लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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डा. राधेश्याम द्विवेदी
भारत और जापान के सम्बन्ध हमेशा से काफ़ी मजबूत और स्थिर रहे हैं। जापान की संस्कृति पर भारत में जन्मे बौद्ध धर्म का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान भी जापान की शाही सेना ने सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज को सहायता प्रदान की थी। भारत की स्वतंत्रता के बाद से भी अब तक दोनों देशों के बीच मधुर सम्बन्ध रहे हैं। जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे के आर्क ऑफ फ्रीडम सिद्धांत के अनुसार यह जापान के हित में है कि वह भारत के साथ मधुर सम्बन्ध रखे ख़ासतौर से उसके चीन के साथ तनाव पूर्ण रिश्तों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो। भारत की ओर से भी चीन के साथ रिश्तों और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जापान को काफ़ी महत्व दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार की पूर्व की ओर देखो नीति ने भारत को जापान के साथ मधुर और पहले से बेहतर सम्बन्ध बनाने की ओर प्रेरित किया है। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर किसी द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए सर्वप्रथम जापान को चुना।जापान की कई कम्पनियाँ जैसे कि सोनी, टोयोटा और होंडा ने अपनी उत्पादन इकाइयाँ भारत में स्थापित की हैं और भारत की आर्थिक विकास में योगदान दिया है। इस क्रम में सबसे अभूतपूर्व योगदान है वहाँ की मोटर वाहन निर्माता कंपनी सुज़ुकी का जो भारत की कंपनी मारुति सुजुकी के साथ मिलकार उत्पादन करती है और भारत की सबसे बड़ी मोटर कार निर्माता कंपनी है। होंडा कुछ ही दिनों पहले तक हीरो होंडा (अब हीरो मोटोकॉर्प व होंडा मोटर्स) के रूप में हीरो कंपनी के पार्टनर के रूप में कार्य करती रही है जो तब दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल विक्रेता कंपनी थी। जापान ने भारत में अवसंरचना विकास के कई प्रोजेक्ट का वित्तीयन किया है और इनमें तकनीकी सहायता उपलब्ध करायी है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण रूप से उल्लेखनीय है दिल्ली मेट्रो रेल का निर्माण।
राजनीतिक एवं कूटनीतिक संबंध:- भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान भी जापान की शाही सेना ने सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज को सहायता प्रदान की थी। भारत की स्वतंत्रता के बाद से भी अब तक दोनों देशों के बीच मधुर सम्बन्ध रहे हैं। वर्तमान में भारत की ओर से भी चीन के साथ रिश्तों और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जापान को काफ़ी महत्व दिया गया है। चीन के दोनों ही देशों के साथ सीमा विवाद हैं।
दिसंबर 2006 में भारतीय प्रधानमंत्री की जापान यात्रा:- भारत की ओर से भी चीन के साथ रिश्तों और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जापान को काफ़ी महत्व दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार की पूर्व की ओर देखो नीति ने भारत को जापान के साथ मधुर और पहले से बेहतर सम्बन्ध बनाने की ओर प्रेरित किया है। दिसंबर 2006 में भारतीय प्रधानमंत्री की जापान यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित भारत-जापान सामरिक एवं वैश्विक पार्टनरशिप समझौता इसका ज्वलंत उदहारण है। रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच 2007 से लगातार सहयोग मजबूत हुए हैं और दोनों की रक्षा इकाइयों और सेनाओं ने कई संयुक्त रक्षा अभ्यास किये हैं। अक्टूबर 2008 में जापान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसके तहत वह भारत को कम ब्याज दरों पर 450 अरब अमेरिकी डालर की धनराशि दिल्ली-मुम्बई हाईस्पीड रेल गलियारे के विकास हेतु देगा। विश्व में यह जापान द्वारा इकलौता ऐसा उदाहरण है जो भारत के साथ इसके मजबूत आर्थिक रिश्तों को दर्शाता है।
जापानी सम्राट की भारत यात्रा, 2013:- इससे पहले नवंबर-दिसंबर 2013 में जापानी सम्राट आकिहितो और महारानी मिचिको ने भारत की यात्रा संपन्न की थी। प्रोटोकाल के विपरीत सम्राट को हवाई अड्डे पर लेने स्वयं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गये थे जो भारत जापान रिश्तों की प्रगाढ़ता दर्शाता है।
जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा, जनवरी 2014:- जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने जनवरी 2014 में भारत की सपत्नीक यात्रा की जिसके दौरान वे इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए गये थे। इसके बाद मनमोहन सिंह जी के साथ हुई शिखर बैठक दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच 2006 की शुरुआत के बाद आठवीं शिखर बैठक थी।इस बैठक में जापान ने भारत को विभिन्न परियोजनाओं के लिये 200 अरब येन (लगभग 122 अरब रुपये) का ऋण देने की पेशकश की और हाई स्पीड रेल, रक्षा, मेडिकल केयर, औषधि निर्माण और कृषि तथा तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की भी पेशकश की। भारत जापान श्रीलंका के पूर्वी भाग में त्रिंकोमाली में तापीय विद्युत संयत्र निर्माण में भी भागीदारी करने वाले हैं।
टोक्यो घोषणा-पत्र का सारांश:– सियासी, रक्षा व सुरक्षा भागीदारी- विदेश व रक्षा सचिवों को शामिल करते हुए ‘2+2 वार्ता’ का फैसला, रक्षा क्षेत्र में सहयोग और आदान-प्रदान के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर, हवा और पानी दोनों में विचरण करने वाले यूएस-2 विमान एवं उससे जुड़ी प्रौद्योगिकी के लिए सहयोग पर संयुक्त कार्यदल, क्षेत्र एवं विश्व में शांति तथा सुरक्षा के लिए वैश्विक साझेदारी- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधार, खासकर स्थाई एवं अस्थाई दोनों वर्गों में इसके विस्तार की अपील तथा इसके लिए 2015 की समय सीमा का सुझाव, आतंकवाद के सभी रूपों एवं प्रकारों की निंदा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, परमाणु अप्रसार और निर्यात नियंत्रण- दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग में महत्वपूर्ण प्रगति, भारत के 6 अंतरिक्ष और रक्षा संबंधित उद्यमों को जापान के फॉरेन इंड यूजर लिस्ट से हटाया गया, समृद्धि के लिए सहयोग – पांच वर्षों में भारत में जापान के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य, अगले पांच वर्षों में जापान की ओर से भारत में बुनियादी ढांचा, संपर्क, परिवहन प्रणाली, स्मार्ट सिटी, गंगा के अलावा अन्य नदियों का कायाकल्प, उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा, कौशल विकास, जल सुरक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उद्योग, कृषि शीत श्रृंखला और ग्रामीण विकास हेतु 3.5 ट्रिलियन येन का सार्वजनिक और निजी निवेश तथा वित्त पोषण, इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) को 50 अरब येन का ऋण, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रियल पार्क्स व जापान इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्थापना, पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के आर्थिक गलियारों से जोड़ने के लिए जापान का सहयोग, शिंकांसेन प्रणाली के लिए आर्थिक, तकनीकी और संचालनगत सहायता, ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग, भारत से जापान को दुर्लभ खनिज क्लोराइड के उत्पादन और पूर्ति, विज्ञान, प्रेरणादायक नव-प्रवर्तन और विकसित प्रौद्योगिकी – स्टीम सेल अनुसंधान, भौतिक विज्ञान, ज्ञान-विज्ञान, अंक गणित का इस्तेमाल, कम्प्यूटर और सूचना विज्ञान, महासागर संबंधी तकनीक, महासागर निगरानी, स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा जलवायु परिवर्तन विज्ञान और जल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में एक दूसरे का सहयोग करने का निर्णय, भारत और जापान में संयुक्त प्रयोगशालाओं को शुरू करने का प्रस्ताव। दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऐसे रिश्ते बनाने का निर्णय लिया, जिसमें इस शताब्दी में दोनों देशों की तरक्की की राह और इस क्षेत्र तथा दुनिया के स्वरूप को तय करने में मदद मिलेगी।
आर्थिक संबंध:- वर्तमान समय में भारत जापान द्विपक्षीय व्यापर लगभग 14 अरब डालर का है जिसे बढ़ा का २५ अरब डालर करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही जापान का भारत में लगभग 15 अरब डालर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी है।जापान की कई कम्पनियाँ जैसे कि सोनी, टोयोटा और होंडा ने अपनी उत्पादन इकाइयाँ भारत में स्थापित की हैं और भारत की आर्थिक विकास में योगदान दिया है। इस क्रम में सबसे अभूतपूर्व योगदान है वहाँ की मोटर वाहन निर्माता कंपनी सुज़ुकी का जो भारत की कंपनी मारुति सुजुकी के साथ मिलकार उत्पादन करती है और भारत की सबसे बड़ी मोटर कार निर्माता कंपनी है। होंडा कुछ ही दिनों पहले तक हीरो होंडा (अब हीरो मोटोकॉर्प) के रूप में हीरो कंपनी के पार्टनर के रूप में कार्य करती रही है जो तब दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल विक्रेता कंपनी थी।
बढ़ रहे हैं भारत-जापान के रक्षा और कारोबारी रिश्ते:-चीन की पैंतरेबाजी के बीच जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत की तीन दिन की यात्रा पर जा रहे हैं. इस दौरान दोस्ती के प्रदर्शन के साथ साथ रक्षा और व्यापारिक समझौतों के अलावा नागरिक परमाणु समझौते पर भी दस्तखत होंगे.भारत और जापान की दोस्ती को ऊपर जाते वक्र का रिश्ता बताया गया है. इसे प्रधानमंत्री शिंजो आबे के दौरे से और बल मिलेगा. वे 11 से 13 दिसंबर तक होने वाली 9वें वार्षिक शिखर भेंट में हिस्सा लेंगे. हालांकि दोनों देशों के बीच वार्षिक मुलाकातों की परंपरा बन गई है लेकिन इस मुलाकात पर खास ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि इसके दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु क्षेत्र में अहम समझौता होने की उम्मीद है. दोनों नेता एक साल पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर हुए फैसलों की समीक्षा भी करेंगे, जिसमें पारस्परिक संबंधों को विशेष रणनैतिक पार्टनरशिप में बदलने का फैसला किया गया था. टोक्यो के टेंपल यूनिवर्सिटी के जेम्स ब्राउन का कहना है कि आबे का भारत दौरा सांकेतिक और व्यावहारिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, “यह यात्रा न सिर्फ भारत के साथ जापान के रिश्तों को गहन बनाती है, बल्कि कम से कम जापान में इसे एशिया में चीन की ताकत को संतुलित करने का प्रभावी तरीका भी समझा जा रहा है.” नागरिक परमाणु समझौता:-बातचीत की एक प्राथमिकता रक्षा संबंधों और नागरिक परमाणु सहयोग की बातचीत को आगे बढ़ाना है. भारत ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अपने परमाणु बिजली उद्योग के आकार और क्वॉलिटी को बेहतर करना चाहता है. दूसरी ओर जापान भारत को परमाणु तकनीक के निर्यात का रास्ता साफ करना चाहता है. जेम्स ब्राउन का कहना है कि जापानी परमाणु उद्योग की घरेलू समस्याओं को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समझौतों का महत्व बढ़ गया है. लेकिन जापान की ओर से बाधाएं भी हैं क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं किए हैं. आर्थिक विश्लेषक राजीव विश्वास कहते हैं, “बातचीत का लक्ष्य होगा धीरे धीरे पारस्परिक परमाणु समझौते की ओर बढ़ना.” यही राय वॉशिंगटन के वुड्रो विल्सन सेंटर के माइकल कुगेलमन की भी है, “कई नाजुक मुद्दों पर सहमति होनी है. दोनों देशों में परमाणु मुद्दे पर संवेदनशीलता के चलते वे सख्त सुरक्षा कदमों पर जोर देंगे. ”
सुरक्षा और आर्थिक सहयोग:-सुरक्षा के जुड़े मुद्दे भी बातचीत के केंद्र में होंगे. दोनों देश तकनीकी गोपनीयता को लीक होने से रोकने का समझौता करेंगे जो दोनों देशों के बीच हथियारों की खरीद फरोख्त का आधार होगा. जेम्स ब्राउन कहते हैं, “यह महत्वपूर्ण है क्योंकि सख्त नियंत्रण जापान के लिए भारत के साथ रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रमुख शर्त है.” आबे के दौरे पर पहला प्रमुख रक्षा समझौता खोज और बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले यूएस 2 विमानों के संयुक्त प्रोडक्शन का होगा. जापान की सिर्फ आर्थिक दिलचस्पी नहीं है, बल्कि इलाके के देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाकर चीन के प्रभाव को कम करना भी है. रक्षा और ऊर्जा के अलावा जापान इस मौके पर खुद को भारत के संरचना पार्टनर के रूप में पेश करेगा. राजीव विश्वास का कहना है कि नगर विकास भारत जापान विकास सहयोग का मुख्य इलाका है. जापान भारत को दिल्ली मुंबई कॉरीडोर में शहरों और औद्योगिक इलाकों के अलावा स्मार्ट सिटीज के विकास में मदद दे रहा है. इसके अलावा जापान कई सालों से भारत को अपनी बुलेट ट्रेन तकनीक बेचना चाहता है. भारत भी रेल के विकास में विदेशी सहयोग चाह रहा है. जापान ने मुंबई अहमदाबाद बुलेट रेल प्रोजेक्ट के लिए 15 अरब डॉलर का सस्ता लोन ऑफर किया है.
स्वाभाविक रिश्ते:-भारत और जापान के रिश्तों को बेहतर बनाना नरेंद्र मोदी की एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है जिसका लक्ष्य एशिया प्रशांत के देशों के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत करना है. इसलिए आबे और मोदी की दिलचस्पी पारस्परिक व्यापार को बढ़ाने की है जो 2014 में 15 अरब डॉलर थी. राजीव विश्वास का कहना है कि जापान के निर्यात में भारत का हिस्सा सिर्फ 1.2 प्रतिशत है जबति चीन को जापान का 18.3 प्रतिशत निर्यात होता है. जापान ने आने वाले पांच सालों में भारत में करीब 35 अरब डॉलर निवेश करने का फैसला लिया है. शिंजो आबे की इस यात्रा से भारत जापान संबंधों में और तेजी आएगी. दिल्ली के रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान की स्मृति पटनायक का कहना है कि दोनों देशों के सामरिक हित एक दूसरे से मिलते हैं जिसका असर उनके रिश्तों पर दिखेगा, “जापान भारत में आर्थिक तौर पर सक्रियता बढ़ा रही है, वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों के विचारों में समानता आएगी.” लेकिन सीमाएं भी हैं. दक्षिण एशिया विशेषज्ञ जयशंकर कहते हैं, “भारत जापान के लिए अमेरिका का विकल्प नहीं हो सकता और न ही जापान भारत को वह सब कुछ दे सकता है, जो भारत चाहता है. लेकिन निकट भविष्य में आम रिश्तों पर कोई सवाल नहीं उठेगा.”
नवंबर 2016 में परमाणु सहयोग समझौता:- भारत और जापान के बीच नवंबर में परमाणु सहयोग समझौता हो सकता है। नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के दौरे पर जाएंगे। बीते साल दिसंबर में दोनों देशों के बीच समझौता होने वाला था पर किन्हीं कारणों से यह डील साइन नहीं की गई। आपको बता दें कि जापान दुनिया का इकलौता देश है जिस पर परमाणु हमला किया गया है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर बम से हमला किया था। जापान ने भारत से परमाणु अप्रसार की गारंटी मांगी थी। भारत और जापान के बीच लंबे समय से इस मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता की जा रही रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिजो आबे इस बिंदु पर सहमत हुए थे कि अगर भारत कोई परमाणु परीक्षण करता है तो इस स्थित में जापान अपना परमाणु सहयोग रोक देगा। दुनिया की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच परमाणु सहयोग समझौते से अमेरिकन फर्मों को फायदा होगा। भारत ने पहले ही जीई- हिटाची को न्यूक्लियर प्लांट के लिए जमीन दे चुका है। जीई- हिटाची जापान और अमेरिका की फर्मों के बीच सहयोग समझौता है। इसके अलावा तोसिबा वेस्टिंग हाउस को भी भारत ने न्यूक्लियर प्लांट के लिए जमीन दे रखी है। पिछले साल दिसंबर में भारत और जापान के बीच इस समझौते को अंतिम स्वरुप दिया जा सकता था पर दोनों देशों के बीच कुछ तकनीकी और कानूनी मतभेदों के चलते यह डील नहीं हो पायी थी। आगामी नवंबर में पीएम मोदी के जापान दौरे पर इस परमाणु सहयोग समझौते को अंतिम रुप दे दिया जाएगा ऐसी उम्मीद की जा रही है।

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