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केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। जनरल प्रोवीडेंट फंड (GPF) से पैसा निकालने के नियमों को आसान बनाया गया है। कर्मचारी अब केवल 15 दिन के भीतर भुगतान हासिल करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा कर्मचारी अब 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद जीपीएफ से पैसा निकाल सकेंगे, पहले यह सीमा 15 साल थी।

कर्मचारी अपने जीपीएफ से किसी भी विषय और संस्‍थान में प्राइमरी, सेकेंडरी और उच्‍च शिक्षा के लिए पैसा निकाल सकते हैं। पहले सदस्‍यों को केवल हाईस्‍कूल से ऊपर की शिक्षा के लिए ही पैसा निकालने की अनुमति थी।

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने कहा है कि,

“अंशधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के निवारण के लिए नियमों में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं। हालांकि प्रावधान मोटे तौर पर प्रतिबंधात्मक ही रहते हैं। प्रावधानों में ढील और प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।”

नियमों में विभिन्‍न प्रावधानों पर पुर्नविचार किया गया और यह निर्णय लिया गया कि अब सदस्‍य अपनी, परिवार के सदस्‍य या आश्रितों की बीमारी के अलावा अपनी, परिवार के सदस्‍य या आश्रितों की सगाई, शादी, अंतिम संस्‍कार या अन्‍य समारोह के लिए भी जीपीएफ से पैसा निकाल सकेंगे।

बदले निमयों के तहत, 12 महीने के वेतन या कुल अंशदान की तीन चौथाई राशि, जो भी कम हो, के निकासी की अनुमति देने का फैसला किया गया है
बीमारी की स्थिति में 90 फीसदी तक पैसा निकालने की अनुमति होगी।
केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 10 साल की सेवा पूरी होने पर जीपीएफ से पैसा निकालने के पात्र होंगे।
उपभोक्‍ता टिकाऊ सामान खरीदने के लिए भी कर्मचारी जीपीएफ से पैसा निकाल सकेंगे।
मौजूदा नियमों में पैसा निकालने की अनुमति और भुगतान देने की कोई समय सीमा तय नहीं थी।
जीपीएफ से धन निकासी के आवेदन को मंजूरी व राशि के भुगतान के लिए अधिकतम 15 दिन की समयावधि तय की गई है।
बीमारी या अन्य आपात स्थिति में यह सीमा घटाकर सात दिन भी हो सकती है।
फिलहाल एक साल के भीतर सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को अपने जीपीएफ से 90 प्रतिशत तक राशि निकालने की अनुमति है।
इस अवधि को बढ़ाकर दो साल करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा मोटर कार, मोटर साइकिल, स्‍कूटर आदि खरीदने या इसके लिए पहले लिए गए ऋण को चुकाने के लिए भी जीपीएफ से पैसा निकाला जा सकेगा।

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