लेखक परिचय

परमजीत कौर कलेर

परमजीत कौर कलेर

मैं प्रोडूयसर के तौर पर 4 रीयल न्यूज में काम कर रही हूं । फीचर लिखती हूं । प्रसार भारती दिल्ली के वूमेन सैक्शन के लिए भी लिखती हूं ।आकाशवाणी पटियाला में रिकार्ड हुए प्रोग्राम वेहड़ा शगना दा, तीआं तीज दीआं विभिन्न विषयों पर फीचर लिख सकती हूं। लिखने का है शौक पंजाब के मैगजीन समुदरों पार , चढ़दीकला पटियाला, पटियाला भास्कर, माईल स्टोन मैगजीन में प्रकाशित हुए हैं फीचर

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uttrakhand

एक दिन बीत जाने के बाद दूसरा दिन आता है…दिन गुजरते हैं तो हफता आ जाता है…हफते बीतते हैं तो महीना आ जाता …. उतराखंड में हुई तबाही को भी एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है …मगर जख्म अभी भी हरे हैं जो ताउम्र नहीं भरेंगे …और अपनों से बिछुड़ने का गम उन्हें  पल पल सालता रहेगा …जो भी उस दर्दनाक मंजर को याद करता है …उसकी रूह कांप उठती है…और रोंगटें खड़े हो जाते…वो महाप्रलय  ऐसा गम दे गई ..जिसे कोई भूल सकता है और न ही भूल पाएगा…जी हां हम बात कर रहें हैं …उतराखंड में आए उफान की…तबाही की …त्रासदी की… कुदरत का कहर कुछ ऐसा बरपा कि सब कुछ तहस नहस हो गया …जो अपने पीछे छोड़ गया है तो सिर्फ और सिर्फ  तबाही के निशा…इस तबाही न जाने कितनों की जिन्दगियां लील ली और आलम तो ये है कोई भी दर्दनाक घटना को याद नहीं करना चाहता…

मंजर इतना खतरनाक और खौफ़नाक कि कोई भी इस  को याद नहीं करना चाहता…महज याद करने भर से ही दिल दहल जाए…कुदरत के इस कहर ने सैंकडें लोगों की जान ले ली…केदारनाथ मंदिर में पड़ी ये लाशें गवाही भर थी कि कैसे कुदरत ने ऐसा  तांडव मचाया कि सब कुछ हो गया तहस नहस …16 जून का दिन उतराखंड निवासियों के लिए ब्लैक डे साबित हुआ…उफनती नदियों के रास्ते में जो भी आया उसे वो अपने तेज बहाव के साथ बहा ले गईं…केदारनाथ मंदिर में लाशें एक दूसरे के ऊपर पड़ी थीं …खाली घर भी मानो इन लाशों को देखकर आंसू बहा रहे हो… जो यात्री निकले थे धार्मिक यात्राओं के लिए उन्हें इस बात का ज़रा भी इल्म न था कि प्रकृति उनके साथ ऐसा खेल भी खेलेगी जिसमें उनके अपने ही हो जाएंगे आंखों से दूर…इस तबाही ने उतराखंड के हालात बद से बदतर कर दिए …नदियों का बहाव इतना तेज था कि पल में सब कुछ तबाह हो गया …यही नहीं जो लाशें थी उनके लिए वहां जलाने के लिए लकड़ी तक न थी और मजबूरी में मृतकों के परिजनों ने अपनों को पानी में बहा दिया …वो लाचार थे , बेबस …और इस लाचारी बेबसी में किसी का कोई बस नहीं चलता…जो इस खौफनाक मंजर से बच निकले थे उनकी भी बस यही ख्वाहिश थी कि वो सुरक्षित जगह पर पहुंच जाएं… लोगों के  आंसू थे कि वो थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे …वो चाहते थे कि हम जल्दी से जल्दी अपने घर पहुंच जाएं…

तबाही के इस सैलाब का लोगों के दिलों दिमाग पर कुछ ऐसा असर हुआ कि वो उतराखंड जाने से तौबा कर बैठे …भई आखिर सवाल है बेशकीमती जिन्दगी का…उतराखंड में आई तबाही ने सब कुछ उजाड़ कर रख दिया..सैंकड़ों सुहाग उजड़ गए और कईयों के घरों के इकलौते चिराग बुझ गए… अपनों से बिछुड़ने का दुख कैसा होता है वे वहीं महसूस कर सकता है जो इस खौफनाक दौर से गुजरा है… 16 जून का दिन लोगों के लिए कहर बनकर आया…पहाड़ धस गए…पहाड़ियां गिर गई…पहाड़ियों पर बने आशियानें ताश के पत्तों की तरह ढह गए…इस जगह को देखकर लगता नहीं है कि यहां लोगों के सुन्दर घरौंदे होंगे क्यों कि अगर इस जगह पर कुछ दिखाई देता है तो वो है सिर्फ मलबा और तबाही के  निशां…तबाही के ये जख्म लोग भूले से भी नहीं भुला पा रहे…उफनती नदियां डरा रही थी…जिसमें लाखों लोग काल का ग्रास बन गए…होटलों और घरों में शरण लिए इन यात्रियों को इस बात का ज़रा भी एहसास न था कि कुदरत इनके साथ इतना बड़ा मजाक करेगी…और उनके अपने कभी घर में लौटेगे ही नहीं…लोग अपने का इंतजार बड़ी ही बेसब्री से कर रहें थे …. अपने परिवार वालों को अगर एक पल न देखे …तो दिल बेकाबू हो जाता और न जाने क्या- क्या ख्यालात जेहन में आते है…मगर इस मंजर ने जिनका सब कुछ तहस नहस करके रख दिया था जिसमें बेपनाह जानी और माली नुकसान हुआ…जिनको सूचना मिल गई कि उनके अपने पराए हो गए…और इस दुनियां से हमेशा हमेशा के लिए चले गए…मानो उन्होंने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर सब्र कर लिया हो…मगर अपनों का दर्द तो हमेशा ही रह रह कर सालता रहता है और जिसे वो ताउम्र नहीं भूल सकते…अपनों से बिछुड़ने का गम क्या होता है…न दिन में चैन पड़ता है और न ही रात को अपनों को इंतजार करको टकटकी लगा कर ये लोग कभी टीवी देखते  …तो कभी परेशां होकर अपनों की याद में आंसू छलक पड़ते …अपनों का इंतजार करते-करते इन लोगों की आंखें भी थक गई है कि आखिर उनके अपने लौटेगे भी या नहीं क्योंकि उन्हें इनका कोई अता पता नहीं मिल पा रहा है….उन्हें रह रह कर अगर कुछ याद आ रहा है तो वो है सिर्फ परिवार वालों की..डर , सहम लोगों के चेहरों पर  साफ झलक रहा था..लोगों को सिर्फ अपनी जान बचाने की पड़ी थी…कईयों को तो अब भी होश हवास नहीं है…बस फिक्र थी तो इस दर्दनाक हादसे से निकलने की…

हर तरफ तबाही ही तबाही …न कोई आने जाने का रास्ता , पुल टूट रहे थे …बिल्डिंगे गिरने लगी…पत्थरों के पहाड़ गिर रहे थे…और पानी की प्रलय सब कुछ बहाकर ले गई …लोग अपनी जानें बचाने के लिए इधर -उधर भागने लगे…आखिर जाएं तो जाएं कैसे …पहाड़ी रास्तों से अनजान…मुश्किल की इस घड़ी में लोगों को कुछ भी नहीं सूझ रहा था…मिलट्री के जवानों की कोशिश थी कि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचा सके…जिप लाईन के जरिए लकड़ी के पुल बनाकर बच गए लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया…चारों तरफ  हाहाकार मची थी …जो खुशकिस्मत थे वो उस जलजले से बच निकले…मौत का तांडव सामने होता देखकर हर कोई सहमा और डरा हुआ था …उन्हें बस रह रह कर  वहीं लम्हें याद आ रहे थे…जिसे वो जितना भुलाना चाहते थे …उतना ही उन्हें ज्यादा परेशां कर रहें थे ….जो मौत के मुंह से बच आएं थे वो भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे…वहीं बचकर आए लोग उतराखंड के प्रशासन से भी खफा नज़र आए ।

लोगों की आंखों में वो दर्द , खौफ साफ झलक रहा है…जो मौत के इस खेल से बचकर आए …कुदरत के इस कोहराम में सैंकड़ों के अपने उनसे इतना रूसवा हो गए कि उन्हें कफन तक नसीब नहीं हुआ…और ये जलजला ऐसा गम दे गया जो इन लोगों को पल पल सालता रहेगा ।कुदरत ने तो कहर बरपाया ही मगर कुछ इंसा भी शैतान बन बैठे…वो  कहते हैं न जब बुरे दिन आते हैं…तो सभी मजबूरी का फायदा उठाना चाहते हैं…इस कठिनाई में लोगों की मदद करने की बजाय…इंसान के रूप में शैतान बने कुछ लोगों ने… यात्रियों की  बेबसी , लाचारी और बेचारगी का फायदा उठाने से भी गुरेज नहीं किया…मौत के मुहाने से वापिस लौटे लोगों का कहना है कि उनके पास खाने को कुछ नहीं था और वहां कुछ लोगों ने बिस्कुट , पानी भी दौगुने दामों में बेचना शुरु कर दिया…जनता लाईनों में लगी …भूख प्यास से तड़प रही थी …मगर इसकी किसी को कोई परवाह नहीं थी…यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं थी तो वो भूख , प्यास से तड़प रहे थे…लोगों की  सरकार के  प्रति रूसवाई इस कद्र थी कि वो कह रहे थे कि उनसे भेदभाव किया जा रहा है…

कुदरत ऐसी तबाही लेकर आई कि हर तरफ लाशों के ढेर बिछ गए…उतराखंड का प्रशासन भी लोगों की मदद करने में नाकाम नज़र आया…विभिन्न राज्यों से राहत सामग्री इन बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई थी ताकि मुश्किल की इस घड़ी में बच गए लोगों  की मदद की जा सके …पंजाब सरकार ने मुसीबत में फंसे लोगों की बढ़चढ कर मदद की जगह- जगह लंगर का प्रबंध किया गया और राहत सामग्री भेजी गई …मगर हालात बद से बदतर हो गए…एक से बढ़कर एक दुखभरी दास्तां थी  इन लोगों की …न खाने पीने की सहूलियत , न गाड़ी की सुविधा ,न रेल सुविधा ,  तो कही कर्मचारियों और अधिकारियों की रौबगिरी भी इन लोगों के रास्तें में रूकावट बनी…और कईयों अपनों के खोने और न मिलने गम साल रहा था।

गुजरात , राजस्थान , मध्यप्रदेश , बिहार देश के किसी भी कोने से आए श्रद्धालुओं को हताशा ही हाथ लगी …उनकी जुबां मानो थरथर्रा रही थी और वो कुछ भी बताने के काबिल नहीं थे …ये जलजला ऐसा कहर ले कर आया कि सब कुछ तहस नहस हो कर रह गया…और उजड़ गया सब कुछ……एक तरफ लाशों को भी नहीं बख्शा जा रहा था उनके हाथों कानों में पड़े जेवर बड़ी ही बेहुदगी से निकाले जा रहे थे…जेवर  निकालने के लिए उन्होंने लाशों के अंगों को काट दिया गया …चार धामों की यात्रा पर गये इन यात्रियों को इस बात का ज़रा भी इल्म न था कि उनके अपने कभी वापस नहीं लौटेगे अगर लौटेगे तो इनका ये हश्र होगा…और वो आखिरी बार अपनों का  चेहरा देखना भी नसीब नहीं होगा।

उतराखंड में आई तबाही से , हर तरफ हाहाकार और तबाही मचाई …इस तबाही से सारा आलम ही सहमा …और  इन पीड़ितों के लिए जिनसे जो मदद बन पा रही है कर रहा है…कुदरत की ये  महाप्रलय यात्रियों के लिए कई दिक्कतें लेकर आई … उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उन्हें ऐसी  ऐसी दिक्कतें आएगी कि उन्हें रोटी के एक एक टुकड़े के लिए तरसना पड़ेगा…कुछ लोगों का तो यहां तक कहना था कि उनसे उतराखंड प्रशासन भेदभाव कर रहा है…उस दर्दनाक हादसे ने सबको हिला कर रख दिया….आंसू हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे …सहम , डर , दहशत इनके चेहरे पर साफ झलक रहा था …अपनो का इंतजार करते और उनकी बाट जोहते जोहते लोगों की आंखे थक चुकी है…और कई तो ऐसे है जिन्होंने अपनों के बिछुड़ने के गम में चूल्हा तक नहीं जलाया…

पड़ोसी राज्यों से जो मदद बन पा रही है …वो लगातार इसमें जुटे हैं कि ताकि मुसीबत की घड़ी में इन पीड़ितों की मदद हो सके…पंजाब , हरियाणा, दिल्ली समेत लोग ट्रकों के ट्रकों राहत सामग्री भेजी …यही नहीं पंजाब सरकार की ओर से जगह – 3 इन बाढ़ पीड़ितों के लिए लंगर लगाए गए…पंजाब ,कलकता, मध्यप्रदेश से भी सामाजिक संस्थाओं की ओर से मदद की  गई…वही देश भर में उतराखंड में आई त्रासदी के लिए कही हवन यज्ञ, अरदास , दुआएं मांगी गई…इस में हर समुदाय के लोग शरीक होकर इंसानियत के भले के लिए एक जुट होकर प्रार्थना की ..जिसमें इस त्रासदी का शिकार हुए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की  जा रही हैं और जो बच गए वो सुरक्षित अपने घरों में लौट आएं…

उतराखंड में आई महाप्रलय ने सबको झकझोर कर रख दिया …एक तो पानी की महाप्रलय ने ऐसा उत्पात मचाया कि सब कुछ बह गया…अपनो से बिछुड़ने का गम , गम भी ऐसा कि वो कभी उनके पास आ नहीं सकते…वो चले गए है इतनी दूर …अब तो सिर्फ रह गई हैं उनकी यादें…जो उनकी आंखों से ओझल नहीं हो रहीं…हर चेहरा उदास है , गमगीन है …अपनों की तलाश में है …मगर लौटेगा भी या नहीं …बस यही इंतजार  रह रह  कर हर एक को साल रहा है…हम तो यही चाहते है कि ईश्वर उन लोगों की आत्मा को शांति दे जो इस संसार से रूखस्त हो चुके हैं …और ईश्वर उनके परिवार को इस दुख को सहन करने का बल बख्शे….

परमजीत कौर कलेर

 

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1 Comment on "कुदरत का कहर ……"

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mahendra gupta
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ये दुःख कभी भी नहीं भुलाये जा सकते.किसी एक को पूर्ण रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. समय ही केवल इस दर्द भुलाने में मददगार होगा

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