लेखक परिचय

एल. आर गान्धी

एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

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एल.आर.गाँधी

भ्रष्ट तंत्र से त्रस्त हरविंदर सिंह ने महंगाई के प्रतीक केंट्रीय खाद्य मंत्री के टेढ़े मुंह पर सपाट चांटा जड़ दिया.

शनिवार को हरविंदर दूरसंचार के पूर्व भ्रस्टाचार मंत्री सुखराम को भी चांटा रसीद कर चुके हैं. अब हरविंदर अपना तीसरा शिकार किस ‘सिक-यू-लायर भ्रष्ट नेता को बनाएँगे…महंगाई और भ्रष्टाचार से त्रस्त ‘ भारतियों’ को इंतज़ार रहेगा. आज नौंवी पातशाही गुरु तेगबहादुर जी का शहीदी दिवस है. … आज ही के दिन गुरु जी ने उस वक्त के हुक्मरान ज़ालिम मुगलों के अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की और मजलूमों की रक्षा के लिए कुर्बान हो गए. आज के हुक्मरानों के भ्रष्टाचार और महंगाई की मार से आज आम आदमी त्रस्त है . यह खतरे की एक घंटी है…. सभी राजनेता इस ‘काण्ड’ को कितना ही नकारें …मगर सब्र का बाँध टूट रहा है…भ्रत्सना करने से राजनैतिक जवाबदेही चुकने वाली नहीं… राजनेताओं की प्रतिक्रियाओं में ‘डर और पाप’ साफ़ झलक रहा है.

न क्षुधा सम: शत्रु … आचार्य चाणक्य ने ठीक ही कहा है … भूख के समान शत्रु नहीं…हमारे खाद्य मंत्री शरद पवार जी आज महंगाई और भूख का प्रतीक बन गए हैं… संचार मंत्रालय में २ जी के सबसे बड़े घोटाले के बाद पूर्व संचार मंत्री सुख राम ‘भ्रष्टाचार’ के ‘ रोल माडल ‘ के रूप में सामने आए हैं जिन पर पिछले १५ साल से कोई कार्यवाही नहीं की गई. अब भूख और भ्रष्टाचार से त्रस्त आम आदमी अपने गुस्से का इज़हार करेगा तो ‘गांधीजी के अनुयायियों ‘ को अपना दूसरा गाल भी तैयार रखना होगा ? Mark Twain had rightly said ‘ The lack of money is the root of all evil.

राज कुमार के अंग राक्षक भी अब चौकन्ने हो जायेंगे … अब वे राज कुमार को कार का शीशा नीचे कर किसी भिखारी से यह पूछने का रिस्क नहीं उठाने देंगे ‘ भैया आप किस प्रदेश से हो’. कब कोई भूखा- भिखारी ‘ अपना भिख्शा पात्र मुंह पर दे मारे तो ?…. पवार साहेब जी की महानता देखो ..वे तो थप्पड़ को चांटा मानने को ही तैयार नहीं !!!!

कांग्रेस अपने गिरेबान में अब भी झाँकने को तैयार नहीं लगती .. दोष बी.जे.पी नेता यशवंत सिन्हा पर मढ़ा जा रहा है जिन्होंने हाल ही में चेताया था की महंगाई -भ्रष्टाचार से त्रस्त लोग हिंसक हो सकते हैं.. हुक्मरानों को जनता के विश्व व्यापी मूड परिवर्तन को समझाना होगा … अरब क्रांति का सन्देश साफ़ है … त्रस्त भूखी,बीमार, लाचार जनता अब केवल मरेगी नहीं …..मारेगी भी !!!

तुमसे पहले जो यहाँ तख़्त नशीं था

उसको भी अपने खुदा होने पर इतना ही यकीं था.

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8 Comments on "अब शरद को चांटा"

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इक़बाल हिंदुस्तानी
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सरकार के मंुह पर थप्पड़! कमाल है। कहते हैं। हमारे देश में लोकतंत्र है। सुना है लोकतंत्र में सब बराबर होते हैं लेकिन यहां तो मंत्री लोग आज भी खुद को खुदा समझे बैठे हैं। आम आदमी कहीं भी कभी भी कुत्ते बिल्ली की मौत मारा जाता है तो कुछ नहीं और वह भूख से मर जाये तो कोई हंगामा नहीं होता। वह दवाई न मिलने से मर जाये तो कहीं कोई पत्ता नहीं खड़कता। उसको पुलिस पूछताछ के नाम पर थर्ड डिग्री देकर मार दे तो कोई बात नहीं। वह बेमौत दंगे में मारा जाये, सेना के लोग उसको… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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(१) किसी भी समस्या की ३ अवस्थाएँ मान सकते है| प्रथम, मध्यम और चरम | (२) और अनेक समस्याएँ पूरी प्रणाली में फैली हुयी( होती) है| कार्य कारण की कड़ियों का जाल भी सारे शासन-तंत्र और समाज में फैला हुआ है| (३) सारा का सारा, किसी एक सुधारसे सुधरने वाला नहीं| *इस सच्चाई को स्वीकार कर भी, इतना तो, निश्चित कहा जा सकता है. कि इस थप्पड़ को, एक संकेत के रूपमें स्वीकार करते हुए समस्या का हल ढूंढना चाहिए| (४) एक नहीं अनेक लेन-देन की गांठो में भ्रष्टाचार का जाल फैला हुआ है| (५) ऐसी समस्याओं की जड़ें भी… Read more »
डॉ. राजीव कुमार रावत
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डॉ राजीव कुमार रावत
+ आपको किसने परमिट दिया है साथियों के कपड़े फाड़ने का , पेपर एवं पेपरवैट फेंकने का, फाइले फाड़ने का , चेयर से पेपर छीन लेने का , कुर्सियां मेज माइक तोड़ने का– कितनी ही खूनी घटनाएं देश टीवी पर देख चुका सदनों के भीतर की —— फिर एक विवश ( शायद मानसिक रोगी ) के प्रति यह व्यवस्था इतनी निर्मम हो जाएगी कि शायद उसकी जान लेलेगी और हमारे मीडिया में एक छोटी सी खबर छपेगी फिर सब भूल जाएंगे- फिर भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में करोड़ों टन गेहूं सड़ेगा, चूहे और सूअर खाएंगे और देश में प्रतिदिना… Read more »
डॉ. राजीव कुमार रावत
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डॉ राजीव कुमार रावत
इस थप्पड़ की गूंज सुनी तुमने……. मैं व्यक्तिगत तौर पर इस घटना की निंदा करता हूं, किंतु आमजन की लाचारी का यह प्रतीकात्मक प्रतिरोध है आखिर बुरे से बुरे नेता को भी चुनते तो हम ही हैं ना– तो दोष किसका ? अगर यह माना जाए कि मंहगाई के लिए कोई एक व्यक्ति दोषी है तो वह अकेला तो नहीं होगा न, उसके साथ हमारे और भारतवासी भी होंगे न – क्या हमें अपने अपने गिरेबानों में नहीं झांकना चाहिए कि हम कितने ईमानदार हैं ? कितने विलासी हैं कितने फिजूलखर्ची हैं ? कितने भोगी हो गए हैं , हर… Read more »
सुशान्त सिंहल
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सरकारी चांटे का जवाब जनता का चांटा ही है। सरकार देश की जनता के मुंह पर हर रोज़ थप्पड़ मारती चली आ रही है। आज जनता में से एक व्यक्ति ने ज्यादा जोश में आकर एक भ्रष्ट वरिष्ठ नेता को झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया जिसकी गूंज वर्षों तक राजनैतिक गलियारों में बनी रहेगी। रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के अनुयाइयों को आधी रात को नींद में पी. चिदम्बरम ने दिल्ली पुलिस के सहारे पिटवाया था, उसके बाद भी वह आज देश के गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण आसन पर विराजमान हैं जबकि उस भ्रष्ट व्यक्ति की सही जगह तिहाड़ जेल में… Read more »
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