लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने ‘दुनिया’ में पाकिस्तान की हवा बिखेर दी है। उन्होंने पाकिस्तान के ‘दुनिया’ नामक प्रसिद्ध टीवी चैनल को दी भेंट-वार्ता में साफ-साफ स्वीकार किया है कि पाकिस्तान एक आतंकवादी राष्ट्र है। जिस अन्तरराष्ट्रीय आरोप को सभी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और खुद मुशर्रफ खारिज़ करते रहे, उस पर मुशर्रफ ने अब पक्की मुहर लगा दी है। कुछ वर्ष पहले पश्चिमी विशेषज्ञ पाकिस्तान को एक गुंडा राज्य (रोग़ स्टेट) कहा करते थे और उसे आतंकवाद की अंतरराष्ट्रीय सराय बताया करते थे तो राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी जवाब में बोलते थे कि हां, हमारे यहां आतंकवादी हैं लेकिन उनका सरकार से कोई संबंध नहीं है। वे ‘नाॅन-स्टेट एक्टर्स हैं।’ मुशर्रफ के बयान ने इस धारणा के परखचे उड़ा दिए हैं। उन्होंने लगभग आधा दर्जन पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों को झूठा ठहरा दिया है।

मुशर्रफ ने कहा है कि अस्सी और नब्बे के दशक में लश्करे-तय्यबा और जमातुदावा जैसे दर्जन भर संगठनों को पाकिस्तान की सरकार ने हर तरह की मदद की ताकि वे कश्मीर की आजादी के लिए लड़ सकें। उस समय हाफिज सईद और ज़कीउररहमान लखवी पाकिस्तान के ‘हीरो’ थे। इसी प्रकार उसामा बिन लादेन और ईमान अल जवाहिरी भी राष्ट्रीय महानायक थे। पाकिस्तान ने उस समय तालिबान और मुजाहिदीन को भी प्रशिक्षण और हथियार दिए ताकि वे अफगानिस्तान में रुसियों से लड़ सकें। मुशर्रफ की यह बात वर्तमान सुरक्षा सलाहकार सरताज़ अजीज के ताजा बयान से भी सिद्ध होती है। अज़ीज ने कहा है कि तालिबान पर हमारा नियंत्रण नहीं है लेकिन उन पर हमारा असर जरुर है। असर क्यों है, यह बताने की जरुरत नहीं है। याने भारत और अफगानिस्तान में होनेवाली आतंकवादी घटनाओं की जिम्मेदारी पहली बार पाकिस्तान ने खुले-आम कबूल की है।
यहां पहला प्रश्न यह है कि मुशर्रफ ने पाकिस्तान को पैंदे में बिठानेवाले इस तथ्य को अभी ही उजागर क्यों किया? इसका जो कारण मुझे दिखाई पड़ता है, वह यह कि मियां नवाज़ शरीफ से उनकी दुश्मनी! नवाज़ ने ओबामा को आश्वस्त किया है कि वे हाफिज सईद के खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे। अब मुशर्रफ सईद के कंधे पर रखकर अपनी बंदूक चला रहे हैं। वे नवाज़ को कश्मीर-विरोधी और भारतपरस्त सिद्ध करना चाहते हैं। उन्होंने 1999 में तख्ता-पलट के बाद नवाज़ की जान बख्श दी थी और नवाज अभी भी उन पर देशद्रोह का मुकदमा चला रहे हैं। चाहे जो हो, इस आपसी दुश्मनी ने पाकिस्तानी सत्ता-प्रतिष्ठान का असली चेहरा दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। मुशर्रफ के बयान ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि अमेरिकी सरकारें या तो अनभिज्ञ थीं या जान-बूझकर बेवकूफ बन रही थीं। वे बराबर पाकिस्तान की पीठ ठोकती रहती हैं। मुशर्रफ भारत में पैदा हुए हैं। उन्होंने अपना कर्ज अदा कर दिया है। उन्होंने उक्त बयान देकर भारत के हाथ में एक जबर्दस्त कूटनीतिक हथियार पकड़ा दिया है।

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