लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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दुनिया में वैसे तो प्रतिदिन सुबह होती है। प्रभात होते ही जीवन गतिशील हो उठता है। चिडिया चहचहाने लगती हैं और प्रत्येक दिशा में सक्रियता नजर आती है। किन्तु भारत के राज्य मध्यप्रदेश में आठ मई का दिन विशेष प्रभात का दिन था। क्योंकि इसी दिन प्रदेश की राजधानी भोपाल में देश की शीर्ष राजनीतिक पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में प्रभात झा की घोषणा की गई।

प्रभात झा का जीवन कछुआ और खरगोश की उस कहानी की याद दिलाता है जिसमें चरैवेतिचरैवेति, चरैवेति निरन्तरम्… के मंत्र वाक्य को आत्मसात करते हुए चलने की गति में निरन्तरता बनाए रखी। जिसके परिणाम स्वरूप कछुआ अपनी चाल की गति धीमी होने के बाद भी आखिरकार जीतने में सफलता प्राप्त करता है। वस्तुतः छोटे से स्थान से प्रारंभ कर शीर्ष नेतृत्व की यात्रा करना इसी लगन का परिणाम है। जो लोग राजनीतिक क्षेत्र में सफलताओं से वंचित रह जाते हैं वे प्रायः स्वयं को दोषी नहीं मानतोबल्कि अपनी असफलता के लिए सदैव दूसरों को ही दोषी ठहराते हैं और उन पर स्वयं के साथ दुर्वव्यवहार एवं पक्षपात किये जाने का आरोप लगाते हैं। सही मायने में ऐसे लोगों के लिये प्रभात झा का जीवन एक अनुपम उदाहरण है। व्यक्ति यदि आगे बढते रहने का हर संकल्प कर ले और निरन्तर कर्म में रत रहे तब भला कौन उसे उसकी मंजिल तक पहुँचने से रोक सकता है।

प्रभात झा ने मध्यप्रदेश की धरती पर तो जन्म नहीं लिया किन्तु पिछले तीन दशकों की यात्रा में उन्हें न केवल इस प्रदेश का अनन्य बना दिया है बल्कि उन्होंने मृत्योपरांत मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा के तट पर अपना अंतिम संस्कार किये जाने की इच्छा प्रकट कर प्रदेशवासियों के बीच यह संदेश दे दिया है कि वे तन और मन दोनों से ही इस प्रदेश की खुशहाली और विकास के लिये समपिर्त हैं। उन्होंने देश की प्रमुख पार्टी भाजपा में रहते हुए अभी तक छोटे पद से लेकर समय-समय पर अनेक बड़े दायित्वों का निर्वहन किया है, लेकिन स्वप्रेरित कार्यकर्ता जैसी सक्रियता उन्होने कभी औझल नहीं होने दी है। वे बड़े पद पर रहकर आज भी खुद को पार्टी का एक छोटा कार्यकर्ता मानते हैं।

भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के पितृ पुरूष कुशाभाऊ ठाकरे, राजमाता सिंधिया, शेजवलकर, भाऊसाहब पोतनीस, गंगाराम जैसे राष्ट्र को समर्पित लोगों से संगठन कौशल अजिर्त करने वाले प्रभात झा ने हमेशा भाजपा में संगठन सवोर्परि, संगठन ही जीवन का मूलमंत्र है मानकर निर्लिप्त भाव से कार्य किया है। राजनीति क्यों ? के उत्तर में उनके द्वारा मूल्यों और सत्यनिष्ठा को राजनीति का आधार मानकर सदैव धैर्य के साथ चलते रहने का ही परिणाम है कि वे भारतीय जनता पार्टी के साधारण कार्यकर्ता से विशेष बन गए। प्रभात झा ने राजनीतिज्ञों के प्रति जनता के डगमगातो, टूटते विश्वास को अपनी कथनी और करनी से पुर्नस्थापित करने का कार्य किया है। वतर्मान दौर की दुरूह राजनीति मार्ग पर चलते हुए वे अपने सिद्घातों और अनुशासन से जरा भी विचलित नहीं हुए हैं। अभी तक उन्हें संगठन ने जो भी जिम्मेदारियों सौंपी हैं उन्हें प्रभात झा ने पूरी तनमयता और सत्यनिष्ठा के साथ पूरा किया है। उसी आग्रह के साथ वे सांसद के रूप में भी सभी के सामने आए। राज्य सभा सदस्य चुने जाने के बाद प्रभात झा ने राज्य सभा सदस्य के रूप में मिलने वाली राशि का उपयोग क्षेत्रवाद जैसी छोटी सोच को नकारते हुए प्रदेश में जहाँ आवश्यक हुआ उस स्थान पर जनहितैषी कार्यों में अपनी निधी को लगाया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनते ही जो संदेश सूबे की जनता के बीच पहुँचाया है उससे यही ह्ष्टिगत होता है कि वे पार्टी में सादगी और सुचिता सुनिश्चित करने में सफल होंगे।

श्री प्रभात झा ने 1993 से भाजपा में अपनी यात्रा प्रारंभ की। सबसे पहले वे मीडिया प्रभारी एवं प्रदेश प्रवक्ता बनाए गए । फिर उन्हें भाजपा संसदीय कार्यालय दिल्ली के अतिरिक्त सचिव का दायित्व सौंपा गया तथा वर्ष 2007 से 2010 तक वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के दायित्व के निर्वहन के साथ-साथ पार्टी के साहित्य एवं प्रकाशन के प्रभारी रहे हैं।

दैनिक स्वदेश समाचार पत्र से जुडकर सर्वप्रथम ग्वालियर में एक पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले प्रभात झा प्रत्यक्ष राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हो जाने के बाद भी निरन्तर अपने मन की आवाज को कलम से व्यक्त करते रहे हैं। पार्टी के विभिन्न पदों के निर्वहन के साथ-साथ ’’शिल्पी 2005’’, ’’जनगण-मन’’ (तीन संस्करणों में) वर्ष 2008 में एवं ’’अजात शत्रु पंडित श्री दीपदयाल जी वर्ष 2008’’ पुस्तकों का लेखन भी उन्होंने किया तथा वर्ष 2005 से पार्टी की राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका ’’कमलसंदेश’’ के संपादक बने। प्रभात झा भारत सरकार के मंत्रालय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी की स्थाई समिति के सदस्य, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज की परामर्श समिति के सदस्य एवं संसदीय राजभाषा के सदस्य भी हैं।

वतर्मान राजनीतिक दौर में प्रभात झा का मध्यप्रदेश में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनना निश्चित ही पार्टी और व्यक्तिगत दोनों ही स्तर पर यह संदेश देने में सफल रहा है कि भारतीय जनता पार्टी जाति, भाषा, वर्ग भिन्नता के भेद पर कतई विश्वास नहीं करती। वह विराट और राष्ट्रीय सोच का नेतृत्व करती है। इसीलिये ही उसने बिहार राज्य के दरभंगा जिले के गांव हरिपुर में 4 जून 1958 को जन्म लेने वाले प्रभात झा को प्रदेश मुखिया चुना है । वस्तुतः प्रभात झा को भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश के अध्यक्ष का दायित्व सौंप कर प्रदेश में सुप्रभात ला दिया है।

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2 Comments on "मध्यप्रदेश में सुप्रभात : मयंक चतुर्वेदी"

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ravishankar vedoriya gwalior
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mayank ji apne prabhat ji ke bare likhkar sacche deshbhakt ki kahani gad di hai badai ho sir aapka ravishankar

पंकज झा
Guest

ले नव विभूति आया प्रभात …मिट गया धरा का तिमिर-तोम, हो गया अस्त-निस्तेज सोम……! बधाई प्रभात जी.

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