लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

Posted On by &filed under लेख.


एक शहंशाह ने बनवा के हॅसी ताज महल, हम गरीबो की मौहब्बत का उडाया है मजाक’’ बहुत साल पहले किसी शायर ने क्या खूब कहा था। वास्तव में आज ताज महल गरीबो का मजाक उडा रहा है। हो सकता है के कल ये ताज अपनी हद के भीतर गरीब लोगो को घुसने भी न दे। जिस प्रेम के बेमिसाल प्रतीक ताज महल को देखकर दुनिया भर के अमीर गरीब प्रेमी युगल कई जन्मो तक साथ साथ जीने मरने की कसमे खाते है, उस ताज को अब सिर्फ और सिर्फ दुनिया के अमीर लोगो तक सीमित रखने की बात की जा रही है। कुछ सिर फिरे लोगो ने ये तर्क दिया है की गरीब लोगो के स्पशर करने से इस की खुबसूरती में कमी आ रही है। लिहाजा ताज को ज्यादा दिनो तक सुरखित रखने इस की उम्र बाने के लिये इसे गरीबो से दूर रखा जाये। सिर्फ दुनिया के रईसो और सेलिब्रीटी जैसे गिने चुने लोगो के देखने और इस में घूमने के लिये इसे सीमित किया जाना चाहिये।

ब्रिटेन की प्रतिष्ठित फ्यूचा लेबोरेटरी के एक नये अध्यन में दावा किया गया है की भारत में ताज महल, मिस्र के पिरामिड और वेनिस को केवल दुनिया के धनी वर्ग के लिये मौज मस्ती और खेल का मैदान बना दिया जाना चाहिये, ताकि उन्हे संरक्षित किया जा सके। ब्रिटेन की इस प्रतिष्ठित फ्यूचा लेबोरेटरी ने ये भी चेतावनी दी है कि इन विश्व विरासत स्थलो को बचाने के लिये यदि यह तरीका जल्द से जल्द नही अपनाया गया तो पर्यटन के भारी दबाव के कारण हम अगले 20 वर्षा में अपनी इन विरासतो को खो देगे। ॔॔डेली एक्सप्रेस’’ में एक रिर्पोट प्रकाशित की गई है जिस में इस प्रकार की वकालत की गई है। इस रिर्पोट और इस मुद्दे के दुनिया भर में उछलने के बाद सब से बडा सवाल ये उठता है कि क्या ऐसा कर पाना संभव हो सकता है हिन्दुस्तान में तो नामुमकिन है क्यो की जब से ताज बना तब से आज तक हिन्दुस्तान के हर अमीर गरीब के दिलो में बसा है गरीब लोगो की झोपडियो में टंगा है। ताज होटल मुम्बई में शायद गरीब लोगो के प्रवेश करने पर प्रतिबंध हो मगर असली ताज हर रोज हजारो गरीब लोगो से बिना भेद भाव के रोज मिलता है। इस के आंगन में जब प्रेमी युगल हाथ में हाथ लिये बाहो में बाहे डाले एक दूसरे को निहारते है तो ताज महल के रूप में खडे शाहजहॉ और मुमताज महल को अपनी मौहब्बत याद आ जाती है। इस के बगीचो में जब गरीब दयावती और रजिया के बच्चे शोर मचाते हुए इधर से उधर खुश होकर दौडते है तो ताज कितना खुश होता है इस बात का अंदाजा ये अंग्रेज कभी नही लगा सकते। क्यो की इन लोगो में वो मौहब्बत कहा जो हम हिन्दुस्तानियो में हीर राझा लैला मजनू शीरी फराद और राधा कृष्ण और न जाने कितनी अनगिनत मौहब्बत भरे किस्से कहानिया सुना कर हमारे पूर्वजो ने हमारे दिलो में कूट कूट कर भरी है।

हम हर रोज देखते और सुनते रहते है कि विदेशो में घर परिवार शादी विवाह के नाम पर क्या क्या होता है और क्या क्या हो रहा है जो लोग ठीक से अपना घर परिवार नही बना सकते वो भला ताज का महत्तव क्या जानेगे। ये लोग कितना प्यार को महत्तव देते है आये दिन हिन्दुस्तानी अखबारो में इन की शादियो से पहले तलाक की खबरे छप जाती है। क्या दुनिया के अमीर लोगो के पास ताज निहारने के लिये वक्त है क्या अमीर लोग ताज को उस मौहब्बत भरी निगाह से देख सकते है जिस निगाह से एक गरीब उसे निहारता है और ताज निहारते निहारते अपने सारे दुख दर्द पीडा़ सब कुछ भूल जाता है। नही शायद कभी नही। क्यो कि इन अमीर लोग के पास तो अपने सगे बच्चे को निहारने का वक्त नही गुजरे कुछ वर्षा मे अमीर लोगो के घरो की तसवीर तेजी से बदली है पिता को बच्चो से बात करने की उनके पास बैठने और पाई के बारे में पूछने की फुरसत नही। मॉ भी किटटी पार्टियो ,शापिंग नौकरी में उलझी रहती है। आज व्यापार के आगे इन अमीर लोगो को कुछ नजर ही नही आता। जो लोग अपने घर की सुन्दरता और रिश्तो का ख्याल नही रख पाते उन्हे हमारे ताज की फिक्र क्यो हो रही है दरअसल इन अमीर लोगो का कभी परिवार ही नही बन पाता बच्चे जन्म लेने के बाद आया के भरोसे थोडा बडे होने पर बोड़िग स्कूल, बच्चा कब बडा हुआ कैसे हुआ इन लोगो को नही पता इन्होने तो उस के हर दिन की कीमत अदा कर दी। इन लोगो के परिवार में दादा दादी ज्यादातर घरो में होते ही नही। ज्यादातर हाई सोसायटी घरो में एक अकेला बच्चा होता है। अकेला बच्चा क्या करे किस से बोले किस के संग खेले। आया के साथ माली के साथ। पडोस और पडोसी से इन पॉश कालोनी वालो का कोई वास्ता नही होता। बच्चा अकेलेपन ,सन्नाटे ,घुटन और उपेक्षा के बीच बडा होता है। बच्चे को ना तो अपने मिलते है और ना ही अपनापन। लेकिन उम्र तो अपना फर्ज निभाती है बडे होते बच्चो को जब प्यार और किसी के साथ ,सहारे की जरूरत पडती है तब इन अमीर लोगो के घरो में उस के पास मॉ बाप चाचा चाची दादा दादी या भाई बहन नही होते। होता है अकेलापन पागल कर देने वाली तन्हाई या फिर उस के साथ उल्टी सीधी हरकते करने वाले घरेलू नौकर।

हर रोज ताज को निहारने दुनिया के कोने कोने से हजारो लोग आते है लेकिन आज ताज महल अगर बोल पाता तो उस से पूछा जा सकता था कि उसे अपने आंगन में आये अमीर से मौहब्बत है या गरीब से। ताज पर इस प्रकार का प्रतिबंध लगाना की बात करना बहुत ही घटिया मानसिकता की बात है। ताज किसी अमीर या गरीब की जागीर नही ताज सिर्फ और सिर्फ मौहब्बत की निशानी है। इन अंग्रेजो ने हमे बरसो गुलाम बनाये रखा ये फिर से नई नई चाले चल रहे है हम हिन्दुस्तानियो के बीच हिन्दू मुस्लिम के बीज बोकर हमे आज तक लडा रहे है अब अमीर गरीब के बीज बोकर हमे फिर बाटना चाहते है। हमे और हमारी सरकार को इन की ऐसी किसी भी रिर्पोट से इत्तेफाक नही करना चाहिये क्यो कि हम हिन्दुस्तानी मौहब्बत के पुजारी है और ताज महल मौहब्बत का मंदिर इस में आने जाने वाला कैसा अमीर कैसा गरीब अरे वो तो मौहब्बत का पुजारी है जिस की आराधना, साधना सिर्फ और सिर्फ मौहब्बत है। गरीब हो या अमीर सब मिल कर बोले वाह ताज!

Leave a Reply

1 Comment on "ताज सिर्फ मौहब्बत की निशानी है"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
शैलेन्‍द्र कुमार
Guest

“ताज सिर्फ मौहब्बत की निशानी है” शीर्षक गलत है ऐसी इमारतें हमेशा गरीब मजदूरों और कारीगरों की लाशों पर बनी है और देश के सभी करदाताओं के साथ धोखा है, ये शहजादों और बादशाहों की विलासिता की निशानी है, ये भी याद रक्खे कि औरंगजेब ने इसी फिजूलखर्ची के लिए शाहजहाँ को जेल में डाल दिया था

wpDiscuz