लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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सुरेश हिन्दुस्थानी
नास्त्रेदमस सहित अनेक भविष्य वक्ताओं ने यह बात तो बहुत पहले ही उजागर कर दी थी कि भारत फिर से दुनिया का शक्तिशाली राष्ट्र बनकर सामने आएगा। और यह भविष्यवाणियां सभी तरफ से नरेन्द्र मोदी की ओर ही संकेत करती हुई दिखाई देती हैं। फिर भी सबके अपने अपने आंकलन हैं, यह बात कहां तक सत्य के धरातल पर परिणित होती हैं यह आने वाले समय उजागर कर ही देगा, लेकिन जिस प्रकार से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने काम को अंजाम दे रहे हैं उससे तो यही जान पड़ता है कि अब भारत वास्तव में उस दिशा की ओर जाने का प्रयत्न करने का प्रयास कर रहा है जो कदम सीधे विश्व गुरू बनने की ओर जे जाने का सामथ्र्य पैदा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि जो देश भारत को कुछ भी नहीं समझते थे आज वही देश भारत के गुणगान करने की मुद्रा में आते जा रहे हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यों की तारीफ की जाएगी कि वह हमेशा देश को सामने रखकर ही अपने कार्यों का संपादन करने का साहस करते हुए दिखाई देते हैं। मोदी के कार्यकाल में उपलब्धियों के कालखण्ड में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि ने अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज कराई है, वह है भारत का मंगल मिशन। देश के वैज्ञानिकों ने अपनी समस्त प्रतिभा को उजागर करके सारी दुनिया को यह बताने का सामथ्र्य प्रस्तुत किया है कि हम किसी से कम नहीं हैं। जिस राह पर आज अमेरिका और रूस चल रहे हैं आज उसी राह पर चलने की ताकत भारत को मिल गई है। ध्येय साधकों की भांति अपने कार्य में रत रहे वैज्ञानिकों ने प्रथम प्रयास में ही वह सफलता प्राप्त कर ली जो विश्व के अनेक देश अभी तक प्राप्त करने में नाकाम रहे हैं। अपने आपको विकसित राष्ट्र की श्रंखला में मानने वाले चीन और जापान को अभी तक इस प्रकार की महानतम उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी है। इसके मायने साफ हैं कि चीन और जापान से आज हमारा भारत कोसों मील आगे जा चुका है। इस अभियान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि भारत से पहले जिन तीन देशों ने यह सफलता प्राप्त की है, वह भारत के अभियान से कई गुना खर्चीला था यानि भारत ने केवल हालीवुड की एक फिल्म के बजट में लगने वाली राशि खर्च करने के बराबर खर्च में यह सफलता प्राप्त की है। इतना ही नहीं इसका आकार इतना छोटा था कि विश्व के सभी देश आश्चर्यचकित थे कि तरल ईंधन के द्वारा संचालित भारत का यह यान सफलता प्राप्त कर पाएगा या नहीं, लेकिन विश्व के वैज्ञानिकों के सामने उस समय सारे संदेह चकनाचूर हो गए जब स्वदेशी मंगलयान को हमारे वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित कर दिया। इस उल्लेखनीय सफलता से सारा देश खुशी और गर्व से झूम उठा। इस ऐतिहासिक क्षण को इसरो के वैज्ञानिकों के साथ साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने हृदय के स्वाभाविक उद्गाार व्यक्त करते हुए कहा कि जब काम मंगल होता है, इरादे मंगल होते हैं, तो यात्रा भी मंगल होती है। प्रधानमंत्री का कथन सौ प्रतिशत सत्य है। इसलिए कहा जा सकता है कि भारत को जगतगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। भारत ओलंपिक में 100 स्वर्ण पदक पा ले, एसियाड के सारे स्वर्ण पदक पर कब्जा कर ले, तो भी उतनी खुशी नहीं होगी, जितनी खुशी 24 सितम्बर का यह स्वर्णिम दिवस दे गया। दुनिया आश्चर्यचकित है। हमने असंभव को संभव कर दिखाया है। इस अभियान से सचमुच हमारा सीना 56 इंच का हो गया है। हमारी सरकार और वैज्ञानिकों को जितनी बधाई दी जाए कम ही होगी।
सुरेश हिन्दुस्थानी
 

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1 Comment on "मंगलयान : विश्वगुरू की ओर भारत के कदम"

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Mahendra Gupta
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एक बार फिर सिद्ध हो गया है कि भारत ज्ञान,विज्ञानं व धर्म के क्षेत्र में पहले भी विश्व गुरु था ,और आज भी है, इस बात को सभी देशों ने आज स्वीकार किया है

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