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unoडा. राधेश्याम द्विवेदी
29 मई संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कर्मचारी दिवस है । इसी दिन संयुक्त राष्ट्र ने विभिन्न गतिविधियां चलाकर विश्व भर में शांति स्थापना कार्य शुरू करने की साठवीं वर्षगांठ मनाई । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस तिथि का चयन बहुत सोच-समझ कर किया था। इसका कारण यह है कि सन् 1948 में इसी दिन संयुक्त राष्ट्र संघ के पहले शांति मिशन ने फ़िलिस्तीन में अपना काम शुरू किया था। आजकल शांति सैनिक और फौजी अफसर संघर्षरत पक्षों के बीच विभाजन रेखा पर साधारण हथियारों से लैस होकर खड़े नहीं रहते हैं। आजकल संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान बहुत जटिल और बहुमुखी हो गए हैं।संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्री बान की मून ने इसी दिन भाषण देते हुए शांति स्थापना गतिविधियों में भाग लेने वाले 150 से ज्यादा देशों के प्रति आभार व्यक्त किया और शांति स्थापना कार्य के लिए अपनी जान अर्पित करने वाले 2400 से ज्यादा कर्मचारियों को याद करते हुए उन्हें वीर कहा। संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मामलों के जिम्मेदार उपमहासचिव श्री गुएहेनो ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शहीद होने वाले शांति स्थापना कर्मचारियों के प्रति फूलमालाएं अर्पित की । इस के अलावा, स्मृति गतिविधियों में संगीत सभा और बहुमीडिया प्रदर्शनी शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्य वर्ष 1948 से शुरू हुआ । इसी वर्ष की 29 मई को सुरक्षा परिषद ने 36 सशस्त्र फौजी पर्यवेक्षकों को यरूशलम में भेजने का निर्णय लिया, ताकि अरब देशों और इज़राइल के बीच हुए प्रथम मध्य पूर्व युद्ध की फायरबंदी कार्रवाई की निगरानी की जा सके और स्थानीय स्थिरता को बनाए रखा जा सके । इस के बाद विश्व में मुठभेड़ वाले विभिन्न क्षेत्रों ,बफ़र स्थलों व अलगाव स्थलों में नीला कवच पहने हुए संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कर्मचारी अक्सर दिखाई पड़ते हैं । उन्होंने शत्रुतापूर्ण दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम की निगरानी और राजनीतिक वार्ता के लिए अनुकूल स्थिति तैयार करने की कोशिश की है। पिछले साठ वर्षों में संयुक्त राष्ट्र संघ ने दुनिया भर में 63 शांति स्थापना गतिविधियां चलायीं, जिन से संबंधित देशों व क्षेत्रों को शांतिपूर्ण वातावरण की स्थापना करने व इसे बनाए रखने में मदद दी गई । वर्तमान में एक लाख 30 हज़ार सैनिक या गैर सैनिक कर्मचारी विश्व के 20 शांति स्थापना कार्यों में मिशन निभा रहे हैं
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्य के विषयों में भी परिवर्तन हुआ है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन के अनेक पहलु हैं जिन में युद्द विराम की निगरानी के अलावा, संबंधित देशों व क्षेत्रों का युद्धोत्तर पुनर्निर्माण, चुनाव आयोजन, मानवाधिकार संरक्षण, जमीनी सुरंगों की खिलाफत तथा शरणार्थियों का पुनर्निवास आदि शामिल है । इस के साथ ही शांति स्थापना कर्मचारियों को उन की पहले की शुद्ध सैन्य स्थिति से से नागरिक पुलिसकर्मी, प्रबंधक कर्मचारी, अर्थशास्त्री, कानूनी विशेषज्ञ, सुरंग को नाकाम करने वाले विशेषज्ञ और चुनाव पर्यवेक्षक आदि में बदला जाता है । इस के अलावा, इस टीम में मानवाधिकार निगरानी, नागरिक मामला व देश के प्रबंधन आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ, मानवाधिकार कर्मचारी और न्यूज़ जगत के विशेषज्ञ भी शामिल हैं । अब संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भागीदारी वाली सामूहिक शक्ति बन गई है, जो विश्व की शांति को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है । वर्ष 1988 में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्रवाई को नोबेल शांतिपूर्ण पुरस्कार मिला ।
वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र महा सभा ने हर वर्ष की 29 मई को संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कर्मचारी दिवस मनाने का निर्णय लिया । इस का वा मानव के शांतिपूर्ण कार्य के लिए अपनी जान अर्पित करने वाले व्यक्तियों को याद करना है ।संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्रवाई को व्यापक सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त हुआ है। वर्तमान में हर वर्ष शांति स्थापना कार्रवाई का बजट छह अरब 50 करोड़ अमरीकी डॉलर को पार कर जाता है, उस का खर्च मुख्य तौर पर युरोपीय देश, जापान और अमरीका देते हैं, और कर्मचारी मुख्य तौर पर व्यापक विकासशील देशों से आते हैं । हालांकि संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्रवाई विभिन्न सदस्य देशों की भागीदारी व समर्थन पर निर्भर है, जिस से सिलसिलेवार प्रबंधन के सवाल भी पैदा हुए हैं, लेकिन फिर भी आज वह विश्व शांति को बनाए रखने वाली अपरिहार्य अंतरराष्ट्रीय शक्ति बन गई है । संयुक्त राष्ट्र संघ ने न्यूयार्क मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में मृतक सैनिकों की याद और उन्हें सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने मृतक शांति मिशन कर्मियों को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने एक मिनट का मौन रखकर शोक जताया। बान की मून ने कहा कि वर्ष 2012 में कुल 111 शांति मिशन कर्मी मारे गये, जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति मिशन के 65 सालों के इतिहास में कुल 3100 से ज्यादा शांति मिशन कर्मियों की मौत हुई है।संयुक्त राष्ट्र डेग  हाम्मार्शल्ड पुस्तकालय में बान की मून और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए उप महासचिव हर्व लाड्सोस ने वर्ष 2012 के शांति मिशन में मृतक 103 व्यक्तियों को डेग हाम्मार्शल्ड पद से सम्मानित किया।बान की मून ने लिखित बयान देते हुए कहा कि नये खतरों व नयी चुनौतियों के मुकाबले के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ शांति मिशन से संबंधित नीतियों में बदलाव कर रहा है। ताकि युद्ध प्रभावित देशों को स्थाई शांति मिल सके। हर्व लाड्सोस ने उसी दिन आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से शांति मिशन के लिए हर संभव समर्थन देने की अपील की।
1950 के दशक में इसकी शुरूआत के समय से लेकर अब तक संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना से संबंधित 64 अभियानों में से 43 अभियानों में 1,60,000 से अधिक सैनिकों का योगदान किया है। संयुक्त राष्ट्र के नीले झंडे के लिए लड़ते हुए भारतीय सशस्त्र एवं पुलिस बल के 160 से अधिक कार्मिकों ने अपने जीवन की आहुति दी है। भारतीय सशस्त्र बलों की पहली तैनाती 1950 के दशक के पूर्वार्ध में कोरिया युद्ध के दौरान हुई थी। शांति स्थापना संबंधी अन्य अभियानों में निम्नलिखित शामिल हैं, जिनमें भारतीय कार्मिकों ने भाग लिया है – भारत – चीन (वियतनाम, लाओस, कंबोडिया), कांगो, मोजांबिक, सोमालिया, रूवांडा, अंगोला, सियरा लियोन और इथोपिया। इस समय, संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना संबंधी विद्यमान 14 मिशनों में 7 मिशनों में भारतीय सशस्त्र बल भाग ले रहा है। भारतीय फौजें लेबनान (यू एन आई एफ आई एल), कांगो (एम ओ एन यू सी), सूडान (यू एन एम आई एस एस), गोलन हाइट्स (यू एन डी ओ एफ), आइवरी कोस्ट (एम आई एन यू एस टी ए एच) और लाइबेरिया (यू एन एम आई एल) में हैं। संयुक्त राष्ट्र के किसी भी शांति स्थापना मिशन में केवल महिलाओं की पहली टुकड़ी अर्थात भारत से फार्म्ड पुलिस यूनिट 2007 में लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन के अंग के रूप में तैनात की गई। संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा अभियानों में सेवा करते हुए अपना प्राण न्यौछावर करने वाले चार भारतीय शांतिसैनिकों के साथ 124 अन्य सैन्य, पुलिस और असैन्य कर्मियों को सेवा के दौरान अपनी कुर्बानी देने के लिए मरणोपरांत संरा पदक से सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र शांतिसैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर भारतीय शांतिसैनिक हेड कांस्टेबल शुभकरन यादव, राइफलमैन मनीष मलिक, हवलदार अमल डेका और नायक राकेश कुमार को डेम हमर्सकोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।कांगो में संयुक्त राष्ट्र स्थिरता मिशन (एमआएनयूएससीआ) में सेवा देते हुए यादव ने अप्रैल 2015 में बलिदान दिया मलिक का भी उसी मिशन में अगस्त में निधन हुआ। यूनाइटेड नेशंस डिसइंगेजमेंट ऑब्जरवर फोर्स (यूएनडीआएफ) में सेवा के दौरान 2015 में डेका की मौत हो गई और दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में तैनाती के दौरान जनवरी 2015 में कुमार की मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सभी शांतिसैनिककों को श्रद्धांजलि देते हुए हर साल 29 मई को मनाए जाने वाले संयुक्त राष्ट्र शांतिसैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस स्मरणोत्सव की शुरुआत की।

Time: May 23, 2016 at 4:15 am

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