लेखक परिचय

अभिषेक कांत पांडेय

अभिषेक कांत पांडेय

पत्रकार एवं टिप्पणीकार शिक्षा— पत्रकारिता से परास्नातक एवं शिक्षा में स्नातक की डिग्री

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अभिषेक कांत पांडेय

काले धन के मायने क्या है? काला धन कर चोरी या आवैध तरीके से कमाया गया पैसा है जो उस देश के लोगों के साथ छल करके विदेशी बैंकों में जमा किया गया है, वहीं ऐसे पैसे भारत मे भी है, जिस पर आयकर विभाग छापा की कार्यवाई कर जब्त करता है। सही तरीके से अगर कर जमा किया जाता तो प्राप्त कर के धन से स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल आदि बनावाया जा सकता था, लेकिन अफसोस स्विस बैंक में जमा काला धन स्विस बैंक की अर्थव्यवस्था मे निवेशित है। यह पैसा भारत के लोगों की कमाई का पैसा है। काले धन को भारत में वापस लाना ऐसे पैसे को जमा करने वालो के उपर कानूनी कार्यवाई होनी चाहिए।

लोकसभा चुनाव में एक सवाल था कि भारत का विकास इसके लिए भारत से गए कालाधन को भारत में लाना, चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इसे मुद्दा बनाया और बाबा रामदेव ने मोदी का सम​र्थन इसी बात पर किया की स्विस बैंक में ऐसे भारतीयों के अवैध रूप से जमा किए गए अरबों रूपये को भारत लाया जाएगा। उस समय जनता के सामने वादे नरेंद्र मोदी ने किए, लेकिन इन वादों को असली जामा पहनाने की बात आई तो अरूण जेटली ने नाम उजागिर करने के स्विस बैंक से करार की बात कही। अब यह बात समझ में जनता को आ रही है कि इस मामले में भाजपा और कांग्रेस का रूख एक जैसी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को कोर्ट में नाम बताने को कहा। देखा जाए तो काली कमाई स्विस बैंक मे ही नहीं दुनिया के कई बैंकों में भारतीयों के अवैध धन जमा है। इस मामले में राजनीति होती दिख रही है, जाहिर है भारतीय राजनीतिक पर्टियां की चन्दे की खुराक ऐसे भारतीयों के जेबों से मिलते होंगे जिनका काला धन स्विस बैंक जैसे बैंकों में जमा है तब ये पार्टियां काले धन के मामले में नाम उजागर करने में डरती हैं। देखा जाए तो इस मामले में न्यायपालिका के हस्तक्षेप होने कारण अब सरकार को जवाबदेही बनना पड़ेगा।

गौर करने वाली बात है कि भारत में अभी भी राजनीतिक पार्टियों का चरित्र में बदलाव आना जरूरी है। अकूत चंदा देने वालों के नाम उजागर होना चाहिए। इस मामले जब भी सवाल उठता है तब कांग्रेस और भाजपा में नूराकुश्ती ही होती है। पाक साफ राजनीति की कल्पना परे ही लगती है। चुनाव जीतने के लिए पैसे खर्च करने के लिए काले धन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में चुनाव से पहले अरबों रूपये एनजीओं और मदद के नाम भारत का कालाधन ही भारत की राजनीति को प्रभावित करने के लिए आता है। भारत विकास की ओर बढ़ रहा है तब यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत हर साल अरबों रूपये कर चोरी के विदेशों में जमा होता है, वहां से यह पूर्वी एशिया के देशों में अलग—अलग कंपनियों के नाम से फिर भारत में निवेश के नाम पर यहां आता है, याद ये पैसे काले अब सफेद बन जाते हैं और निवेश से होने वाला लाभ फिर सफेद पैसे बनकर वहा दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। वहीं यह पैसा आंतकवाद को फलने फूलने के लिए और दक्षिण एशिया में आंतकवाद फैलाने के काम में आता है।

हमारे देश के लोगों की मेहनत का पैसा, स्वीस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ा रहा है, वहीं भातर की 70 प्रतिशत आबादी दो वक्त की रोटी और सम्मान के साथ जीने की आस में हर दिन जद्दोजहद कर रहा है। सूचना क्रांति में भारत अपने बल पर आज अमरीका जैसीे देश को चुनौती दे रहा है। चीन और पाकिस्तान जैसे चतुर पड़ौसी देश भारत से घबराये हुए हैं, ऐसे मे सीमा तनाव की स्थिति बनाए हुए। वहीं ऐसे देश खासतौर पर पाकिस्तान यहां कि अर्थव्यवस्था को नकली नोटों के साथ ध्वस्त करने के लिए अरबों नकली भारतीय रूपये को भारत में खपाने की फिराग में है। वहीं आतंकियों की पनाह स्थली पकिस्तान भारत का दुश्मन नंबर वन दाउद इब्राहिम को संरक्षण देकर अवैध धंधों को बढ़वा दे रहा है, साथ ही उसके हिफाजत के लिए आइएसआई दाउद से धन ले रहा है, जिसका उपयोग भारत में अतंकावादी घटना को अंजाम दे सके।

वहीं चीन अपने सस्ते उत्पाद के द्वारा भारतीय ​अर्थव्यवस्था को तोड़ने की कोशिश करता है। अवैध रूप से चाइना सामानों को भारतीय बाजार में खपाने के लिए अपने उत्पाद बेच रहा है।

भारत में सत्ता परिवर्तन के बाद से पाकिस्तान और चीन की अपनी ​एशिया मे स्थिति को लेकर चिंतित है। ऐसे में इन देशों के मनसूबों को देखा जाए तो यह भारत में संकट पैदा की अपनी चाल में कशमीर और पूर्वीत्तर राज्यों में आतंक फैलाने के गुप्त ऐजेंडे पर काम कर रही है। ऐसे में भारत के विकास करने के राह में ये रोड़ा बनाना चाहते हैं लेकिन ऐसी सोच को नाकाम करने की शक्ति भारत  में है।

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