लेखक परिचय

डॉ.अलका अग्रवाल

डॉ.अलका अग्रवाल

ऐसोसियेट प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग नवल किशोर भरतिया म्युनिसिपल कन्या महाविद्यालय, चन्दौसी

Posted On by &filed under कविता, साहित्‍य.


loveकच्चे धागे प्रेम के, थोड़ा खिचतें ही बिखर जाएँ,

चढ़ाओं इस पर धार विश्वास की ताकि पक्के हो जाए।

पहनों इसको ध्यान से कहीं उलझन न कोई पड़ जाए,

सुलझाओं फिर धैर्य से ताकि सिकुड़न न पड़ पाए।।

प्रेम की डोर को तानों उतना ही कि टूटने न पाये,

जुड़ने को पड़ी गांठ से फिर वह बात न आ पाए।

स्नेह, सम्मान और विश्वास के इसमें मोती लगााओ,

त्याग, समर्पण और सहयोग से इसकी चमक बढ़ाओ।।

सुख शान्ति रहे मन में, जीवन सफल बन जाए,

पहने माला प्रेम की तो बिन मांगें ईश्वर भी मिल जाए।।

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz