लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने क्या जबर्दस्त गुब्बारा उछाला है। 2019 के आम चुनाव में वे अपने पिता मुलायमसिंह को प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को उप-प्रधानमंत्री बना देखना चाहते हैं। कहावत है कि ‘खूब मिलाई जोड़ी।……….!! इस कहावत का दूसरा हिस्सा मैंने लिखा नहीं, क्योंकि उसके शब्द काफी जहरीले हैं और मुलायमजी पर वे तो किसी भी तरह लागू नहीं होते। लेकिन यह जोड़ी भी क्या जोड़ी है? कहां तो मुलायमसिंह यादव और कहां राहुल गांधी?
राहुल गांधी को तो उप्र के चुनाव में अखिलेश ने ही पटकनी मार दी थी। तब मैंने लिखा था कि इन दोनों लड़कों में एक आपकमाईवाला है और दूसरा बापकमाईवाला! आपकमाईवाला अखिलेश मुख्यमंत्री बन गया लेकिन बापकमाईवाले राहुल ने बापकमाई भी खो दी और उसके साथ-साथ दादी और परनाना की कमाई में भी पलीता लगा दिया। 2019 में वह उप-प्रधानमंत्री तो तभी बनेगा, जबकि अपनी सीट जीतकर पहले संसद में आएगा। मुलायमसिंह के साथ उप-प्रधानमंत्री की तरह राहुल को नत्थी करना ऐसा ही है, जैसे कि इंजिन के साथ बैलगाड़ी को बांध देना। अगर यह बात अखिलेश ने सामने बैठे राहुल को मज़ाक में कह दी हो तो और बात है।
जहां तक मुलायमसिंह का प्रश्न है, इसमें शक नहीं है कि इस समय वे देश के सबसे अनुभवी और मंजे हुए नेताओं में से हैं। प्रधानमंत्री पद उनके लिए मामूली बात है। इस पद पर अब तक बैठे कई लोग तो मुलायम के पासंग भी नहीं हैं लेकिन असली मुद्दा यह है कि एक अधमरे घोड़े पर बैठकर वे इस पद तक कैसे पहुंचेगे? कांग्रेस के कंधे पर जो भी सवार होता है, उसका अंजाम क्या होता है, यह आपको चंद्रशेखरजी और देवगौड़ाजी ने अच्छी तरह से बताया है।
यदि मुलायमसिंह बिहार के गठबंधन का नेतृत्व कर रहे होते तो आज से ही सारा देश उन्हें वैकल्पिक प्रधानमंत्री की तरह देखने लगता। आज का भारत एक सशक्त नेतृत्व की तलाश में है। यदि मुलायमसिंह चाहें तो अभी भी उस नेतृत्व को गढ़ सकते हैं। वे मित्रों के मित्र हैं। निरभिमान हैं। कृतज्ञ हैं। वे वामपंथियों और दक्षिणपंथियों, दोनों के लिए स्वीकार्य हैं। उन्होंने अखिल भारतीय राजनीति को अंदर-बाहर से खूब परखा है। लेकिन सबसे पहले उन्हें उप्र में कुछ ऐसा करके दिखाना होगा, जिसकी डोंडी सारे देश में पीटी जा सके। उसके बाद सारे विपक्षी दलों को मिलाकर वे एक ऐसा घोषणा-पत्र तैयार करें, जो एक समय-सीमा में लागू किया जा सके। जो महागठबंधन बने, उसकी प्रांतीय सरकारें इस घोषणा-पत्र को अभी से लागू करती चलें तो यह असंभव नहीं कि बंडलबाज नेतृत्व से उबी हुई जनता अपनी सहमति का ताज़ मुलायमसिंह के सिर पर रख दे।mulayam-rahul

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2 Comments on "मुलायम और राहुल: वाह! क्या जोड़ी है?"

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AVINASH SINGH
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समाजवादी पार्टी की 5 सीटो के बूते आज आप मुलायम सिंह के लिए PM का ख्वाब सॅंजो रहे हैं वो तो अनुभवी लग रहे हैं लेकिन आप की बातें मात्र एक कोरी कल्पना हैं/ वे भले ही वामपंथियों और दक्षिणपंथियों, दोनों के लिए स्वीकार्य हैं लेकिन बुद्धजीवी समाज के लिए एक भ्रष्टाचार फैलाने के अलावा क्या कर रहे हैं ये बात मत भूलिए की उनके वोटो की हिस्सेदारी बहुत ज़्यादा नही थी जो उनकी अधिकतम क्षमता है वो बस इतनी ही है थोड़ा भी मुस्लिम समिकर्ण बिगड़ा की उससे भी हाथ धो बैठेंगे/ अगर आप अपनी लेखनी मे वास्तविकता को… Read more »
आर. सिंह
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क्या हालात इतने बुरे हो गए कि हमलोग मुलायम सिंह को प्रधान मंत्री पद का उम्मीदवार समझने लगें.अखिलेश यादव ने तो एक आज्ञाकारी बेटे की तरह अपने पिता की वकालत की,पर उसको उनके परिवार के बाहर इस चर्चा की आवश्यकता क्यों पडी?

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