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पांच धुर जमीन के लिए युवक को किया आग के हवाले -बिहार के दरभंगा मे लहेरियासराय टावर चौक स्थित स्वईट होम के पास शनिवार को भूमि विवाद में मनोज कुमार चौधरी के शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। लपटें इतनी तेज थी कि जान बचाने के लिए मनोज जान भागता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। आखिरकार उसने सड़क पर जमे बारिश के पानी व कीचड़ में लेटकर कई पलटी मारी। इसके बाद आग बुझी। इसके बाद कई दुकानदारों ने उसके शरीर पर से कपड़े निकाले और पानी डाला। फिर डीएमसीएच में भर्ती कराया। गंभीर स्थिति को देखते हुए देर शाम पीएमसीएच रेफर कर दिया गया।बहादुरपुर थाना क्षेत्र के कबिलपुर गांव निवासी कृष्णकांत चौधरी व कैलाश प्रसाद गुप्ता के बीच पांच धुर जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद है। कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया था। लेकिन, कैलाश प्रसाद गुप्ता ने 12 मार्च की रात दुकान का गेट तोड़कर हटा दिया और चहारदीवारी कर ली। इसको लेकर विवाद बढ़ा। 16 मार्च को कृष्णकांत चौधरी ने लहेरियासराय थाने में जाकर शिकायत की। शनिवार को कृष्णकांत चौधरी के पुत्र मनोज दो मजदूरों को लेकर चहारदीवारी तोडऩे पहुंचे। कैलाश प्रसाद गुप्ता, उसकी पत्नी चंदा देवी, पुत्र प्रदीप, प्रवीण व गौरव ने विरोध किया। इसी दौरान पिटाई के बाद मनोज के शरीर पर पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी। इलाज के दौड़ान उनकी मौत हो गई।इस घटना के बाद लोगों मे आक्रोश है, कई सामाजिक संगठनों ने ,पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बंद का आयोजन किया बंद का व्यापक असर शुक्रवार को देखा गया ।

दरभंगा में बंद समर्थकों की मांग पर अमल करते हुए एसएसपी सत्यवीर सिंह ने थानाध्यक्ष डीएन मंडल को ससपेंड कर दिया है। साथ ही दो सदस्यीय जांच टीम बनाकर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगा है।

पांच धुर जमीन के लिए युवक को किया आग के हवाले

एसएसपी ने लोगों को आश्वासन दिया कि किसी भी कीमत पर दोषियों को नहीं बक्शा जाएगा। जो भी दोषी पाए जाएंगे उसे सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। बताते चले कि मिथिला स्टूडेंट यूनियन, मिथिला राज्य निर्माण सेना सहित अन्य संगठनों द्वारा आहूत दरभंगा बंद का आयोजन किया गया था । जगह-जगह बंद समर्थकों के साथ साथ आम लोग भी इस बंद को सफल बनाने में अपनी मदद दे रहे थे। वहीं इस बंद के आयोजक संगठन मिथिला स्टूडेंट यूनियन का कहना हैं की हम मौन नहीं रहेंगे मनोज चौधरी को इंसाफ चाहिए, दरभंगा पेट्रोल कांड के दोषियों को फांसी की सजा मिले, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 50 लाख का मुआवजा मिले

 

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