसी भी अवेध रूप से बने मजारो को हाथ तक नहीं लगाया गया गार्डन के अन्दर रोड के ऊपर और तो और मंत्रालय के वी आई पी गेट के… Read more »
Anil Sehgal
Guest
“भगवान श्रीराम को फिर से वनवास????- डॉ0 प्रवीण तोगड़िया” (१) न्यायालयीन प्रक्रियाओं द्वारा, न्याय करने में देरी करने की आदत, न्यायालयों के पास है; यह उनके स्वभाव और खून में है – माफ़ करे, कहने को बहाने बहुत लिखे जातें हैं. (२) क्या हिन्दू के पास कोई अस्थायी विकल्प नहीं है ? (३) राजा राम, घर से वंचित, शरणार्थी की तरह ही तो हैं – छपर में ? (४) क्या, विकल्प के रूप में राम का अस्थायी निवास, जो भव्य हो, नहीं बन सकता जिसका केवल मात्र : कारण – न्यायालयों के कार्य करने की विलम्ब करने की प्रक्रिया ?… Read more »
wpDiscuz