लेखक परिचय

कुन्दन पाण्डेय

कुन्दन पाण्डेय

समसामयिक विषयों से सरोकार रखते-रखते प्रतिक्रिया देने की उत्कंठा से लेखन का सूत्रपात हुआ। गोरखपुर में सामाजिक संस्थाओं के लिए शौकिया रिपोर्टिंग। गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक के बाद पत्रकारिता को समझने के लिए भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी रा. प. वि. वि. से जनसंचार (मास काम) में परास्नातक किया। माखनलाल में ही परास्नातक करते समय लिखने के जुनून को विस्तार मिला। लिखने की आदत से दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण, दैनिक जागरण भोपाल, पीपुल्स समाचार भोपाल में लेख छपे, इससे लिखते रहने की प्रेरणा मिली। अंतरजाल पर सतत लेखन। लिखने के लिए विषयों का कोई बंधन नहीं है। लेकिन लोकतंत्र, लेखन का प्रिय विषय है। स्वदेश भोपाल, नवभारत रायपुर और नवभारत टाइम्स.कॉम, नई दिल्ली में कार्य।

Posted On by &filed under विविधा.


कुन्दन पाण्डेय

Muslim-Reservation1मीयत ए उलेमा ए हिंद के प्रमुख महमूद मदनी ने जयपुर में ‘मुस्लिम आरक्षण’ पर बोलते हुए मुसलमानों के लिए कम से कम 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग की, जो कि संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। बिना संविधान की हत्या किए, ऐसा करना संभव नहीं है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री सऊद अल-फैजल ने एक बार कहा था कि ‘भारतीय मुसलमान कोई अल्पसंख्यक नहीं हैं, जिन्हें किसी बाहरी मदद की जरूरत हो। वे स्वयं सशक्त और समर्थ हैं।’

राजनीतिक पंडित यह मानते हैं कि लोकसभा की 543 में से 218 सीटों पर मुस्लिमों की आबादी तकरीबन 10 फीसदी है। 30 से 35 सीटों पर वे करीब 30 प्रतिशत हैं। ये 30 प्रतिशत वोट थोक में जिस प्रत्याशी को मिलेंगे, उसकी जीत सुनिश्चित होती है। लगभग 38 सीटों पर थोक में पड़ने वाला मुस्लिम वोट 21 से 28 प्रतिशत तक है।

भारतीय राजनीति की यह मान्यता है कि मुसलमान हिन्दुओं की तरह जातियों में बंटकर वोट नहीं देते हैं, बल्कि थोक में किसी एक ही प्रत्याशी को वोट देते हैं। इसीलिए सियासी पार्टियां मुसलमानों को वोटबैंक के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल कर रही हैं। कांग्रेस और अन्य कथित सेकुलर पार्टियां हमेशा मुसलमानों के वोटबैंक के लिए उन्हें धर्म के आधार पर आरक्षण देने की बात करती हैं, जबकि यह देशद्रोह और संविधान की हत्या करने का प्रयत्न है।

मदनी ने यह भी कहा कि मुसलमानों को भाजपा पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी से डरने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि इस देश में धर्मनिरपेक्षता की जड़ें काफी गहरी हैं और साम्प्रदायिक ताकतें आम आदमी के दिलों को कभी जीत नहीं सकती हैं। यह बात एकदम सच है और स्वागतयोग्य भी है।

मदनी साहब ने यह नहीं बताया कि विश्व के एकमात्र हिन्दु बहुल देश भारत में धर्मनिरपेक्षता की जड़ों को काफी गहरा किसने किया है, और पूरे विश्व में जिन देशों में भी मुस्लिम जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, वहां मुस्लिम धर्मनिरपेक्षता को छोड़कर धार्मिक राष्ट्र के लिए हिंसक क्यों हो जाते हैं। हिन्दुओं के मक्का-मदीना, राम-कृष्ण-शिव धर्मनिरपेक्ष हैं, चारों धाम और अन्य सभी हिन्दू धर्म के स्थान धर्मनिरपेक्ष हैं। लेकिन भारत से ही पैदा हुए पाकिस्तान और बंग्लादेश के साथ-साथ कश्मीर को भी मुस्लिम राष्ट्र बनाने के लिए वहां से हिन्दुओं को मार-मार कर भगाया जाता रहा है। यदि वेटिकन और मक्का बिना सेक्यूलरिज्म के पूज्य हैं, तो केवल अयोध्या, मथुरा और काशी के लिए सेक्यूलरिज्म क्यों ? मक्का में दूसरे धर्म के अनुयायी पर्यटक के रूप में भी नहीं जा सकते। क्यों ?

भारत में जिस गंगा-जमुनी तहजीब की बात की जाती है, उसकी पाकिस्तान और बंग्लादेश में बेरहमी से अनवरत हत्या क्यों की जाती रही है।

महात्मा गांधी ने 30 सितंबर 1927 को यंग इंडिया में लिखा था कि, “1300 वर्षों के साम्राज्यवादी विस्तार ने मुसलमानों को एक वर्ग के रूप में योद्धा बना दिया है। इसलिए वे आक्रामक होते हैं।… हिंदुओं की सभ्यता बहुत प्राचीन है। हिन्दू मूलत: स्वभाव से अहिंसक होता है। इस प्रवृत्ति के कारण उनमें हथियारों का प्रयोग करने वाले कुछ ही होते हैं। उनमें आम तौर पर हथियारों के प्रयोग की प्रवृत्ति नहीं होती, जिससे वे कायरता की हद तक भीरू होते हैं। ” देश भर की अदालतों ने 216 बार दिल्ली के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी के खिलाफ वारंट जारी किया है। आज तक दिल्ली पुलिस, बुखारी पर एक भी बार वारंट तामील कराने का साहस ही नहीं जुटा पाई।

कांग्रेस के मुस्लिमों को आरक्षण देने के नाटक से सीएम नीतीश कुमार ने पर्दा हटाते हुए पटना में 13 फरवरी, 2012 को कहा था, ‘जब केन्द्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी, तो मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाना था। उस समय विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने इसका विरोध किया था। उन्होंने लोकसभा में 3 घंटे तक भाषण दिया और 13 बार पानी पिया। आज वही कांग्रेस मुस्लिमों को आरक्षण देने के नाम पर नाटक कर रही है।’

स्वर्गीय वली खान की पुस्तक ‘फैक्ट्स आर फैक्ट्स’ में सर सैय्यद अहमद खान की टिप्पणी है, ‘भारत का प्रत्येक नागरिक, भले ही उसका धार्मिक विश्वास और मान्यताएं कुछ भी हो, हिंदू है, क्योंकि वह हिंदुस्तान में रहता है।

मार्क्सवादी विचारक डॉ. रामविलास शर्मा ने (गांधी, अंबेडकर, लोहिया और भारतीय इतिहास की समस्याएं) लिखा कि, “अपने सुधारों के द्वारा जैसे अंग्रेज हिंदुओं और मुसलमानों में फूट डाल रहे थे, वैसे ही जाति प्रथा के आधार पर वे हिंदुओं में फूट डाल रहे थे।… अंग्रेजों से तो यह आशा नहीं की जा सकती थी कि वे समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन करेंगे। अंग्रेजों ने जो आरक्षण नीति चलाई उसी नीति पर कांग्रेसी नेता भी बढ़े।”

अनुच्छेद 340 के तहत 1953 में काका कालेलकर आयोग गठित हुआ। आयोग ने राष्ट्रपति को लिखा, “समानता वाले समाज की ओर प्रगति में जाति प्रथा बाधा है। कुछ निश्चित जातियों को पिछड़ा मानने से यह हो सकता है कि हम जाति प्रथा के आधार पर भेदभाव को सदा के लिए बनाए रखें।” आज यही हो रहा है। जाति का जहर नस-नस में आरक्षण से घुल रहा है। यह पितृसत्तामक समाज को भी बढ़ावा दे रहा है। क्योंकि लड़कियां आमतौर पर अपने पति की जाति का अनुसरण कर लेती हैं।

संविधान सभा में नजीरुद्दीन अहमद ने कहा, “मैं समझता हूं कि किसी प्रकार के रक्षण (आरक्षण), स्वस्थ राजनीतिक विकास के प्रतिकूल हैं। उनसे एक प्रकार की हीन भावना प्रकट होती है।…श्रीमान रक्षण ऐसा रक्षा उपाय है जिससे वह वस्तु जिसकी रक्षा की जाती है, वह नष्ट हो जाती है। जहां अनुसूचित जातियों का संबंध है, हमें कोई शिकायत नहीं है।” मो. इस्माइल ने कहा, ‘मैं नहीं समझता कि एक वर्ग से दूसरे वर्ग को अलग करने के लिए धर्म को आधार बनाने में कोई हानि है।’ (संविधान सभा वाद विवाद 25/05/1949) जेड. एच. लारी ने कहा, ‘आपको SCs के हितों की चिंता है, लेकिन आप मुस्लिम हितों की परवाह नहीं करते’। बहस देर तक चली।

आरक्षण-बहस का जवाब देते हुए सरदार पटेल ने मुस्लिम तुष्टिकरण पर चेताते हुए कहा था कि, “जिन लोगों के दिमाग में लीग (मुस्लिम लीग) का ख्याल बाकी है कि एक मांग (देश विभाजन) पूरी करवा ली तो पुन: उसी योजना पर चलना है…मेहरबानी करके अतीत भूल जाइए। अगर ऐसा असंभव है तो आपके विचार में जो सर्वोत्तम स्थान (देश) है, आप वहां चले जाइए। अल्पमत का भविष्य इसी में है कि वह बहुमत का विश्वास करे। जो अल्पमत देश का विभाजन करवा सकता है, वह हरगिज अल्पमत नहीं हो सकता।” सांप्रदायिकता सबसे तेज विनाश करने वाला रासायनिक हथियार है, इसी हथियार ने भारत को 1947 में बांट दिया था।

मदनी साहब, भारत आज भी इसलिए धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि भारत के अच्छे हिन्दू धर्मनिरपेक्षता की प्राण-प्रण से रक्षा करते हैं। 52 मुस्लिम बहुल देशों में किसने अपने यहां के अल्पसंख्यकों को आरक्षण या विशेषाधिकार दिया है? यदि नहीं दिया है तो भारत में आप कैसे मांग सकते हैं? जबकि अखंड भारत इसलिए तीन भागों भारत, पाकिस्तान और बंग्लादेश में बंट गया क्योंकि अच्छे मुसलमानों ने ‘डायरेक्ट एक्शन’ का विरोध करने की जगह बुरे मुसलमानों का समर्थन कर सहस्राब्दियों से अखंड रहे सनातन राष्ट्र भारत को बांट दिया।

आखिर ये कैसा लोकतंत्र है, कैसी धर्मनिरपेक्षता कि 52 मुस्लिम देशों में से किसी में भी गैर मुस्लिम, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बन सकता? विश्व के लगभग 52 मुस्लिम देशों में कोई हज पर सब्सिडी नहीं देता। केवल भारत ही क्यों देता है?

अखंड भारत में 1946 का चुनाव ही इस बात पर लड़ा गया था कि भारत अखंड रहे या विभाजित हो। उस चुनाव में 99 प्रतिशत हिंदुओं ने कांग्रेस को अखंड भारत के लिए वोट दिया, जबकि 97 प्रतिशत से अधिक मुस्लिमों ने मुहम्मद अली जिन्ना के पाकिस्तान के पक्ष में वोट डाला। स्पष्ट है कि साम्प्रदायिक कौन है?

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz