लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

Posted On by &filed under विश्ववार्ता.


Pakistan's new foreign policy chief Aziz speaks during a news conference in Kabulपाकिस्तान के लगभग विदेश मंत्री और काफी अनुभवी राजनेता सरताज़ अजीज़ ने जो रहस्योद्घाटन किया है, उससे सारे मुस्लिम जगत को सावधान हो जाना चाहिए। उन्होंने वाशिंगटन में कुछ रक्षा-विशेषज्ञों के बीच बोलते हुए यह बात खुले-आम कह दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान का इलाका आतंकवाद का गढ़ बन चुका था। पाक-अफगान सीमांत पर स्थित इस क्षेत्र में बम बनाने की फेक्टरियां खुली हुई थीं, आतंकियों के प्रशिक्षण केंद्र चल रहे थे और आत्मघाती हमलावरों को तैयार किया जाता था।
वहां बम बनाने की इतनी फेक्टरियां थीं कि अगले 20 साल तक वे सारे दक्षिण एशिया में आतंकी कार्रवाइयां जारी रख सकते थे। उन्होंने अपना आंखों देखा हाल बताते हुए कहा कि ‘जब मैं मीरानशाह की एक मस्जिद पर गया तो बाहर से मुझे सब ठीक-ठाक लगा। उस मस्जिद के तलघर में 70 कमरे थे। उस तीन मंजिला मस्जिद में बम बनाने की 4-5 फेक्टरियां थीं। उनमें संचार की सुविधाएं, संगोष्ठी कक्ष, वीआईपी रुम, आत्मघाती प्रशिक्षण केंद्र आदि बने हुए थे।’
अजीज़ के अनुसार आतंक का यह जानलेवा कारोबार उन अफगानों ने शुरु किया, जो अफगानिस्तान से भागकर पाकिस्तान आ गए थे। उन्होंने 30-40 मस्जिदों में यह काम शुरु किया था। इन अफगान-शरणार्थियों को रोकने का कोई इंतजाम पाकिस्तान के पास नहीं है। ये कबाइली इलाके सदियों से किसी भी बादशाह या सरकार के नियंत्रण में नहीं रहे हैं। इन सात कबाइली क्षेत्र में से एक उत्तरी वजीरिस्तान है। इस इलाके में पाक सेना ने जून 2014 में ‘जर्बे-अज्ब’ नामक अभियान चलाया था, जिसमें 10 हजार आतंकवादी मारे गए थे। अजीज़ उन रक्षा विशेषज्ञों को यह बता रहे थे कि पाकिस्तान की सरकार और फौज ने कितनी बहादुरी का काम किया है।
इसमें शक नहीं कि वह अभियान बहुत ही बहादुराना था लेकिन वैसा ही अभियान पंजाब और पाकिस्तानी कश्मीर के आतंकवादियों के खिलाफ क्यों नहीं चलाया जाता? जो भारत-विरोधी आतंकवादी हैं, उनकी अनदेखी क्यों की जा रही है? यदि पाकिस्तानी फौज उन्हें संरक्षण देना बंद कर दे तो ही वे अपने आप सूखे पत्ते की तरह झर जाएंगे। पठानकोट जैसे कांड हो ही नहीं पाएंगे। आतंकवाद के गढ़ के तौर पर पाकिस्तान की बदनामी सारी दुनिया में फैल गई है। आतंकवाद के जरिए पाकिस्तान जितना नुकसान भारत का कर रहा है, उससे ज्यादा खुद का कर रहा है। पाकिस्तान की सरकार को चाहिए कि वह आम जनता को यह भी समझाए कि आतंकवाद इस्लाम के सिद्धांतों के विरुद्ध है। कुरान शरीफ कहती है कि किसी एक बेकसूर की हत्या सारी इंसानियत की हत्या है। इन इस्लाम-विरोधी कार्रवाइयों के लिए मस्जिद-जैसे पवित्र स्थान का दुरुपयोग तो पाप कर्म ही है।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz