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Gupta-Coal_jpg_1493127fतत्कालीन कोयला सचिव पर तथ्य छुपाने, साजिश रचने का आरोप
नई दिल्ली, । कोयला घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई टीम ने अदालत में आज खुलासा किया । टीम के मुताबिक तत्कालीन कोयला सचिव एच.सी.गुप्ता ने झारखंड के राझरा कस्बा स्थित कोयला ब्लॉक आवंटन मामले के तथ्य को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से छुपाए थे ।
सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वी.के.शर्मा ने आरोप तय होने के सिलसिले में बहस को आगे बढ़ाते हुए विशेष न्यायाधीश को कहा कि तत्कालीन कोयला सचिव गुप्ता ने विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लि. (वीआईएसयूएल) समेत झारखंड के राझरा उत्तरी कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह से तथ्य छुपा लिए थे । झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और अन्य के साथ मिलकर गुप्ता ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में वीआईएसयूएल को लाभ पहुंचाने के लिए आपराधिक साजिश रची । शर्मा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने वीआईएसयूएल के लिए नहीं, बल्कि राझरा उत्तर कोयला खदानों के लिए दो अन्य कंपनियों की सिफारिश भी की थी । लेकिन गुप्ता ने मनमोहन सिंह को भेजी गई फाइल में इस बात की जानकारी नहीं दी थी । यहां तक कि इस्पात मंत्रालय ने कोयला ब्लॉक के लिए वीआईएसयूएल के नाम की भी सिफारिश नहीं की ।
सीबीआई ने आगे कहा है कि इस्पात मंत्रालय ने भी शुरूआत में वीआईएसयूएल के नाम की सिफारिश नहीं की थी, लेकिन बाद में झारखंड के पूर्व कोयला सचिव ए.के. बसु ने जांच समिति के बैठक में कंपनी के नाम पर जोर डाला । वहीं तत्कालीन कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता ने सीबीआई के आरोपों को बेबुनियाद बताया और वीआईएसयूएल कंपनी को कोयला ब्लॉक आवंटन के लिये पूरी तरह से योग्य ठहराया है ।
सीबीआई और गुप्ता की दलील सुनने के बाद अदालत ने स्पष्टीकरण के लिए मामले को 30 जून तक के लिए स्थगित कर दिया । गौरतलब है कि तत्कालीन कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता ने बुधवार को कहा था कि कोयला ब्लॉक आवंटन पर अंतिम फैसला तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था ।

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