लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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मिलन सिन्हा 

जिन्हें

ढूंढ़ रही थी आँखें

वो कहाँ चले गए

जिन्हें

देख रही थी आँखें

वो पहचान कहाँ खो गए

जिन रास्तों पर

चलने की सीख

गुरुजनों के दी थी

वे रास्ते क्यों अब

सुनसान पड़ गए

जिन पर चलने से

किया था मना

वे रास्ते क्यों अब

भीड़ से पट गए

परवरिश में तो

नहीं थी कोई कमी

फिर बच्चे

माँ – बाप को छोड़ कर

क्यों चले गए

न जाने

किस काम में लग गए

किस भीड़ में खो गए

कैसे रिश्तों की परिभाषा

ऐसे बदलते गए

कैसे हम

इतने अकेले हो गए

भविष्य के सपने

क्यों ऐसे चकनाचूर हो गए ?

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