लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

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तीर ने ना तलवार ने मारा –

हमको तो ऐतबार ने मारा !

जिसको निशाने पर रखा था –

उसके ही पलटवार ने मारा !

दुश्मन के जब गले लगे हम –

फिर तो हमको प्यार ने मारा !

पहले दिल था मान जाता था –

अब उसकी ही पुकार ने मारा !

कांच से नाज़ुक रिश्तो को तो –

रिश्तो की ही कटार ने मारा !

बिना आहट के दर खोला था –

वक्त की हम को मार ने मारा !

तुम भी वही हो मैं भी वही हूँ –

हम को तो तक़रार ने मारा !

तुम रातो को कुतरते रहे और –

हमको उनकी तीमार ने मारा !

कुछ दिन और संग रह लेते –

आँगन की इस दीवार ने मारा !

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