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kailash1_bigकैलाश मानसरोवर का पहला जत्था रवाना
नई दिल्ली ,। ” हर हर शंकर , जय जय शंकर” के धर्मघोष के साथ विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने आज कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले जत्थे को यहाँ से रवाना किया। 58 यात्रियों वाला यह पहला जत्था लिपुलेक के पुराने मार्ग से कैलाश मानसरोवर जाएगा। इस मार्ग से कुल 18 जत्थे जाने हैं जिनमें से प्रत्येक में 60 यात्री होंगे। यह यात्रा मार्ग उत्तराखंड से चीन के तिब्बत में प्रवेश करेगा और लगभग पूरा यात्रा मार्ग पैदल चल कर तय किया जाएगा।
श्रीमती स्वराज ने कहाकि पिछले वर्ष उन्होंने वायदा किया था कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम में नाथुला होकर एक वैकल्पिक मार्ग खोला जाएगा। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी नेताओं के बीच वार्ता के बाद यह वायदा पूरा कर दिया गया है। इस वर्ष नाथुला होकर से श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर जा सकेंगे। यह पूरा यात्रा मार्ग वाहनों से तय किया जा सकता है तथा यह शारीरिक रूप से अशक्त और वृद्धजनों के लिए बहुत सुविधाजनक होगा। इस यात्रा मार्ग से इस बार 5 बैचों में पचास पचास यात्री जायेंगे। यात्री सड़क मार्ग से कैलाश पर्वत के एकदम समीप पहुँच सकेंगे। यहाँ पर परिक्रमा के लिए उन्हें तीन किमी पैदल चलना होगा। उन्होंने कहाकि पुराने मार्ग से पैदल चल कर कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को तीन फायदे हो सकते हैं। ये यात्री ट्रेकिंग का आनंद उठाने के साथ साथ प्रकृति के सौंदर्य का भी रसास्वादन कर सकेंगे। तीर्थ यात्रा से उनकी धार्मिक आस्था तो पूरी होगी ही।विदेशमंत्री ने कहाकि इस बार यात्रियों की सुविधा के लिए ‘ वॉयस रिस्पांस सिस्टम ‘ प्रणाली स्थापित की जा रही जिसके जरिये यात्री यात्रा आयोजकों के साथ संपर्क में रह सकेंगे।

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