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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-फखरे आलम- modi and muslim
चुनाव से पूर्व की स्थिति दर्शा रही है कि अभी तक की रेस में नरेन्द्र मोदी अन्यों की अपेक्षा आगे हैं और लगभग सभी पार्टियां और उनके नेता मोदी की आलोचना करने, उन्हें रोकने और आरोप लगाने में व्यस्त है। मगर लगातार भाजपा और मोदी अपनी तस्वीर बदलने और अपने उफपर लगते लगाते आरोप को छोने का प्रयास कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह व अन्यों के विचार एवं स्वर अब पहले की अपेक्षा बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं। मोदी का सम्बोधन अब जाति व र्ध्म पर आधरित न होकर विकास और प्रगति पर आधरित हो गई है। हिन्दु धर्म, हिन्दु राष्ट्र की बात करने वाले अब सभी को साथ लेकर, विकास और प्रगति में सभी की साझेदारी चाह रहे हैं। वह सब के साथ मिलकर एक मजबूत समाज और आधुनिक राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं। वह सबके विकास और प्रगति की बात कर रहे हैं। वह सबको प्रगति में साझेदारी देना चाहते हैं। सबके लिए अवसर की बात कर रहे हैं। आन्तरिक और बाहरी शान्ति का भरोसा दे रहे हैं। उनकी अगुवायी में समाज में नफरत नहीं, प्यार होगा और आपस में सहयोग और भरोसा होगा।
मोदी सड़क, बिजली, शिक्षा की बात कर रहे हैं। रोजगार का भरोसा दे रहे हैं। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और उपयुक्त समाज बनाने का भरोसा दे रहे हैं। तो उन पर एक बार भरोसा करना चाहिए, उन्हें अवसर देना चाहिए। जिस प्रकार से हमने किसी को दो दो अवसर दिए और 10 वर्षों का समय दिया उसी प्रकार से मोदी को भी एक अवसर देना चाहिए।
लगातार मोदी और भाजपा का खौफ दिखाने वालों का बाजार इस बार पिफका दिखाई दे रहा है। लगातार सेकुलर की बात करके सत्ता में बने रहने वालों का पोल खुलता जा रहा है। सेकुलर भारत में सत्ता प्राप्ती का और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने और उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा हथियार है। चुनाव से पूर्व नरेन्द्र मोदी का भाषण और उनके बोलने, भाषण देने और बात करने में लगातार अन्तर दिखाई देने लगा है। उनकी बातों से परिपक्वता अब झलकने लगा है। शालीनता दिखाई देने लगा है। अब उनकी पार्टी और उन्हें सांप्रदायिक नहीं कहा जा सकता, अथवा जिस प्रकार से न्यायालय ने उनहें कहीं भी दोषी नहीं पाया तो सीधे तौर पर उन्हें कोई दोषी करार नहीं दे सकता। अथवा दंगा पर सीधे तौर पर उन्हें नहीं घेरा जा सकता। अगर गुजरात पर जिन लोगों ने सीधे तौर पर मोदी और भाजपा को घेरा था। अथवा उन्हें दोषी मानते आ रहे हैं। उन्हें असम, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में हुऐ गुजरात से भयंकर दंगों को सामने रखना होगा।
बड़ी हैरान करने वाली बात है कि नरेन्द्र मोदी और भाजपा के पक्ष में अथवा विपक्ष में कभी भी मुसलमानों ने अथवा मुसलमानों से जुड़े किसी धार्मिक संगठनों ने कभी भी विरोध नहीं किया, अथवा चुनाव से पूर्व उनके विरोध में कोई अभियान नहीं चलाया। अब भारतीय मुसलमान और उनका संगठन पहले से अधिक परिपक्व हुआ है और भावनाओं और आवेश में आकर उन्होंने पैफसले लेने बन्द कर दिऐ हैं। यही कारण है कि अब मुसलमान सेकुलर की हवा बनाने वालों का हवा निकालते हुऐ। चार प्रदेशों में बड़ी संख्या में भाजपा को वोट दिऐ थे। बड़ी संख्या में मुसलमान अब इधर उधर फैसला करने लगे हैं। उन्हें अब न तो किसी इमाम और न ही किसी मुक्ती के फतवे की आवश्यकता है। हां, भाजपा ने मुसलमानों को अधिक मात्रा में अपनी उम्मीदवार नहीं बनाया है। अथवा भाजपा ने मुसलमानों में विश्वास व्यक्त नहीं किया मगर बीते कुछ दिनों में मुसलमानों ने भाजपा में विश्वास अवश्य ही दिखाया है।

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