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poorvottarदेश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में फैले उग्रवादियों पर काबू पाने में केंद्र सरकार को एक बड़ी कामयाबी मिल सकती है।  इसकी शुरुआत त्रिपुरा के एक उग्रवादी संगठन के आत्मसमर्पण से हो सकती है।  पूर्वोत्तर में उग्रवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले त्रिपुरा के नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा (एनएलएफटी) के नेताओं से हाल ही में आत्मसमर्पण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार बैठक में आत्मसमर्पण को लेकर और उसके बाद किस तरह के कदम उठाये जाए उस पर विचार किया गया। गत 2 जुलाई को इस सम्बन्ध में दिल्ली में हुई त्रिपक्षीय बैठक में केंद्र ,राज्य और एनएलएफटी ने भाग लिया।

एनएलएफटी के आत्मसमर्पण की संभावना के घटनाक्रम का अभी खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि, उग्रवादी संगठन ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार अगर उनकी मांगे मानने को तैयार है तो वे आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है। उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण करने की इच्छा जाहिर की है लेकिन अभी तक उनकी मांगों को लेकर कोई स्पस्ट बयान नहीं आया है।

विदित हो कि दिल्ली में आयोजित बैठक से पहले केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और एनएलएफटी के नेताओं के अधिकारियों के बीच एक त्रिपक्षीय प्राथमिक बैठक शिलांग में गत दो अप्रैल को आयोजित किया गया था।बैठक में त्रिपुरा सरकार की ओर से पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के. नागराज और त्रिपुरा आदिवासी जानजाति कल्याण विभाग के सचिव एल. डार्लोंग के बीच आयोजित की गई थी जिसमे केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय के अधिकारी और तीन एनएलएफटी के नेता शामिल थे। एनएलएफटी का गठन बिस्वमोहन देबबर्मा की अध्यक्षता में मार्च 1989 में गठन किया गया था। हाल ही के दिनों में कई एनएलएफटी उग्रवादि अपने शिविरों से भाग कर पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण ले रहे है और कुछ आतंकी राज्य सरकार के समक्ष पहले ही समर्पण कर चुके है।

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