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नमाज को जाति, पंथ और मजहब के आधार पर बांटने वाले लोग योग में विश्वास नहीं कर सकते-योगी आदित्यनाथ

नमाज को जाति, पंथ और मजहब के आधार पर बांटने वाले लोग योग में विश्वास नहीं कर सकते-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी  ने नमाज और योग की मिलती-जुलती मुद्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग नमाज को जाति, पंथ और मजहब के आधार पर बांटते हैं  वो योग में विश्वास नहीं कर सकते।

योगी ने यहां पतंजलि योगपीठ तथा कुछ अन्य संगठनों के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय ‘योग महोत्सव’ में कहा, ‘‘केन्द्र सरकार का आयुष मंत्रालय भी प्रदेश के हर जिले में ऐसा योग महोत्सव मनाने और सहभागिता सुनिश्चित करने को तैयार है, अन्यथा इस तरह के कार्यक्रम तो भारत में साम्प्रदायिक माने जाते थे। वर्ष 2014 के पहले अगर किसी व्यक्ति ने केन्द्र सरकार के सामने योग महोत्सव का प्रस्ताव रखा होता तो उसे साम्प्रदायिक कहकर हटा दिया जाता।’’ उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर देते हुए कहा, ‘‘हम सबको तय करना होगा कि वास्तव में साम्प्रदायिक कौन है। हम सूर्य नमस्कार करते हैं। उसमें जितने आसन आते हैं, जितनी मुद्राएं आती है, उसमें प्राणायाम की जो क्रियाएं हैं..उसे देखें तो हमारे मुस्लिम बंधु जो नमाज पढ़ते हैं, वे उससे कितनी मिलती-जुलती हैं। एक-दूसरे के साथ कितना बेहतर समन्वय है लेकिन कभी उसको जोड़ने का प्रयास नहीं किया गया।’’ योगी ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ‘‘कुछ लोगों को योग में नहीं भोग में विश्वास है। स्वाभाविक रूप से वे योग में विश्वास कैसे कर सकते हैं। जिन्होंने नमाज को तोड़ा है, जाति, पंथ, मजहब के आधार पर बांटा है, वे कैसे योग में विश्वास कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि अनुशासन आत्मा को साधने के लिये होता है। आत्मानुशासन के लिये सबसे बड़ी युक्ति योग है। योग को हमें जन-जन तक पहुंचाना होगा। योग हर व्यक्ति कर सकता है, उसका लाभ ले सकता है, उसकी आध्यात्मिक अनुभूति का एहसास कर सकता है।

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