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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-पीयूष कुमार द्विवेदी-
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> त्राहि-त्राहि जनता करे, तन-मन व्यापी पीर।
> देख दशा निज देश की, भारत मातु अधीर॥
> भारत जर्जर नाव सा, अगम सिंधु संसार।
> जनता की इच्छा नमो, आप बनें पतवार॥
> चौ.-
> जय-जय हे! भारत जननायक। पीड़ा हर सबके सुखदायक॥
> विश्व तुम्हारा गुणगान करे। तुम पर भारत अभिमान करे॥
> जनता के हो बड़े करीबी। देखा तुमने बहुत गरीबी॥
> चाय बेचकर समय बिताया। पंथ गलत पर ना अपनाया॥
> श्रम को केवल साधन माना। गीता सार तुम्हीँ ने जाना॥
> उजला कुर्ता उजली धोती। उस पर काली सदरी भाती॥
> आंख लगाते सुंदर ऐनक। दाढ़ी श्वेत बड़ी मनमोहक॥
> मूंछेँ तनी रहें ज्यों सायक। तरुणों के मन चाहे नायक॥
> भाषण देना तुमको आता। सुनकर मजमा मोहित होता॥
> हीराबेन तनय तुम अनुपम। ज्ञान फर्ज का सुंदर संगम॥
> बीजेपी के भवन शिखर हो। और दलों के लिए कहर हो॥
> कीर्ति लता चहुं दिश है बिखरी। अन्य दलों की चालेँ ठहरी॥
> लौह पुरुष का पथ अपनाएं। प्रगति पुरुष जो आप कहाएं॥
> गुजरात राज्य उन्नति करता। आयाम प्रगति नूतन गढ़ता॥
> दसों दिशा में खुशहाली है। कहीं न दिखती बदहाली है॥
> सड़कें लम्बी हैं चमकीली। लेटी ज्यों नागिन गर्वीली॥
> रोटी कपड़ा और मकाना। पाकर गूंजे प्रेम तराना॥
> हर मुखमंडल खुशी दिखेगी। मायूसी मायूस मिलेगी॥
> कहीं नहीं है रिश्वतखोरी। सच है नहीं कल्पना कोरी॥
> मीलों की हैं लगीं कतारेँ। जीते जिनके रंक सहारे॥
> मिटती सबकी क्षुधा-पिपासा। पालक हैं दामोदरदासा॥
> मन को मोहे खेती-बाड़ी। फेमस जग में सूरतसाड़ी॥
> धन्य हो गई गुजरात धरा। हर्ष राग नव चहुं दिश बिखरा॥
> साबरमती कीर्ति तव गाती। सर्वश्रेष्ठ हैं नमो बताती॥
> नर-नारी में दिखती समता। मोदी उर बहती है ममता॥
> जग के जाने-माने नेता। जन-जन के हैं हृदय विजेता॥
> नमो नाम का उदय निदेशा। कुमुद दलों में घोर निराशा॥
> अखबार तुम्हारे गुण गाएं। पढ़ें विरोधी मुख के खाएं॥
> ख्याति निराली ऐसी छायी। अमरीका के मन को भायी॥
> बदला अपना उसने निश्चय। कर्मठता का सुंदर परिचय॥
> आप नमो जी कुशल प्रशासक। कर्म-हृदय-बच जन हित साधक॥
> त्यागमयी मोदी का जीवन। चुम्बक जैसा है आकर्षण॥
> आज देश को बड़ी जरूरत। बदलाव की बन गई सूरत॥
> महँगाई से जनता हारी। मौज मनाएं भ्रष्टाचारी॥
> मरते हैं बेमौत किसाना। औने-पौने बेचेँ दाना॥
> कर्ज चढ़ा है सिर पर भारी। घर में बैठी बेटी क्वांरी॥
>
> शेष आगे…

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