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1273351_origमैं पत्थर पर लकीर खींचना जानता हूं: मोदी
सियोल,18 मई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के दो दिवसीय दौरे पर आज यहां राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात की एक तस्वीर प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्विटर पर साझा की। इस मुलाकात में उनके बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर वार्ता के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए।मोदी तीन देशों की यात्रा के अपने अंतिम पड़ाव में आज सुबह सियोल पहुंचे। यहां उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ भव्य स्वागत किया गया। वह चीन और मंगोलिया की यात्रा के बाद दक्षिण कोरिया पहुंचे हैं।दक्षिण कोरिया पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ‘सियोल राष्ट्रीय शहीदस्थल’ पहुंचे और बहादुरों की स्मृति में सम्मान स्वरूप पुष्पांजलि अर्पित किए। उन्होंने सियोल में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित भी किया। इस कार्यक्रम में लगभग 1,500 लोग मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत नमस्ते से की, इस पर वहां मौजूद भारतीयों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।दक्षिण कोरिया में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रति दुनिया का नजरिया बदला और मैं पत्थर पर लकीर खींचना जानता हूं। उन्होंने कहा कि 30 साल पहले का कोरिया अलग था। 80-90 साल पहले टैगोर ने देखा था कि कोरिया लैंप ऑफ ईस्ट है। यहां की जनता ने रवींद्रनाथ टैगोर की बात को सही साबित किया।मोदी ने कहा कि सवा सौ करोड़ देशवासी तक यह सोच पहुंचाना और लोगों को जोड़ने का काम कठिन है। मैं उनमें से नहीं जो मक्खन पर लकीर खींचता हूं। रास्ता कठिन है, लेकिन मैंने भारत की समस्याओं के समाधान का रास्ता सोच लिया है। गरीब से गरीब परिवार में शिक्षा पहुंचानी है, घर देना है, विकास के बिना कुछ भी संभव नहीं।
उन्होंने कहा कि मेरी विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ है। पहले था, लुक ईस्ट पॉलिसी। अब हम देख रहे हैं कि यह भू-भाग तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत के संबंध में 21वीं सदी के प्रारंभ में वही बातें कहीं जाती थीं। अब हिंदुस्तान का सूर्योदय हो चुका है और वह विश्व में अहम भूमिका निभाएगा।दुनिया को लगने लगा है कि ‘आई’ के बिना ब्रिक्स संभव नहीं होगा। जितनी भी ग्लोबल रेटिंग एजेंसी हैं, सबने पिछले दो-तीन महीनों में अलग-अलग कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। 21वीं सदी एशिया की सदी बनके रहेगी। कोरिया में बहुत कम भारतीय हैं, लेकिन यहां का उत्साह बताता है कि आपने जो कोरिया में देखा वह आप भारत में देखना चाहते हैं। इसमें आपके सहयोग की जरूरत है। आपका अनुभव और आपका ज्ञान वहां काम आएगा। इसे भारत से जोड़िए। कुछ समय पहले लोग कह रहे थे कि भारत में अब व्यापार नहीं करना है। सच्चाई यही है, लोग निराश थे, लेकिन अब वक्त बदल रहा है। बेशक, तमाम लोग विदेशों में बड़ी कमाई कर रहे हों, लेकिन अब लोग भारत आना चाहते हैं, भले ही कमाई कम क्यों न हो।मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों को विदेशी धरती पर देश के इतिहास और संस्कृति का वास्तविक राजदूत बताया। भारत और कोरिया के पुराने रिश्तों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कोरिया के प्रख्यात राजा सूरो का जिक्र किया जिनके बारे में समझा जाता है कि इनका कई शताब्दी पहले अयोध्या की राजकुमारी से विवाह हुआ था। उन्होंने कहा कि सरकार देश नहीं होता, मोदी देश नहीं होता, सवा सौ करोड़ देशवासियों का जज्बा देश होता है। तमाम लोग भारत से नाता रख कर खुशी महसूस करते हैं।भारत ने अपनी विकास यात्रा का रास्ता चुन लिया है। समस्या हर किसी को होती है। कोरिया में समस्या नहीं है क्या, लेकिन जब देश समस्या कासमाधान खोजते हैं और हिम्मत से चलते हैं तो समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने कहा चीन के आगे बढ़ने का कारण भी था। 30 साल तक चीन की विकास दर 9-10 प्रतिशत रहा। इसलिए पूरा चीन बदला है।

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