हिन्दी के प्रति लोगों में भावनात्मक संवेदना जरूरी : जयरामन

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हिन्दी, तमिल और संस्कृत के विद्वान डॉ. पी. जयरामन का कहना है कि समाज इस समय अंग्रेजी का बोलबाला है और उसे ही महिमामंडित किया जा रहा है लेकिन यदि हम चाहते हैं कि सामाजिक ,राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को स्वीकार किया जाये तो लोगों में इसके प्रति भावनात्मक संवेदना लाना बेहद जरूरी… Read more »