लेखक परिचय

आलोक कुमार

आलोक कुमार

बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक (राजनीति-शास्त्र), दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (लोक-प्रशासन)l लेखन व पत्रकारिता में बीस वर्षों से अधिक का अनुभव। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सायबर मीडिया का वृहत अनुभव। वर्तमान में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के परामर्शदात्री व संपादकीय मंडल से संलग्नl

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मोदी -मंत्र ” ना खाऊँगा ना खाने दूँगा”  का विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिल रहा है फायदा :

 

लोकसभा चुनाव व उसके उपरांत हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में जिस कदर  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर भाजपा को लोगों ने अपना समर्थन दिया और अब झारखण्ड एवं जम्मू-कश्मीर के एक्ज़िट -पोल जैसे नतीजों की ओर इशारा कर रहे हैं उसे देख कर ये कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं  है कि भारतीय मतदाताओं में मोदी की स्वीकार्यता बाकी सबों पर भारी पड़ रही है l भारतीय चुनावी राजनीति को मोदी ने एक तरह से ‘वन मैन शो’ ही बना दिया है l

 

जनता के बीच जाकर इसके कारणों को तलाशने पर जो बात स्पष्ट तौर पर उभर कर आती है वो ये है कि मोदी के द्वारा दिए गए आश्वासन ” ना खाऊँगा ना खाने दूँगा” का जनता के बीच असर भी होता दिख रहा है और जनता इस पर विश्वास भी कर रही है जिसकी परिणति वोटों में होते साफ तौर पर दिख रही है l होम-फ्रंट पर अपने सात महीनों के कार्यकाल में मोदी ने क्या किया इसका आकलन अभी किया जाना बाकी है लेकिन एक भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था व सरकार बनाने की मोदी -मुहिम को जनता का समर्थन और विश्वास दोनों ही प्राप्त हो रहा है l

 

वर्तमान में विपक्ष के सारे खेमों की कमान भ्रष्टाचार में लिप्त -संलिप्त लोगों या भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वालों के हाथों में है और यहीं मोदी अपनी स्वच्छ -छवि के जरिए उन्हें लगातार (राज्यवार) हाशिए पर धकेलते जा रहे हैं , ऐसा नहीं है कि हाल के दिनों में जिन राज्यों में  भाजपा ने सफलता पाई है उसका स्थानीय नेतृत्व भ्रष्टाचार से अछूता है लेकिन लोगों में ये बात अब अपनी पैठ बनाती जा रही है कि “मोदी के रहते भ्रष्टाचार संभव नहीं है l”

 

जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य में भाजपा को सफलता मिलने ( अगर एक्ज़िट पोल्स की मानें तो )  के पीछे भी इस कारक की अहम भूमिका  है l उमर अब्दुलाह की सरकार के कार्यकाल में काँग्रेस के संरक्षण में जिस तरह केंद्र द्वारा आवंटित फंड्स की बंदरबाट हुई और उसके उपरांत अपने चुनावी अभियान में मोदी ने जैसे इस मुद्दे को लोगों के समक्ष  इस विश्वास के साथ रखा कि “उनकी सरपरस्ती में जम्मू-कश्मीर में योजना के तहत आवंटित पैसों का घाल-मेल नहीं होगा और कश्मीर भी देश के साथ विकास की मुख्य-धारा से जुड़ेगा” , इसकी ही परिणति भाजपा को अब जनमत के रूप में प्राप्त होते दिख रही है l जम्मू –कश्मीर में भाजपा की सरकार तो बनती नहीं ही दिख रही है लेकिन जितनी सीटें मिलने की तस्वीर एक्ज़िट –पोल्स के माध्यम से उभर कर आ रही है मेरे विचार में वो मोदी की ‘credibility & non-corruptible’ इमेज का ही प्रतिफल है l

 

अब अगर झारखण्ड की बात की जाए तो , इसकी स्थापना के चौदह वर्षों में ज़्यादातर भाजपा नीत सरकार या भाजपा के सहयोग से चलने वाली सरकारें ही रही हैं लेकिन प्राकृतिक संसाधनों व देश की खनिज सम्पदा के ४० फीसदी हिस्से से लैस इस राज्य का दोहन ही हुआ है l भाजपा का स्थानीय नेतृत्व अपने आप के बेदाग होने के लाख दावे करे लेकिन इस राज्य की दुर्दशा , वहाँ व्याप्त कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार में भाजपा की भी हिस्सेदारी रही है और वहाँ की जनता इस बात को भली-भाँति जानती व समझती है l इन्हीं कारणों से भाजपा को राज्य के गठन के बाद सम्पन्न किसी भी चुनाव में कभी भी स्पष्ट जनादेश भी नहीं मिला लेकिन लोकसभा चुनावों के समय से मोदी के कमान संभालते ही झारखण्ड ने मोदी की भ्रष्टाचार मुक्त छवि में अपनी आस्था दिखानी शुरू की l लोकसभा चुनावों में झारखण्ड की जनता ने मोदी को आशा से अधिक सीटें दिलवायीं l अपने लोकसभा चुनाव-अभियान के दौरान मोदी ने भी झारखण्ड की जनता को भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था व तंत्र का आश्वासन दिया और जनता ने इस पर विश्वास भी किया l अपने इन्हीं आश्वासनों के साथ मोदी विधानसभा चुनाव की मुहिम में भी झारखण्ड की जनता के समक्ष सामने आए और अपने संबोधनों में अप्रत्यक्ष रूप से ही सही भाजपा के दामन पर लगे दाग के छीटों को स्वीकारा भी l मोदी की स्पष्टवादिता को जनता ने माना भी तभी तो जनता एक बार फिर से उम्मीदों का आसरा लगाए ‘मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा में’अपनी आस्था जताती नजर आ रही है l मेरा सदैव से मानना रहा है कि एक राजनेता से इतर मोदी व मोदी के नेतृत्व में भाजपा की चुनावी सफलताओं में मोदी की प्रशासनिक क्षमता व ईमानदार छवि का बहुत ही बड़ा योगदान रहा है l

पिछले लगभग डेढ़ दशकों से एक शासक के रूप में अपने बहुचर्चित व विवादित सफर में केंद्र में अपने धूर विपक्षियों की सरकार के रहते हुए एवं मीडिया के रडार पर रहने के बावजूद मोदी के दामन पर भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं लगा है l देश की आम जनता के बीच ये धारणा अब कायम होती दिख रही है कि “लोग (विरोधी ) चाहे जो कहें कम से कम मोदी चोर तो नहीं हो सकते ना ही चोरी होने देने वालों में से हैं l” चुनावों में जीत के बाद जिस तरह से महाराष्ट्र व हरियाणा में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ‘दिग्गजों’ को नजरंदाज कर ‘लो-प्रोफ़ाइल व ईमानदार’ छवि के लोगों को बिठाया गया , उससे भी इन राज्यों (जम्मू –कश्मीर व झारखण्ड) के लोगों के बीच ये संदेश तो अवश्य ही गया कि मोदी के रहते अगर भाजपा की सरकार बनती है तो राज्य का नेतृत्व अवश्य ही ईमानदार व्यक्ति के हाथों में ही होगा l” अब देखना ये दिलचस्प होगा कि जनता की आकांक्षाओं व अपने किए गए वादों पर मोदी कितना खरा उतर पाते हैं !!जनता ने तो अपना फैसला सुना दिया है , जिसकी धमक भी सुनाई पड़ रही है , “Now it’s high- time for ‘Mr. Clean Modi’ to deliver and stand on his promises.”

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2 Comments on "मोदी -मंत्र ” ना खाऊँगा ना खाने दूँगा”"

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abhaydev
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modi r. s. s. ki kathputli aur agyani hai. wah lokpriya nahi. paisa kharch karke gadhe ko bhi admi ke roop me pracharit kiya jata hai. modi deshbhakta nahi hai matra bjp ka ek mohra hai. bhrast chunav pranali me ayogya vyakti hi neta banta hai isme koi sandeh nahi hai. alok kumar ji ka lekh pakshpat purna hai. poornatah asatya.

आर. सिंह
Guest

आलोक कुमार जी,आपने तो अपने हिंदी में लिखे आलेख के अंत में अंग्रेजी में टिप्पणी भी देदी. अब तो तो जनता को केवल यही देखना है.

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