लेखक परिचय

पंडित सुरेश नीरव

पंडित सुरेश नीरव

हिंदी काव्यमंचों के लोकप्रिय कवि। सोलह पुस्तकें प्रकाशित। सात टीवी धारावाहिकों का पटकथा लेखन। तीस वर्षों से कादम्बिनी के संपादन मंडल से संबद्ध। संप्रति स्‍वतंत्र लेखन।

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पंडित सुरेश नीरव

घोर कलयुग आ गया। घोर कलयुग। पंडितजी ने गांठ लगी चुटिया पर हाथ फेरते

हुए जनहित में एक गोपनीय तथ्य का सार्वजनिक राष्ट्रीय प्रसारण किया।

रेडियो,टीवी,अखबार मीडिया के इतने बड़े कुनबे के होते हुए भी आम जनता तक

ये ब्रकिंग न्यूज अभी तक नहीं पहुंची है,पता नहीं पंडितजी को ये क्रूर

मुगालता क्यों और कैसे हो गया। हमने खोजी पत्रकार की मुद्रा में पंडितजी

को कुरेदते हुए पूछ ही लिया कि कलयुग से किस गली में आपकी मुलाकात हो गई।

अंतरिक्ष एअरलाइंसों में तो किंगफिशर एअऱलाइंस की तरह ही आजकल हड़ताल चल

रही है। क्योंकि दोनों के धार्मिक चाल-चलन बड़े ही सतयुगकालीन हैं। ऐसे

में फिर कलयुग मंगलग्रह या चंद्रलोक से तो आने से रहा। फिर ये आया किस

फ्लाइट से है। कहीं ऐसा तो नहीं कि अमेरिका के सील कमांडो इसे अपने

इंडिया में चुपके से टपका गए हों। भारत सरकार को इस घुसपैठ की खबर तो

होने से रही। अरुणाचल में जब चीन घुस आता है और उसकी खबर उसे नहीं हो

पाती तो फिर ये तो ब्रह्मांडीय मामला है। मैंने कहा पंडितजी आपने तो ये

बड़ी खौफनाक खबर सुनाई है। कलयुग की मौजूदगी देश की सुरक्षा के लिए भी

बड़ा खतरा है। रक्षामंत्री और जनरल के बीच जैसे ही चौं-चौं,पौं-पौ शुरू

हुई मुझे लगने तो लगा था कि कहीं-न-कहीं कोई गड़बड़ जरूर है। मगर अब तो

यकीन हो गया है कि इस गड़बड़ के पीछे जरूर कलयुग का ही हाथ है। आखिर ये

पंडित की खबर है। किसी नेता की नहीं जो सालों समाजवाद आ रहा है,..

समाजवाद आ रहा है का हांका लगाते रहे और मुआ समाजवाद आज तक नहीं आ पाया।

कलयुग फट्ट से आ भी गया। और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। हमारे

खुफिया तंत्र की ये कितनी उल्लेखनीय नाकामी है। सरकार अभी तक इस मुगालते

में है कि ए.राजा,येदुरप्पा,सुरेश कलमाड़ी और बाबूलाल कुशवाह-जैसे

तपस्वियों के सौजन्य से देश में अभी तक सतयुग ही चल रहा है। उसे कित्ता

बड़ा धक्का लगेगा जब उसे ये मालुम पड़ेगा कि देश में तो कलयुग ऑलरेडी

घुसपैठ कर चुका है। और न जाने कहां-कहां तक वह अपना नेटवर्क फैला चुका

है। सबकुछ नष्ट-भ्रष्ट हो जाएगा। नगरनिगम के अतिक्रमण दस्ते की तरह

अफसरशाह कलयुग उसूलों की अवैद्य बस्ती में मौकापरस्ती के बुलडोजर चलाकर

बस्ती को मूल्यहीनता का साफ मैदान बना देगा। इस मैजान में दिशा-मैदान को

आए लोग फटाक से झूठे और बेईमान हो जाएंगे। मुन्ना-मुन्नी बचपन में ही

जवानी के गुल खिलाएंगे। और-तो-और इस पतित-पावन ऋषि भूमि में जहां का

बर्थ-सर्टीफिकेट लेने को देवी-देवता तक तरसते हैं उस देश के धर्मनिरपेक्ष

नेता भी कलयुग के प्रभाव में आकर धर्मभ्रष्ट बहुरुपिये हो जाएंगे। आदमी

आत्महत्याएं करेंगे कुत्ते बिस्कुट खाएंगे। पुजारी मंदिरों की मूर्तियां

चुराएंगे। देश के नौनिहाल सिर्फ गर्लफ्रैंड बनाने के लिए स्कूल जाएंगे।

और भावुक गुप्तरंग क्षणों की वीडियो क्लिपिंग बनाकर अपनी प्रतिभाएं

चमकाएंगे। खोई हुई जवानी दोबारा हासिल करने के लिए ठरकी बूढ़े कमांडो

केप्स्यूल खाएंगे। डॉक्टर मुर्दों को समारोहपूर्वक वेंटीलेटर पर सजाएंगे।

नेता घर बेचकर सड़क नहीं सड़क बेचकर अपना घर बनाएंगे। फिर देखना बेईमानी

के नुस्खे खूब महीन हो जाएंगे। ईमानदार लोग संस्कृत पाठशालाओं की तरह

महत्वहीन हो जाएंगे। मंहगाई कलेजा चाक करेगी। रिश्वत सीना तानकर केटवॉक

करेगी। कन्याएं श्रूड हो जाएंगी। गऊए फास्टफूड हो जाएंगी। रुकावट के लिए

खेद है कि मुद्रा में पंडितजी ने अतानक मुझे टोका- हे आर्यपुत्र आप इंसान

है या चौबीसिया घंटेवाला कोई खबरिया चेनल। ब्रेकिंग न्यूज की तरह तिल को

ताड़ और कंकड़ को हिमालय बनाए ही चले जा रहे हो। अब कम-स-कम कमर्शियल

ब्रेक के लिए ही रुक जाइए। तो फिर यूपी में काग्रेसवाली मुद्रा में हम भी

आपने घर चलें। किस्मत तो चमका नहीं पाये घर जाकर बर्तन ही मांजकर चमका

लें। क्यों बर्तनमांजनेवाली कहां चली गई। मैंने अचकचाते हुए पूछा तो

कालेधन की तरह कान पर चढ़े जनेऊ को बनियान में दुबकाते हुए विश्वामित्री

मुद्रा में पंडितजी बोले कि वो आज फिर किसी प्राइवेट चैनल पर न्यूज पढ़ने

चली गई है। बर्तन तो वह पार्ट टाइम में ही मांजती है। और हमारी झाड़ू

लगानेवाली ने तो अपने काम से पर्मनेंटली ही इस्तीफा दे दिया है। हीरा

कीचड़ में भी पड़ा हो मगर होशयार जोहरी उसे परख ही लेते हैं। हमारी

भूतपूर्व झाड़ू लगानेवाली मेडम आजकल एक रेगुलर लाफ्टर शो मे बड़ा सीरियस

रोल कर रही हैं। मैं समझ गया कि कलयुग आ गया है यह सनसनीखेज खबर पडितजी

ने मुझे किस लिए सुनाई होगी। यह खबरों के पीछे की खबर थी। एक्शन फॉरवर्ड

और रिवर्स रीप्ले की मुद्रा में बर्तन मांजते हुए पंडितजी अचानक हमारी

आंखों के तारे हो गए। पहले रामदेव हुए फिर अन्ना हजारे हो गए। जिनकी सेहत

की सुरक्षित देखभाल के लिए एक अदद सख्त लोकपाल अर्जेंटली बहुत जरूरी है।

बाकी सब तो कलयुग में खानापूरी है।

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