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उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2002 के सनसनीखेज बिलकिस बानो मामले में एक आईपीएस अधिकारी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से आज इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने की कोई तात्कालिकता नहीं है क्योंकि दोषी अधिकारी पहले ही सजा काट चुका है।

पीठ ने आईपीएस अधिकारी की याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

गुजरात में सेवाएं दे रहे आईपीएस अधिकारी आर एस भगोरा और चार अन्य पुलिसकर्मियों को निचली अदालत ने दोषमुक्त करार दिया था लेकिन हाल में बंबई उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी करार दिया था।

भगोरा की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है तो सेवा के नियमानुसार उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि न्यायालय को दोषसिद्धि पर रोक लगानी चाहिए।

बंबई उच्च न्यायालय ने चार मई को निचली अदालत के आदेश को पलट दिया था। निचली अदालत ने बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में 11 लोगों :एक दोषी की मौत हो चुकी है: को दोषी करार दिया था और भगोरा एवं अन्य को दोषमुक्त करार दिया था।

उच्च न्यायालय ने पांच पुलिसकर्मियों के अलावा दो चिकित्सकों को भी दोषी करार दिया था।

पीठ ने कहा था कि पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों समेत सात लोगों को भारतीय दंड संहिता की धारा 218 :अपने कर्तव्य का निवर्हन न करना: और धारा 201 :साक्ष्यों से छेड़छाड़: के तहत दोषी ठहराया जाता है।

न्यायालय ने बिलकिस बानो मामले में आईपीएस अधिकारी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से किया इनकार( Source – PTI )

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