लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

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(एक)
प्रवेश:

जब भूमि-अधिग्रहण विषय पर अति मह्त्त्वपूर्ण  और निर्णायक चर्चाएँ चल रही हैं; तो सरदार सरोवर प्रकल्प जो नर्मदा बाँध के निर्माण से संबंध रखता है, उसकी उपलब्ध (अनुमानित) सांख्यिकी की जानकारी  प्रवक्ता के पाठकों को भूमि अधिग्रहण के विषय में अपना मत और मन बनाने में सहायक होगी। इस हेतु से प्रस्तुत है निम्न सांख्यिकी।
(दो)
नर्मदा बाँध सांख्यिकी
नर्मदा बाँध  (१७,९२०) वर्ग किलो. मीटर. भूमि का सिंचन कर रहा है।
जो भूमि १२ जिला, ६२ तालुकों, और ३,३९३ गाँओं में फैली है।
इस की  ७५ % भूमि अकाल पीडित  गुजरात में है।
और ७३० वर्ग कि. मी. भूमि राजस्थान के बारमेर और झालोर जिलाओ में पडती है।
(तीन)
सरदार सरोवर प्रकल्प  के पक्ष में
सरदार सरोवर प्रकल्प  के पक्ष में जो बिन्दू हैं, वे ये हैं, कि,
इस प्रकल्प के  लाभ का पलडा अतिशय  भारी है। इतना भारी कि, सारी कि सारी कीमते,  उस लाभ के सामने बिलकुल नगण्य हैं।
सारे  मानवीय और पर्यावरणीय व्यत्यय (Disruption) की कीमत बिलकुल उपेक्षणीय और नगण्य है।
(चार)
दीर्घ कालीन घाटे का मूल्य

और इस बाँध के बिना, दीर्घ कालीन घाटे का मूल्य भी बडा भारी है।
एक, इस के बिना, सारी अगली पीढियों के लिए, आय का स्रोत असंभव होगा।
ऐसे आय के स्रोत का अभाव, आगे बढता ही जाएगा; जो, भविष्य की पीढियों को सहना दुष्कर होगा।

(पाँच)
बिना बाँध पानी व्यर्थ समुद्र में बह जाता था।

बिना बाँध पानी  समुन्दर में, बह जाता था।
यदि नर्मदा का पानी  समुन्दर में, बिना उपयोग बहने दिया जाता  तो ऐसे अनुपयोग के चलते, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में, प्रजा जनों  की दीन-हीन स्थिति में कोई सुधार की आशा नहीं थीं

(छः)
प्रकल्प की क्षमता
२० मिलियन लोगों की (अन्न )खिलाने की क्षमता रखता है।
और  कुटीर (small Scale Industry) उद्योगों,  और (Industrial Corporations)समवायिक उद्योगों द्वारा ३० मिलियन  की जन संख्या को जल की पूर्ति करेगा।
१ मिलियन लोगों को नियुक्त करेगा।
और बिजली शक्ति  उपलब्ध कराएगा, जहाँ पहले ऐसी  क्षमता अस्तित्व में नहीं थीं।
साम्प्रत संशोधन दर्शाते हैं, कि, अनेक आर्थिक (Economic multiplier effects)चक्रीय़ उप परिणाम भी होंगे जिनका कोई सांख्यिकी अनुमान नहीं दिया जा सकता।
(सात)
उपपरिणाम

जैसे कि निवेश में वृद्धि , विविध सेवाओं में अनेक प्रकार के कर्मचारियों की नियुक्तियाँ, जो प्रत्यक्ष सिंचाई से जुडी होंगी। अतिरिक्त  अन्य (Cyclic Side Effects) चक्रीय सह-विकास के कारण निर्माण  होंगी।
इस प्रकल्प से जितनी जन संख्या को  कठिनाई उठानी पडी,  उससे सौ से अधिक गुना जनसंख्या को लाभ पहुंचेगा।
अर्थात प्रति व्यक्ति सौ से अधिक जन संख्या लाभान्वित हुयी है।
आर्थिकी विश्लेषण इसे लाभ/घाटे का अनुपात १००+ से अधिक अनुमानित करता है।
Economic Analysis calculates the ==>Benefit/Cost –Ratio= 100+

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2 Comments on "नर्मदा बाँध -सांख्यिकी और भूमि अधिग्रहण"

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डॉ. मधुसूदन
Guest

Thanks Tiwariji.
Statistics speaks an impartial language.

To others Wake up friends and
(1)avoid suicides of farmers by enriching Bharat.
Few acres of acquisition
(2)irrigates hundreds of acres,
(3) prevents famines and
(4) raises depleting ground water table
(5) provides for domestic water.
Well wishers of Bharat…..Wake up.

Vishwa Mohan Tiwari
Guest

“Where profit is more than 100 times, should there be any doubt on executing such projects!
Yet there are some institutions and individuals who oppose !
Let us beware of such social servers.
Vishwa Mohan Tiwari

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