लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-क़ैस जौनपुरी-

poem

हां, हम समझ गए

क़ि कयामत आएगी

हमें आग में जलाएगी

हम डर गए

अब, बस करो ना

 

इतना ही कब्ज़े में रखना था

तो बनाया ही न होता

किसने कहा था, हमें बनाओ

खुराफ़ात तो आप ही को सूझी थी ना

अब भुगतो!

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