लेखक परिचय

सविता मिश्रा

सविता मिश्रा

लेखिका कवयित्री हैं.

Posted On by &filed under गजल.


उफ़ अपने दिल की बात बतायें कैसे
दिल पर हुए आघात जतायें कैसे|

दिल का घाव नासूर बना
अब मरहम लगायें कैसे
कोई अपना बना बेगाना
दिल को अब यह समझायें कैसे|

कुछ गलतफहमी ऐसी बढ़ी
बढ़ते-बढ़ते बढती गयी
रिश्तें पर रज जमने सी लगी
दिल पर पड़ी रज को हटायें कैसे|

उनसे बात हुई तो सही पर
बात में खटास दिखती रही
लगा हमें ही गलत ठहरातें रहे
बातों ही बातों में खुन्नस दिखाते रहे
उनकी बातें लगी बुरी हमें पर
दिल पर अब पत्थर रख पायें कैसे|

पत्थर रख भी बात बढ़ायें हम
अपनापन भी खूब जातयें हम
दिल में टीस सी उठती रही
मन में लकीर पड़ती गयी
अब उस लकीर को हटायें कैसे
दर्दे दिल समझाता रहा खुद को
पर इस दर्द को मिटायें कैसे|

अपनों ने ही ना समझा हमें
गैरों की क्या शिकवा करें
सरेआम घमंडी साबित किया हमें
हर अवगुण को ही उसने देखा हममें
दुःख हुआ बहुत ही दिल को
फिर बताओं हम दिल को बहलाए कैसे|
 

आज वक्त है शहनाई का,
शहनाई बजा लिजिये |
आज वक्त है विदाई का,
आँसू बहा लिजिये |
आज वक्त है लड़ाई का,
कफ़न बांध लिजिये |
आज वक्त है अंतिम सफर का,
थोड़ा कंधा दीजिए|
आज वक्त है जीने का,
आशीर्वाद दीजिए |
आज वक्त है खुशी का ,
आप भी शामिल हो लिजिये |
आज वक्त है दुःख का,
थोड़ा बाँट लिजिये |
आज वक्त है तुम्हारा,
तो हमें ना भूलिए|
आज वक्त है बदल रहा,
भरोसा ना कीजिये |
आज वक्त की धुप-छाव में,
हमें ना तौलिए |
वक्त ही है बलवान,
स्वयं पर गुमान ना कीजिये |
आज है तुम्हारा तो ,
कल होगा हमारा |
यही है वक्त की तकरार ,
मान लिजिये ||

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz