लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

Posted On by &filed under व्यंग्य.



राम कृष्ण खुराना

मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो !

विपक्षी दल सब बैर पडे हैं, बरबस मुख लिपटायो !

चिट्ठी-विट्ठी इन बैरिन ने लिखी, मोहे विदेस पठायो !

मैं बालक बुद्धि को छोटो, मोहें सुबोध कांत फसायो !

हम तो कुछ बोलत ही नाहीं, सदा मौन रह जायो !

इसीलिए मनमोहन सिंह से मौन सिंह कहलायो !

लूट विपक्षी बैंक भर दीने, कालिख हमरे माथे लगायो !

हम तो कठपुतली हैं तुम्हरी, अंडर एचीवर कहलायो !

मैडम भोली बातें सुन मुस्काई, मनमोहन खींच गले लगायो !

मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो !

 

Leave a Reply

12 Comments on "मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
binu bhatnagar
Guest

मोरी….के इसरूप की कल्पना सूरदास जी ने भी नहीं की होगी! क्या बात है!

राम कृष्ण खुराना
Guest

प्रिय बिनू जी,
आपने ठीक कहा है कि उस समय तो सूरदास जी भी ऐसी कल्पना नहीं कर सकते थे !
मेरी रचना के लिए आपका स्नेह मिला ! धन्यवाद !
राम कृष्ण खुराना

बी एन गोयल
Guest

ati sundar

राम कृष्ण खुराना
Guest

प्रिय गोयल साहेब,
आपके स्नेह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! आप के प्रोत्साहन से मुझे लिखने के लिए उर्जा मिलती है !
पुनः धन्यवाद !
राम कृष्ण खुराना

राम कृष्ण खुराना
Guest

प्रिय महेन्द्र जी,

कोयला घोटाला पर मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” के लिए आपकी दो पंक्तियां बहुत सुन्देर लगी ! इस प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ !

राम कृष्ण खुराना

राम कृष्ण खुराना
Guest

प्रिय ज्ञान जी,

मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” आपको अच्छी लगी ! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !

राम कृष्ण खुराना

राम कृष्ण खुराना
Guest

प्रिय शिवेंद्र मोहन जी,

मेरी रचना “मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो” के लिए आपका स्नेह मिला ! प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ

राम कृष्ण खुराना

wpDiscuz