लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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 lifआज देश के राजनीतिक गलियारों में सिर्फ एक ही बहस छिड़ी हुई है कि 2014 का प्रधानमंत्री कौन बनेगा। कुछ लोग कहते हैं कि राहुल गांधी बनेंगे तो कुछ लोग कहते हैं कि मोदी का नाम सबसे ऊपर है। वहीं एनसीपी शरद पंवार को प्रधानमंत्री बनाने के सपने संजोए बैठी है तो समाजवादी पार्टी अपने मुखिया मुलायम को प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहती है। मायावती कहती है कि दलितों की रक्षा के लिए उनका प्रधानमंत्री होना बहुत ज़रुरी है। आज हमारे देश में राक्षस की तरह मुॅह फाडे खडी मंहगाई, आज देश में जो अपराध और अपराधिक मामलो की संख्या रोज बढ रही है उस के पीछे एक बहुत ही बडा कारण है ’’राजनीति में अपराधियो का प्रवेश’’ मौजूदा 15वी लोकसभा की स्थिति ये है कि 150 सांसदो के खिलाफ आपराधिक मामले कोर्ट में लंबित है, वही 72 सांसदो के खिलाफ गंभीर किस्म के मामले देश के विभिन्न थानो में दर्ज है। इन में भाजपा के 42 सांसदो के खिलाफ आपराधिक मामले व 12 सांसदो के खिलाफ गंभीर मामले व कांग्रेस के 41 सांसदो के खिलाफ आपराधिक व 17 के खिलाफ संगीन आरोप और मामले दर्ज है। यू तो इन्सान को जीने के लिये दो रोटी और तन पर एक कपडा बहुत है मगर जिस रफ्तार से देश में एक घोर भ्रष्ट संस्कृति पनप रही है वो राजतंत्र, पुलिसतंत्र और न्यायतंत्र का निकम्मापन है।

पिछले दिनो कांग्रेस ने एक ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया जिस में उसने  अपने किए गए कार्यों और न किए गए कार्यों पर चिंतन की इस शिविर में शामिल होने के लिए कांग्रेस ने अपने बड़े बड़े नेताओं का जमघट लगाया। क्या वास्तव में कांग्रेस को देश की चिंता है। नही दरअसल इस चितंन शिविर का मकसद था कांग्रेस के वोट बैंक में मुस्लिम सेंध न लग जाये.. और भविष्य में अब मुस्लिम वोट बैंक बढ़ाने के लिए क्या क्या सियासी चालें खेली जाए, ताकि मुस्लिम वोट बैंक हमे दोबारा मिल जाए.. हो सकता है कि आने वाले दिनो में मुस्लिमो को कुछ लॉलीपोप मिल जाए और हो सकता है कि कुछ लोग सरकार के इस झांसे में आकर भ्रष्टाचार, मंहगाई, और कालाधन जैसे मुद्दों को भूल जाए। क्योंकि चुनाव में ये होता भी है कि मुस्लिम वोट बहुत बुरी तरह बिखर जाता है यदि मुसलमान अपने वोट की कीमत समझ ले तो दिल्ली ही नही देश के हर प्रदेश में मुसलमानो की सियासी और समाजिक स्थिति बहुत कुछ बदल सकती है। पर क्यो मुसलमान एक अल्लाह, एक कुरआन और एक रसूल को मानने के बावजूद एक नही हो पाता जिसका लाभ सियासी पार्टियां उठाती रही हैं।

बीजेपी ने एक बार फिर से लोकसभा के चुनाव को देखते हुए राम मंिदर का मुद्दा उछाल दिया है भारतीय राजनीति में इस वक्त मुद्दाविहीन भाजपा कहती है कि वो राम मंदिर बनाने को तवज्जो देती है अगर जनता ने उसे दिल्ली की बागडोर दी तो वो मंदिर जरूर बनायेगी। इलाहबाद कुंभ को भाजपा ने किस प्रकार राजनीति का अड्ढा बनाया वो हम सब ने देखा और देख रहे है। कांग्रेस कहती है कि बीजेपी मुसलमान विरोधी पार्टी है। और भाजपा कांग्रेस पर मुस्लिम आतंकवाद बढाने का आरोप लगा रही है। ये देश की सब से बडी राजनीतिक सियासी पार्टिया है क्या इन्हे देश की आम जनता का दुख दर्द नजर नही आ रहा, देश में फैली मंहगाई, भ्रष्टाचार, अराजकता, रोज हो रहे महिलाओ पर अत्याचार बलात्कार देख कर भी ये लोग मंदिर मस्जिद की सियासत में उल्झे है। वही इन सियासी पार्टियो के नेताओं को जो इसी बहाने देश की गंदी सियासत में अपनी पहचान बनाना या बनाये रखना चाहते हैं। उस में नरेंद्र मोदी हो या दिग्विजय सिॅह या अन्य पार्टियो में प्रवीण तोगडिया हो या फिर अकबर उवैसी ये लोग आज तक धर्म की राजनीति के सहारे ही जिंदा है। अयोध्या में मंदिर बने मस्जिद बने आज देश के आम हिंदू मुसलमान को इस से कोई फर्क नही पडता। इन सियासी लोगो की इस लडाई में देश के दो नुकसान होते है एक तो हम हिंदू मुसलमानो में नफरत बढ जाती है दूसरे इस लड़ाई में आम जनता के रोज़ाना की दिनचर्या से जुड़े वो सवाल पीछे छूट जाते हैं जैंसे महंगाई, भ्रष्टाचार, जिनसे उसका रोज सामना होता है उन बातों पर किसी का ध्यान जाता ही नहीं सिवाय परेशान जनता के, सच मानों तो सिर्फ ये नेता ही हिंदू मुस्लिम का राग अलापकर अपने सियासी मतलब के लिए दिलों में भेद पैदा करते हैं। सच मानों तो कभी मेरे दिल में भी ये ख्याल आता है कि वहां मंदिर की जगह एक अस्पताल बना दिया जाए ताकि सभी धर्मों को एक जगह स्वास्थ्य सुविधा मिल सके ये कैसी इस देश की विडंबना है कि देश का आम आदमी कुचला जा रहा है महंगाई के बोझ तले औऱ सियासी पार्टियां हैं कि जातिगत और धर्मगत प्रधानमंत्री बनाने में लगी है उन विषयों पर कोई बात ही नहीं करता जो जनता सबसे पहले सुनना चाहती है ताकि वो प्रधानमंत्री और पार्टी को आसानी से चुन सके। अगर मैं एक आम आदमी की भाषा में बात करुं तो जनता को चाहिए कि वो प्रधानमंत्री आए जो देश का हो, देश की नब्ज को पहचानता हो, देश के अंदर कौन सबसे ज्यादा दुखी है ये भी जानता हो, क्यों कि वो एक देश का प्रधान होता है अपने देश रुपी घर में फैली सभी बुराइयों को खत्म करना उसका पहला मकसद होना चाहिए लेकिन यहां तो कुछ और ही सोचा जाता है कि प्रधानमंत्री बनने के लिए जनता को क्या पट्टी पढ़ाई जाए कि वो उसकी पार्टी को जिता दे फिर देखेंगे कि किसको क्या बनाना है।

आज देश में लगभग सात लाख चिकित्सको की कमी है, भारत की जनसंख्या के हिसाब से 1500 मरीजो पर सिर्फ एक डॉक्टर है आज सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नही बल्कि पूरा देश स्वास्थ्य सेवाओ के नाम पर पिछडा हुआ है, यहा बचपन कुपोषित है, जवानी रोगग्रस्त और बुढापा अभिषापित, वही मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु, कुपोषण, बाल रोग, जनसंख्या वृद्वि सब में हम पूरी दुनिया में आगे है। ऐसे में देश में ये बहस होना पागलपन नही लगता कि प्रधानमंत्री राहुल को बनाया जाये या नरेंद्र मोदी को, अयोध्या में राम मंदिर जरूर बनना चाहिये। इस देश की ये कैसी विडंबना है कि देश का आम आदमी कुचला जा रहा है महंगाई के बोझ तले औऱ सियासी पार्टियां हैं कि जातिगत और धर्मगत प्रधानमंत्री बनाने में लगी है। आखिर हमारे देश के राजनेता ये कब सोचेगे की देश में जानवरो से भी बत्तर जिंदगी जीने वाली एक नही बल्कि हजारो लाखों ऐसी बस्तिया भी है जिन में लोगो के पास खाने के लिये रोटी पहनने के लिये कपडा और सर छुपाने के लिये घर मय्यसर नही है। आज मंहगाई आम आदमी को जिस दोराहे पर लेकर आ चुकी है कहते हुए शर्म आती है कि आज अपने बच्चो को दो वक्त की रोटी देने के लिये कुछ लोग चोरी, राहजनी, डकैती, करने के साथ ही अपना खून और तन तक बेचने के लिये मजबूर हो गये है। ऐसे देश का आने वाला वक्त क्या होगा कहना बडा मुश्किल लग रहा है। कई सालो से दलगत, जाति और धर्म पर आधारित राजनीति और दागी लोगो के राजनीति में प्रवेश करने से जितना नुकसान देश को हुआ है उस की भरपाई आने वाले दिनो में होगी ऐसा दूर दूर तक भी नजर नही आ रहा है।


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