लेखक परिचय

धीरेन्‍द्र प्रताप सिंह

धीरेन्‍द्र प्रताप सिंह

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के बक्शा थाना क्षेत्रान्तर्गत भुतहां गांव का निवासी। जौनपुर के तिलकधारी महाविद्यालय से वर्ष 2005 में राजनीति शास्त्र से स्नात्कोत्तर तत्पश्चात जौनपुर में ही स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में भी स्नात्कोत्तर की उपाधियां प्राप्‍त की। पत्रकारिता से स्नात्कोत्तर करने के दौरान वाराणसी के लोकप्रिय दैनिक समाचार पत्र आज से जुड़े रहे। उसके बाद छह महीने तक लखनऊ में रहकर दैनिक स्वतंत्र भारत के लिए काम किया। उसके बाद देश की पहली हिन्दी समाचार एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार से जुड़े। उसमें लगभग दो वर्षों तक मैं चीफ रिपोर्टर रहे। उसके बाद तकरीबन ग्यारह महीने दिल्ली-एनसीआर के चैनल टोटल टीवी में रन डाउन प्रोडयूसर रहे। संप्रति हिन्दुस्थान समाचार में उत्तराखंड ब्यूरो प्रमुख के तौर पर कार्य। पत्रपत्रिकाओं और वेब मीडिया पर समसामयिक लेखन भी करते रहते हैं।

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देहरादून, निशंक सरकार में ओएसडी लॉ का दायित्व निभा रहे चंद्र शेखर उपाध्याय ने सरकार को एक बडी राहत दिलाने में सफलता प्राप्त की है। चर्चित स्टर्डिया प्रकरण में विपक्ष सहित कोर्ट में घिरी सरकार को सोमवार को बडी राहत मिली। सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बारिन घोश एवं न्यायमूर्ति निर्मल यादव की संयुक्त खंडपीठ में हुई सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता केशरीनाथ त्रिपाठी और चंद्र भोखर उपाध्याय की टीम ने निशंक सरकार का इस मामले में मजबूती से पक्ष रखा जिसके बाद माननीय न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में मुख्यमंत्री को सभी पहलुओं से अवगत नहीं कराया गया।
 
इस मामले में बीआईएफआर का पक्ष मंगलवार को सुना जाना था लेकिन उच्च न्यायालय के जस्टिस धर्मवीर शर्मा के आकस्मिक निधन के चलते अब इस मामले पर अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। 29 नवंबर को ही सरकार को माननीय उच्च न्यायालय में पावर प्रोजेक्ट मामले में भी अपना पक्ष रखना है।
 
बताते चले कि इस मामले में उत्तराखंड जन संघर्श मोर्चा और इंडिपेंडेंट मीडिया इनिएटिव सोसाईटी ने जनहित याचिका दायर कर सरकार पर गलत तरीके से लैंड यूज चेंज कर राजकोश को चूना लगाने का आरोप लगाया है। मामले में कोर्ट की टिप्पणी सरकार के लिए जीवनदान मानी जा रही है। जबकि कोर्ट के इस रूख से इस मोर्चे पर सरकार को घेर रहे विपक्षी दलों को करारा झटका लगा है। उल्लेखनीय है कि चंद्र शोखर उपाध्याय देश के ऐसे कुछ चुनिन्दा लोगों में से है जो एलएलएम की परीक्षा हिन्दी में कराने और उस पर डिग्री दिए जाने की मांग को लेकर सफल देश व्यापी आन्दोलन चला चुके है और खुद हिन्दी में एलएलएम की डिग्री हासिल की है।
 
श्री उपाध्याय नारायण दत्त तिवारी की सरकार में राज्य के अपर महाधिवक्ता बनकर आए थे। इससे पहले वे इलाहाबाद और लखनउ में न्यायिक पदों पर कुशलतापूर्वक कार्य कर चुके है। उत्तराखंड राज्य में उन्हें विधि और ससंदीय मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। श्री उपाध्याय इससे पहले भी कई सरकारों के संकटमोचक बन चुके है। सोमवार को हुई इस सुनवाई की तैयारियों को लेकर गंभीर श्री उपाध्याय भानिवार को ही अपनी टीम के साथ नैनीताल पहुंच गए थे और दो दिन लगातार गहन बैठकों में अपनी रणनीति को अंजाम दिया जिसका परिणाम है कि सरकार के गले की फांस बने स्टर्डिया प्रकरण में सरकार को बडी राहत मिल गई है।
 
इस मामले में मंगलवार को बीआईएफआर का पक्ष सुना जाने वाले था लेकिन उच्च न्यायालय के जस्टिस धर्मवीर शर्मा के आकस्मिक निधन के चलते कोर्ट में कंडोलेंस हो जाने से सुनवाई स्थगित कर दी गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई आगामी 29 नवंबर को होगी। इस बीच उपाध्याय की टीम की सफलता को देखते हुए सरकार ने राहत की सांस ली है और अगली सुनवाई में तैयारियों को लेकर समय मिल जाने से प्रसन्नता महसूस की है वहीं सरकार को घेरने के चक्कर में पडे विपक्षियों में मामले का रूख मुडने से मायूसी छा गई है।
 
29 नवंबर को इस मामले समेत कोर्ट में सरकार को पावर प्रोजेक्ट मामले में भी अपना पक्ष रखना है। इन दोनों महत्वपूर्ण मामलों को लेकर सरकार गंभीर है और शायद इसी के मद्देनजर उसने इन मामलों की पूरी जिम्मेदारी विधि विशेषज्ञ चंद्र शेखर उपाध्याय को दे रखी है। उधर उर्जा के बडे घोटाले में फंसे योगेन्द्र प्रसाद मामले में भी सरकार को राहत मिलने की सूचना है। इस मामले के संज्ञान में आने पर सरकार ने योगन्द्र प्रसाद को उनके पद से हटा दिया था जिसे प्रसाद ने कोर्ट में चुनौती दी है। चूंकी ये मामला जस्टिस धर्मवीर शर्मा की कोर्ट में विचाराधीन था और उनके अचानक निधन से सरकार को इस मामले में तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल गया है।

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3 Comments on "उत्तराखंडः निशंक सरकार के संकट मोचक बने चंदशेखर उपाध्याय, स्टर्डिया प्रकरण में बचाई लाज"

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Anil Sehgal
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धीरेन्‍द्र प्रताप सिंह जी,

खबर समझ नहीं आयी. Background नहीं है न, इस लिए.
मामला क्या है ? कुछ idea नहीं. फिर भी —–
लगता है कि कानूनी लोगो ने निशंक सरकार को किसी बढे संकट से बचाया है.

वकीलो ने अच्छा काम किया – यह कम ही होता है.
शाबास.

– अनिल सहगल –

ashish singh cneb news delhi
Guest

सबसे पहले चन्द्र शेखर जी को इस नेक काम के लिए बधाई .दूसरा धीरेन्द्र जी को भी ऐसे कार्य को लोगो के सामने लेन के लिए धन्यवाद . वे डेल्ही में थे तब भी ऐसे लोगो की वकालत करते थे और उनके कामो को लोगो के सामने लेट थे अब उत्तराखंड में भी जा कर अपने काम को अंजाम दे रहे है/ हमारी तरफ से ढेर सारी बधाई /

ashutosh singh pithoragarh
Guest

chandra shekher ji desh ke jane mane hindi sevi h.iske pahle bhi unhone jin sarkaro ke sath kam kiya usako har sankat se bachaya.is baar bhi unhone nishank sarkar ko bacha kar rastravaadi vicharo ki sarkar ki suraksha ki h. meri subh kamnaye.

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