लेखक परिचय

राजेश करमहे

राजेश करमहे

काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर एवं हैदराबाद विश्वविद्यालय से पी जी डिप्लोमा इन लाईब्रेरी ऑटोमेशन के पश्चात् आकाशवाणी मे कार्यरत| १९९६ में आकाशवाणी वार्षिक पुरस्कार में मेरिट सर्टीफिकेट| पठन-पाठन एवं आध्यात्म में रूचि|

Posted On by &filed under लेख.


राजेश करमहे

वर्ष, मास, दिन का नामकरण :

किस्सा है कि Xells D’Olibi नाम का एक समुद्री लुटेरा हुआ करता था| जो उसकी बातें नहीं सुनते थे वह उसके कान [ear] काट दिया करता था और चिल्लाता था, “another year gone”| कहते हैं कि अपने जीवन काल में उसने 200 ईयर काटे| सचमुच जो समय या year की नहीं सुनता है, उसका ear तो कटता ही है| कहा गया है – Don’t kill your time or the time will kill you.

अपने देश में लोग वर्षा के बाद परदेश कमाने जाते थे फिर वर्षा के पहले लौट आते थे, सो वर्षा से वर्षा पर्यन्त एक वर्ष हो गया| विरहिनियाँ गाती थीं – सावन के झूले पड़े…, घर आ जा परदेशी…, इत्यादि|

साल के वृक्षों में एक वर्ष में एक नया रिंग बन जाता है अतः साल वर्ष का पर्यायवाची बन गया|

Moon के कला के क्रमिक उदय से अस्त तक का समय 1st, 2nd, 3rd, 4 +th, 5 +th, ……,29 +thttth, month [mon + th] हुआ| अमावस से अ और व हटा, मास बन गया|

रवि, चन्द्र, मंगल ….. आदि सात ग्रह का सप्ताह बना, जिसे पश्चिम में ग्रहों का 7 दिन बाद जागना कहा गया – 7 days awake और 7 days a week बन गया|

The ray यानी प्रकाश से day बना और जब no light तब night कहलाया| दन- दन समय का पहिया घूमा, जिसे हमने दिन कहा और जब पश्चिम देशों में रे यानी प्रकाश हुआ तब हमारे यहाँ रे की जगह रात्र हुआ|

 

महीनों का नामकरण :

जनवरी : प्रवेशद्वार एवं दिन प्रवेश के रोमन देवता जेनस के नाम पर| यह रोमन देवता अपोलो [सूर्य] के पुत्र थे| कहा जाता है कि इनका आगे और पीछे दोनों तरफ मुख था और यह अतीत एवं भविष्य दोनों देख सकते थे|

फरवरी : पहले यह अंतिम माह हुआ करता था| यह नाम लैटिन शब्द ‘februare’ से बना है, जिसका अर्थ होता है – ‘शुद्ध करना’| यह माह रोम में शुद्धि के पर्व का द्योतक था|

मार्च : यह माह पहले वर्ष का पहला माह हुआ करता था और इसका नामकरण युद्ध के देवता मार्स या मंगल के नाम पर आधारित था| मार्स देवताओं के राजा जुपिटर या बृहस्पति एवं रानी जूनो के पुत्र थे| इनके रथ की सारथी युद्ध की रोमन देवी बेलोना थी| सौंदर्य की रोमन देवी वीनस या शुक्र इनसे प्रेम करती थीं|

अप्रैल : अप्रैल माह सुंदरता की देवी वीनस को समर्पित है| इसका नामकरण ‘Aphrilis’ शब्द से हुआ माना जाता है, जो यूनानी या ग्रीक शब्द ‘Aphrodite’ से जन्मा है और इसका अर्थ है – कामवर्धक|

मई : यह माह मरकरी या बुध की माता मैया जो भूमि की देवी थीं, के नाम पर है| वह एटलस की सात बेटियों में से एक थीं|

जून : यह महीना विवाह की रोमन देवी जूनो जो देवताओं के राजा जुपिटर की पत्नी भी थीं, के नाम पर है| कहा जाता है कि जब यह आकाश में कहीं जाती थीं तो इनसे पहले इनका दूत आयरिस या इन्द्रधनुष रहता था फलतः यह दिखाई नहीं देती थीं| इनके जाने के बाद केवल इनका चमकदार वस्त्र दिखता था|

जुलाई : यह माह प्रथम रोमन सम्राट जूलियस सीज़र के नाम पर है| पहले यह माह ‘Quintilis’ या पाँचवां माह कहलाता था| सीज़र का जन्मदिन इसी महीने में पड़ता था|

अगस्त : यह माह रोमन सम्राट अगस्टस सीज़र को समर्पित है| पहले यह ‘Sextilis’ या छठे माह के रूप में जाना जाता था|

सितम्बर : ‘septa’ अर्थात् सातवें माह का द्योतक|

अक्टूबर : ‘octa’ अर्थात् आठवें माह का द्योतक|

नवम्बर : ‘Nona’ अर्थात् नवें माह का द्योतक|

दिसम्बर : ‘Deca’ अर्थात् दसवें माह का द्योतक|

 

दिनों का नामकरण :

संडे : सूर्य या रवि या ‘Sun’ पर|

मंडे : चन्द्र या सोम या ‘Moon’ पर|

ट्यूसडे : एंग्लो-सैक्सन युद्ध के देवता ‘Tiu’ या मंगल के नाम पर|

वेन्सडे : बुध के सदृश देवता ‘Woden’ के नाम पर|

थर्सडे : बृहस्पति के सदृश देवता ‘Thor’ या थंडरर के नाम पर|

फ्राइडे : एंग्लो-सैक्सन प्रेम की देवी ‘Freya’ या शुक्र के नाम पर|

सैटरडे : रोमन देवता सैटर्न या शनि के नाम पर|

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz