लेखक परिचय

हिमांशु शेखर

हिमांशु शेखर

हिमांशु शेखर आईआईएमसी से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं. लेकिन वे सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कर रहे बल्कि एक सक्रिय पत्रकार की तरह कई अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन भी कर रहे हैं. इतना ही नहीं पढ़ाई और लिखाई के साथ-साथ मीडिया में सार्थक हस्तक्षेप के लिए मीडिया स्कैन नामक मासिक का संपादन भी कर रहे हैं.

Posted On by &filed under प्रवक्ता न्यूज़.


एलाइड निप्पन मामले में मजदूर संगठन हुए लामबंद, उद्यमी संगठनों से टकराव के आसार

साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में ब्रेक शू बनाने वाली कंपनी एलाइड निप्पन के सहायक महाप्रबंधक जोगिंदर चौधरी की हत्या के मामले में औद्योगिक संगठनों के लामबंद होने के बाद अब मजदूर संगठन भी लामबंद होने लगे हैं। भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के आह्वान पर गुरुवार को गाजियाबाद में क्षेत्र के सभी प्रमुख मजदूर संगठनों की बैठक होने वाली है।

लखनऊ तक पहुंचेगी आंदोलन की आंच
सीटू के गाजियाबाद जिला सचिव जे.पी. शुक्ला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस बैठक में सभी मजदूर संगठन आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। जिला प्रशासन की निगरानी में मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया चलने के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने 30 लोगों को नोटिस भेज दिया है। बातचीत और बर्खास्तगी एक साथ नहीं चल सकती है।’
उन्होंने बताया कि इस बैठक में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) जैसे मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। शुक्ला ने बताया कि अभी यह प्रस्ताव आ रहा है कि 25 नवंबर को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाए और बाद में लखनऊ तक इस मामले को ले जाया जाए लेकिन इस पर अंतिम फैसला गुरुवार की बैठक में अन्य संगठनों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

कंपनी अनभिज्ञ, प्रशासन से आस
मजदूर संगठनों की लामबंदी से अनभिज्ञता जताते हुए एलाइड निप्पन के उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) महेंद्र सिंह चौधरी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमें ऐसी किसी बैठक की अब तक कोई सूचना नहीं मिली है। हम तो इस दिशा में कोशिश कर रहे हैं कि स्थिति सामान्य हो और सारे मजदूर काम पर वापस आएं। पर अगर उनकी तरफ से इस मामले को आगे बढ़ाया जा रहा है तो हम इसमें क्या कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमें प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार पर पूरा भरोसा है और हमें उम्मीद है कि स्थिति सामान्य होगी। अगर प्रशासन इस विवाद को खत्म नहीं कर पाएगा तो हमें साफ बता दिया जाए। ऐसे में हमारे लिए कारोबार समेटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।’ उन्होंने बताया कि कारखाना दोबारा खुलने के दूसरे दिन काम पर आए मजदूरों की संख्या बढ़कर तकरीबन 250 पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को तकरीबन 200 मजदूर काम पर आए थे।

चुप नहीं बैठेगा उद्योग जगत भी
इंप्लायर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईएफआई) का कहना है कि अगर मजदूर संगठनों की तरफ से दबाव की राजनीति होती है तो उद्योग जगत भी चुप नहीं बैठेगा और समुचित मंच पर उद्योग जगत के सुरक्षा व्यवस्था का सवाल उठाया जाएगा। ईएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि विग ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस तरह की लामबंदी से उद्योग जगत और अंतत: देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। हम इस मसले को 23 और 24 नवंबर को होने वाले भारतीय श्रम सम्मेलन में उठाने वाले हैं। अगर मजदूर संगठन लामबंद होकर उद्योग जगत के लिए औद्योगिक इकाइयों को चलाने की राह में रोड़ा अटकाते हैं तो विभिन्न उद्योग संगठनों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।’

मजदूरों ने सुनाई अलग ही दास्तां
एलाइड निप्पन ने जिन मजदूरों को नोटिस भेजा है, वे कुछ अलग ही कहानी बयां करते हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हरीशंकर पिछले 20 साल से कंपनी में काम कर रहे हैं। प्रबंधन ने उन्हें भी नोटिस भेज दिया है। उनका कहना है, ‘जब से नया प्रबंधन आया तब से कंपनी में सारी दिक्कतें शुरू हो गईं। उत्पादन भी घट गया। मैं जिस विभाग में काम करता हूं, उस विभाग में हर रोज 60,000 ब्रेक शू की गुणवत्ता की जांच होती थी पर नए प्रबंधन के आने के बाद यह संख्या घटकर 40,000 पर पहुंच गई।’
उत्तराखंड के एक छोटे से गांव से आकर कंपनी में पिछले 22 साल से नियमित कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले जसवंत रावत ने बताया, ‘नियमित और ठेके पर काम करने वाले मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी में भारी अंतर है। ठेके पर काम करने वाले एक सामान्य मजदूर को 3,000 से 3,200 रुपये हर महीने मिलते हैं लेकिन नियमित मजदूरों को औसतन 10,000 से 12,000 रुपये मिलते हैं। कंपनी प्रबंधन नियमित मजदूरों को निकालकर कम पैसे में अपना काम करवाना चाह रहे थे।’
उत्तराखंड के ही एस.पी. नेगी पिछले 19 साल से इस कंपनी को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शनिवार को जब कंपनी में हंगामा हुआ तो नेगी उस वक्त वहीं मौजूद थे। उन्होंने बताया, ‘दो मजदूरों को ऐसी मशीन पर लगाया जा रहा था, जिसे वे चलाना भी नहीं जानते थे। उन दोनों मजदूरों ने इसका विरोध किया और बाकी मजदूरों ने भी उनका साथ दिया। इसके बाद अचानक जोगिंदर चौधरी और कंपनी के प्रबंधक (मानव संसाधन) आर.के. सिंह कुछ हथियारबंद लोगों के साथ पहुंच गए और हवा में गोली चला दी।’ उसके बाद मची भगदड़ में नेगी को भी चोट आई है और उनके पैर में चोट के निशान अब भी हैं।

यूनियन के खात्मे के लिए आए थे चौधरी!
इन मजदूरों ने बताया कि जोगिंदर चौधरी ने उस वक्त 12 गोलियां चलाईं और आर.के. सिंह ने 6 गोलियां चलाईं और इसमें कुछ गोलियां कुछ मजदूरों को छूकर निकल गईं। हालांकि, कंपनी प्रबंधन इस बात से इनकार करता है। हरीशंकर ने बताया कि चमन सिंह सोलंकी, ब्रजेश कुमार और गणेशदत्त जोशी को गोली छूकर निकल गई। शुक्ला ने बताया कि जब मजदूरों ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की तो स्थानीय प्रशासन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। मजदूरों ने जोगिंदर चौधरी के बारे में यह भी बताया कि वह एलाइड निप्पन के अलावा एक और कंपनी में काम करते थे और उन्हें खास तौर पर कंपनी के मजदूर यूनियन को खत्म करने के लिए लाया गया था। इन मजदूरों ने यह भी कहा कि चौधरी ने यहां आने से पहले भी कई कंपनियों में मजदूर यूनियन को खत्म किया था।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz