लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर ”शादाब”

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, आशा भोंसले, पूर्व क्रिकेट कप्तान कपिल देव, अजित वाडेकर, मौजूदा क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी समेत हिन्दुस्तान का हर एक व्यक्ति सरकार से ये माँग कर रहा है कि क्रिकेट की दुनिया में भारत का नाम दुनिया भर में रौशन कर क्रिकेट के बेशुमार रिकॉर्ड अपने और भारत के नाम कराने वाले क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले 38 वर्षीय सचिन तेंदुलकर को ”भारत रत्न” दिया जाना चाहिये। पर मेरा मानना है कि यदि खेलो में किसी को देश का सर्वोच सम्मान भारत रत्न दिया जाना चाहिये तो सचिन से पहले इस के सब से बडे हकदार हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद है। ये सच है कि आज की पीढी ने मेजर ध्यान चंद को हाकी खेलते नही देखा। इस सब की एक खास वजह ये भी है कि उस वक्त मीडिया इतना हाईफाई नहीं था। आज ये ही वजह है कि वो सचिन जितना लोकप्रिय नहीं हो सके पर ये भी सच है कि हॉकी में उन जैसा दूसरा खिलाड़ी आज तक दुनिया में पैदा नहीं हुआ, वह वाकई में हॉकी के जादूगर थे। हॉकी क्यो कि हमारे देष का राष्ट्रीय खेल है इस कारण भी खेल में ”भारत रत्न” पर पहला हक मेजर ध्यान चंद का ही बनता है।

मेजर ध्यान चंद और हॉकी देश में एक दूसरे के पर्याय है। मेजर ध्यान चंद को देश का पहला ऐसा खिलाड़ी भी कहा जाता है जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हॉकी को पहचान दिलाई। लगातार तीन ओलम्पिक खेलो में हॉकी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले हॉकी के इस जादूगर ने सन् 1936 के बर्लिन ओलम्पिक में भारतीय विजय की कप्तानी भी की थी। हॉकी के जादूगर का खिताब पाने के लिये मेजर ध्यान चंद ने हॉकी मे कडी मेहनत की और अकेले इस खिलाडी ने ओलम्पिक में 101 और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मैचों में लगभग 300 गोल किये, जो खुद बखुद मेजर ध्यान चंद को एक महान खिलाडी बनाता है। 29 अगस्त सन् 1905 को प्रयाग में उनका जन्म हुआ था। बचपन से ही खिलाडी प्रवृत्ति के ध्यान चंद जब सोलह वर्ष के हुए तभी सेना में भर्ती हो गयें। सेना में ही इन्होने हॉकी खेलना शुरू किया। बहुत ही कम समय में हॉकी के खेल को ध्यान चंद इतना समझ गये कि सन् 1928 में एम्सटर्डम जाने वाली भारतीय हॉकी ओलम्पिक टीम के लिये इनका चयन हो गया। इस ओलम्पिक में भारत ने स्वर्ण पदक जीतकर कर दुनिया को चौंका दिया। इस मैच में भारत की ओर से कुल 28 गोल हुए जिन में से 11 गोल अकेले ध्यान चंद के थे। ये वो मैच था जिसने ध्यान चंद को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हाकी में पहचान दिलाई। जब भारत को आजादी मिली तब इन्हें मेजर बना दिया गया। हॉकी में देश-विदेश में पर्याप्त सम्मान पाने के कारण ही भारत सरकार ने उन्हे 1956 में ”पद्वमभूषण” की उपाधि से भी सम्मानित किया। इस के साथ ही 1936 में बर्लिन में ”जैतून मुकुट” एवं सन् 1968 में मैक्सिको ओलम्पिक में ”विशेष अतिथि” के रूप में उन्होने सम्मान पाया। 3 दिसम्बर 1979 को इस दुनिया से रूख्सत हो जाने के बाद भी वह प्रेरणास्रोत के रूप में देष के प्रत्येक युवा व वरिष्ट हॉकी खिलाडी के दिल में आज भी बसे है।

सचिन तेंदुलकर को ”भारत रत्न” देने की मांग के बीच देश के ऐसे महान खिलाड़ी को हॉकी ओलिंपियनो और देश के हॉकी खिलाडियो की मांग और खेलो में देष के सर्वोच सम्मान भारत रत्न के लिये सचिन से पहले मेजर ध्यान चंद का नाम और दावेदारी बिल्कुल सही लगती है। क्यो कि क्रिकेट आज भी दुनिया के केवल दर्जन भर देष खेलते है जबकि हॉकी आज भी वैष्विक खेल होने के साथ साथ भारत का राष्ट्रीय खेल है। लिहाजा देश के लिये खेल के क्षेत्र में आज भी सचिन से ज्यादा मेजर ध्यान चंद का योगदान कई अधिक है। इस कारण मेजर ध्यान चंद खेलों में इस पुरस्कार के पहले हकदार बनते है। देश का सर्वोच सम्मान ”भारत” रत्न अभी तक 41 व्यक्तियो को दिया जा चुका है जिन में दो विदेशी नागरिक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति डॉ. नेल्सन मंडेला और मदर टेरेसा का नाम शामिल है। इन 41 व्यक्तियो में कोई भी खिलाडी नही है। वजह इस पुरस्कार देने के नियम इन नियमों के हिसाब से भारत रत्न सम्मान कला, साहित्य, और विज्ञान के विकास में असाधारण सेवा के लिये तथा सर्वोच्च स्तर की जनसेवा की मान्यता स्वरूप दिया जाता है। इस पुरस्कार नियमावली में बिना संषोधन किये बगैर न तो ये सम्मान सचिन को मिल सकता है न मेजर ध्यान चंद को। हालाकि सरकार ने भारत रत्न देने के लिये नियमो में बदलाव कर खेल के क्षेत्र में इसे देने की घोषणा अभी नहीं कि है पर ऐसे संकेत सरकार की ओर से मिलने लगे है कि इस संबंध में सरकार जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाने जा रही है।

अब सरकार को यह निर्णय लेना होगा कि क्या भारत रत्न को खेल से भी जोड़ा जाये। गृह मंत्रालय को इस तरह का एक प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखना होगा। कैबिनेट मंत्रीमण्डल की स्वीकृति के बाद नियमो में संशोधन कर गृह मंत्रालय सचिन, मेजर ध्यान चंद ही नहीं बल्कि किसी भी खिलाड़ी को खेल में असाधारण सेवा के लिये भारत रत्न देने का मार्ग प्रशस्‍त कर सकता है। आने वाले वक्त में हो सकता है कि ये बहस और राजनीति का मुद्दा बन जाये कि पहले खेल में असाधारण सेवा के लिये भारत रत्न सचिन को दिया जाये या मेजर ध्यान चंद को पर सही मायने में सचिन से पहले मेजर ध्यान चंद को ही ”भारत रत्न” मिलना चाहिये।

 

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4 Comments on "सचिन से पहले मेजर ध्‍यान चंद को मिले ‘भारत रत्‍न’"

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शैलेन्‍द्र कुमार
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आपने एकदम सही कहा है, मेजर ध्यानचंद, सचिन तेंदुलकर, विश्वनाथन आनंद, मैरीकाम इन सभी को भारत रत्न मिलना चाहिए, लेकिन आज की तारीख में इस बंद रास्ते को सचिन ही खोल सकते है, इसलिए पहले रास्ता खुलने दीजिये, फिर हम इन सभी को भारत रत्न दिलवाकर रहेंगे

ashish kumar verma
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लेखक से पूरी तरह से सहमत

ajay atri
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एस समय सचिन के खिलफ बूल कर आप बहुत ही बेवाफ्कुकी का कम कर रहे ही.

ajay atri
Guest

प्लेअसे डोंट रिसे सुच इस्सुएस नो.कल आप कएंघे हे भारत का पहला प्रधान मंत्री सरदार पटेल को क्यों नहीं banaya..

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