लेखक परिचय

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

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याद कीजिए उन दिनों को जब लोकसभा का चुनाव प्रचार चरम पर था, जब नतीजे भारतीय जनता पार्टी या कहें नरेन्द्र मोदी के पक्ष में आए, जब नरेन्द्र मोदी की ताजपोशी हो रही थी। याद आए वह दिन। गुजरात में मोदी और मध्यप्रदेश में शिवराज के विकास ने, दोनों को भाजपा का ‘पोस्टर बॉय’ बना दिया था। इसलिए उन दिनों गुजरात बनाम मध्यप्रदेश की बहस को जानबूझकर उछाला गया था। नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान को आमने-सामने खड़ा कर दोनों के बीच खटास डालने का प्रयास किया जा रहा था। यहाँ तक कहा कि प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र मोदी सबसे पहले मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बदलेंगे। लेकिन, सब उलट हो रहा है। सारे कयास, सारे गणित, सारे विश्लेषण गलत साबित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच न केवल संबंधों में गाढ़ापन आ रहा है, बल्कि भाजपा की एक नई जोड़ी बनती दिखाई दे रही है। शिवराज के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री का बार-बार मध्यप्रदेश आना, अपनी महत्त्वाकांक्षी योजनाओं एवं अभियानों की मध्यप्रदेश की भूमि से घोषणा करना, शिवराज को महत्त्व देना, मोदी मुख से शिवराज की तारीफ और शिवराज द्वारा मोदी की प्रशंसा, यह सब किस ओर इशारा करते हैं। पिछले ढाई साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जितनी बार गुजरात नहीं गए होंगे, उससे अधिक बार मध्यप्रदेश आ चुके हैं। यह देखकर लगता है कि हृदयप्रदेश प्रधानमंत्री के दिल के करीब है। प्रधानमंत्री के आज के प्रवास को भी इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि उसे प्रधानमंत्री के आतिथ्य का अवसर लगातार मिल रहा है।

पाकिस्तान और उसके द्वारा पोषित आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से भारत में सेना के प्रति गौरव का अभूतपूर्व वातावरण बन गया है। समूचा देश राष्ट्रीयता की भावना से भरा हुआ है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बनाए गए ‘शौर्य स्मारक’ को इस वक्त में सैनिकों को समर्पित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आना,राष्ट्रीयता के भाव को और अधिक पुष्ट करेगा। सेना और शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट करने की यह घटना ऐतिहासिक होगी। देशहित में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले बलिदानियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का कोई अवसर भाजपा जाने नहीं देती। ‘आजादी के 70 साल, जरा याद करो कुर्बानी’ का उद्घोष भी प्रधानमंत्री ने 9 अगस्त को महान क्रांतिकारी शहीद चन्द्रशेखर आजाद की जन्मभूमि भाभरा (अलीराजपुर) से किया था। अब आजादी के 70 साल बाद शहीदों के शौर्य की स्मृति में बने देश के पहले स्मारक का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश में करेंगे। प्रधानमंत्री जब शौर्य स्तम्भ में अखण्ड ज्योति को प्रज्वलित कर रहे होंगे, तब उसके तेज से प्रदेश में शिवराज की और चमक बढ़ेगी। मध्यप्रदेश2018 में विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहा है। इसलिए प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी हलचल है। शह-मात का खेल चल रहा है। भाजपा में ऐसे कई नेता हैं, जिनको सपने में मुख्यमंत्री की कुर्सी दिखाई देती है। लेकिन, उस पर जब उन्हें शिवराज का ‘अंगद पाँव’ दिखाई देता है, तब एक झटके से उनकी नींद उचट जाती है। अंगद पाँव को हिलाने के लिए भीतर ही भीतर अनेक प्रयास चल रहे हैं। यह प्रयास कभी-कभी अन्य रूप में बाहर भी प्रकट होते रहते हैं। आम आदमी की शक्ल-सूरत वाले मध्यप्रदेश की राजनीति के ‘असली चाणक्य’ ने इन सब भीतरघातियों के अरमानों को ठण्डा करने के लिए नरेन्द्र मोदी को बुलाने का सही वक्त चुना है। एक तरफ,भीतरघातियों को संदेश जाएगा कि शिवराज को मोदी का पूरा साथ है। वहीं, देशभक्ति के माहौल में शहीदों के शौर्य से जुड़े इस आयोजन से मुख्यमंत्री की लोकप्रियता एवं उनकी छवि और अधिक मजबूत हो जाएगी।

बहरहाल, इस अवसर पर हृदयप्रदेश के प्रति नरेन्द्र मोदी के लगाव को भी समझने का प्रयास करते हैं। मध्यप्रदेश से नरेन्द्र मोदी का गहरा नाता है। लगभग 20 साल पहले नरेन्द्र मोदी को मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में कार्य करने की जिम्मेदारी मिली थी। तब उन्होंने शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रदेश के गाँव-गाँव में दौरे किए थे। अपनी वक्तृत्व कला से सबको मंत्र मुग्ध करने वाले नरेन्द्र मोदी ने भोपाल में ही आयोजित ‘भाजपा कार्यकर्ता महाकुम्भ’ में स्वयं यह स्वीकार किया है कि उन्हें एकात्म मानवदर्शन पर शिवराज सिंह चौहान का धाराप्रवाह भाषण सुनना बड़ा प्रिय लगता था। संभव है कि आज मोदी-शिवराज के संबंधों में जो गर्माहट महसूस हो रही है, उसका आधार बीस साल पहले एक साथ किया गया संगठन का काम ही हो। एक बात और हमें ध्यान रखनी चाहिए कि वर्ष 2013 में जिस वक्त प्रधानमंत्री की कुर्सी/ भाजपा के नेतृत्व के लिए मोदी और शिवराज को प्रतिद्वंद्वी बनाने के प्रयास प्रारंभ हो रहे थे, उस वक्त इसी मध्यप्रदेश की धरती पर, इसी भोपाल में नरेन्द्र मोदी के लिए विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक सभा का आयोजन किया गया था। दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितंबर, 2013 को मध्यप्रदेश की करीब साढ़े सात लाख जनता ने प्रत्यक्ष उपस्थित होकर नरेन्द्र मोदी का स्वागत किया था। संभव है जनता के इसी अभूतपूर्व समर्थन ने नरेन्द्र मोदी के मन में मध्यप्रदेश के लिए विशेष प्रेम जगा दिया हो। मोदी-शिवराज संबंधों का अध्ययन करते समय यह स्पष्ट दिखाई देता है कि मोदी ने लगातार शिवराज को मजबूत ही किया है। योजना आयोग को समाप्त करने के बाद जब उसके विकल्प के तौर पर नीति आयोग का गठन किया गया, तब प्रधानमंत्री मोदी ने उसकी अध्यक्षता शिवराज सिंह चौहान को सौंपी। यानी देश के सभी मुख्यमंत्रियों के बीच उन्होंने शिवराज और मध्यप्रदेश को वरीयता दी।

यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न केवल केंद्र सरकार की योजनाओं और अभियानों की घोषणा करने के लिए यहाँ आ रहे हैं, बल्कि प्रदेश के अभियान को देशभर में ले जा रहे हैं। जिस अभियान ने शिवराज सिंह चौहान को ‘जगत मामा’ बना दिया, उसे प्रधानमंत्री ने समूचे देश के लिए अनुकरणीय बताया है। प्रदेश के ‘बेटी बचाओ’ अभियान को प्रधानमंत्री ने और आगे बढ़ाकर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के रूप में राष्ट्रीय स्वरूप दे दिया है। इसी प्रकार, लगातार चार वर्ष से कृषि कर्मणा पुरस्कार जीत रहे प्रदेश के किसानों के बीच आकर नरेन्द्र मोदी ‘प्रधानमंत्री फलस बीमा योजना’ की सौगात देश को देते हैं। बाबा साहेब भीमराव आंबेडर की जयंती (14 अप्रैल) के अवसर पर उनकी जन्मस्थली महू (इंदौर के समीप) पहुँचकर नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-मण्डी) का शुभारम्भ करते हैं। इसी दिन महू से ही उन्होंने ‘ग्रामोदय से भारत उदय’ जैसे महत्त्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत की। समूचे देश में यह अभियान 15 दिन चला, जबकि मध्यप्रदेश ने इस अभियान को 45 दिन तक चलाने का निर्णय लिया। सिंहस्थ के दौरान अंतरराष्ट्रीय विचार महाकुम्भ में भी प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश को आतिथ्य का अवसर दिया। बहरहाल, शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भरपूर प्रयास करती है कि वह केन्द्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके। केन्द्र की योजनाओं को सबसे पहले लागू करने का प्रयास भी प्रदेश सरकार करती है। डिजिटल इंडिया की तर्ज पर डिजिटल मध्यप्रदेश योजना शुरू की गई। प्रधानमंत्री मोदी का स्वप्न है कि लोगों को घर बैठे जरूरी सुविधाएँ प्राप्त हों, इस दिशा में प्रदेश सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश की अनेक सुविधाओं का लाभ ऑनलाइन लिया जा सकता है। इसी तरह, ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर ‘मेक इन मध्यप्रदेश’ की पहल करने वाला एकमात्र राज्य मध्यप्रदेश है। आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम की तर्ज पर अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी ‘शिव की बात’ के जरिए प्रदेश की जनता से संवाद करेंगे। उल्लेखनीय होगा कि प्रधानमंत्री मोदी अपने ‘मन की बात’ में पाँच से छह बार मध्यप्रदेश और यहाँ के लोगों का जिक्र कर चुके हैं। यह सब मध्यप्रदेश के प्रति प्रधानमंत्री के विशेष लगाव को ही प्रकट करता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चाहिए कि वह प्रधानमंत्री की इस आत्मीयता का अधिक से अधिक लाभ प्रदेश की जनता को दिलाएँ। प्रदेश के विकास के लिए केन्द्र से अतिरिक्त धन और योजनाएँ लेकर आएँ। उम्मीद है कि मोदी-शिवराज की यह निकटता प्रदेश की बेहतरी में अहम योगदान देगी। उम्मीद यह भी है कि प्रदेश के प्रति प्रधानमंत्री का लगाव ‘सूखा’ नहीं रहेगा।

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