लेखक परिचय

संजय स्‍वदेश

संजय स्‍वदेश

बिहार के गोपालगंज में हथुआ के मूल निवासी। किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातकोत्तर। केंद्रीय हिंदी संस्थान के दिल्ली केंद्र से पत्रकारिता एवं अनुवाद में डिप्लोमा। अध्ययन काल से ही स्वतंत्र लेखन के साथ कैरियर की शुरूआत। आकाशवाणी के रिसर्च केंद्र में स्वतंत्र कार्य। अमर उजाला में प्रशिक्षु पत्रकार। दिल्ली से प्रकाशित दैनिक महामेधा से नौकरी। सहारा समय, हिन्दुस्तान, नवभारत टाईम्स के साथ कार्यअनुभव। 2006 में दैनिक भास्कर नागपुर से जुड़े। इन दिनों नागपुर से सच भी और साहस के साथ एक आंदोलन, बौद्धिक आजादी का दावा करने वाले सामाचार पत्र दैनिक १८५७ के मुख्य संवाददाता की भूमिका निभाने के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़ाव। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ लेखन कार्य।

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-संजय स्‍वदेश

नागपुर। गत शनिवार को शहर की बदनाम गली में 15 लड़कियों के साथ पकड़ी गई खुशबू (परिवर्तित नाम) अपने भाई रोहित की जिन्दगी बचाने के लिए नागपुर में 8 महीने से गंगा जमुना की कश्मीरी गली में जिस्म फरोशी का काम कर रही है। पकड़े जाने के बाद यह रहस्य खुशबू ने उजागर किया कि उसका छोटा भाई रोहित इन लोंगो (धंधा कराने वाले) के चंगुल में था। उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। अगर वह उनका कहना नहीं मानती तो वह अपना भाई हमेशा के लिए खो देती। खुशबू के माता-पिता पहले ही मर चुके हैं। खुशबू को मुंबई से लेने पुलिस के साथ उसका मौसा आया था। खुशबू का छोटा भाई रोहित भी अपने मौसा के साथ नागपुर आया। रोहित को दिल्ली में मीनाबाई के भाई के घर रखा गया था। मीनाबाई सतीश कर्मावत (40)कश्मीरी गली का एक ऐसा नाम हैं जहां गरीब मजबूर लड़कियों को खरीदकर उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे जिस्म फरोशी का धंधा कराया जाता है। मीनाबाई मूलत: आगरा की पिपरेटा खेडागर की रहने वाली है। मीना के साथ पुलिस ने अनारकली, कृष्णा, मुन्नीबाई टिकाराम कालफोर, रुखसाना, कश्मीरी बाई, आशा बाई, स्नेहल बुद्धम राऊत ने खुशबू को जबरन धंधे में उतारा था। पुलिस मीनाबाई के एक भाई की तलाश में आगरा भी गई थी। लेकिन वह वहां नहीं मिला।

मीनाबाई के घर से नागपुर क्राइम ब्रांच और लकडग़ंज पुलिस ने संयुक्त रुप से कार्रवाई कर लड़कियों को पकड़ा। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ग्राहक शैलेष मिलिन्द मेश्राम, आदाम इसा खान वर्धा तथा राकेश यादवराव राऊत को गिरफ्तार किया है।

मीनाबाई के घर से मिली लड़कियों में कई कम उम्र की लड़कियां भी हैं। मीनाबाई के पास खूशबू 8 महीने से है। पुलिस सूत्रों के अनुसार देह व्यापार का धंधा इतनी गहराई तक पैठ जमा चुका है कि एक धंधे वाला दूसरे धंधे वाले के पास अपनी लड़कियों को भेजता है और उसकी लड़कियों को अपने पास रखता है। इससे ग्राहकों को हर बार नई लड़की आई है का झांसा दिया जाता है। ग्राहक भी दलालों के झांसे में आ जाते हंै। नागपुर की गंगा जमुना में छापा मार कार्रवाई के दौरान खुशबू जब पुलिस के हाथ लगी तो एक ुपुलिसकर्मियों को उसने अपनी कहानी बताई कि उसे इस धंधे मेंं आखिर किस तरह ढकेल दिया गया। उस पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खुशबू मूलत: मुंबई की रहने वाली हैं। उसके माता-पिता की मौत के बाद छोटे भाई की जिम्मेदारी उस पर आ गई। वह कुछ गलत लोगों के चंगुल में फंस गई। उन लोगों ने उसके छोटे भाई रोहित को अगवा कर नई दिल्ली भेज दिया। खुशबू को धमकी दी गई कि अगर वह धंधा नहीं करेगी तो उसके भाई को मार दिया जाएगा। वह मजबूर हो गई। 8 महीने पहले उसे नागपुर की मीनाबाई के पास भेजा गया। उसे यकीन दिलाने के लिए कि उसका भाई जिन्दा है। रोहित से खुशबू की बात कराई जाती थी। खुशबू के मौसा को जब यह बात पता चली कि वह नागपुर में मीनाबाई के पास है तो वह मुंबई अपराध शाखा पुलिस की मदद ली। मुंबई पुलिस ने अपराध शाखा नागपुर पुलिस के फोन पर जानकारी दी कि मुंबई से एक लड़की को अगवा कर जिस्म फरोशी के धंधे में लगाया गया है। खुशबू की पहचान के लिए उसका मौसा भी मुंह पर कपड़ा बांधकर नागपुर की बदनाम गली में पुलिस के साथ पहुंचा। मीनाबाई के देहव्यापार अड्डे पर जब नागपुर क्राइम ब्रांच ने लकडग़ंज पुलिस के साथ छापा मारा तो वहां पर खुशबू भी मिली। उसके मौसा ने उसे पहचान लिया। इस घटना की खबर मिलने पर रोहित को मीनाबाई ने पकड़े जाने के डर से आजाद कर दिया। रविवार को रोहित भी नागपुर पहुंचा। खबर लिखे जाने तक रोहित लकडग़ंज थाने में थानेदार मकेश्वर के समक्ष था। थानेदार मकेश्वर यह सच जानने की कोशिश कर रहे थे कि खुशबू ने जो आपबीती जो बताई उसमें कितना सच और कितना झूठ है।

6 Responses to “भाई की जिंदगी के लिए बेचती रही जिस्म”

  1. juniad

    yeh story to abhay yadav ki hai jo dainik 1857 mein chap chuki hai ispe aapka naam kyun है और आपने यहाँ पोस्ट किसकी इजाज़त से किया hai

    Reply
  2. अनुज कुमार

    anuj kumar

    माननीय संम्पादक महोदय
    आपका धन्यवाद के आपने नारी की दशा को अन्य लेख में भी दर्शित किया है
    http://www.pravakta.com/?p=11024&cpage=1#comment-६७०२
    भाई की जिंदगी के लिए बेचती रही जिस्म

    -संजय स्‍वदेश

    नागपुर।

    गत शनिवार को शहर की बदनाम गली में 15 लड़कियों के साथ पकड़ी गई खुशबू (परिवर्तित नाम) अपने भाई रोहित की जिन्दगी बचाने के लिए नागपुर में 8 महीने से गंगा जमुना की कश्मीरी गली में जिस्म फरोशी का काम कर रही है। पकड़े जाने के बाद यह रहस्य खुशबू ने उजागर किया कि उसका छोटा भाई रोहित इन लोंगो (धंधा कराने वाले) के चंगुल में था। उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। अगर वह उनका कहना नहीं मानती तो वह अपना भाई हमेशा के लिए खो देती। खुशबू के माता-पिता पहले ही मर चुके हैं। खुशबू को मुंबई से लेने पुलिस के साथ उसका मौसा आया था। खुशबू का छोटा भाई रोहित भी अपने मौसा के साथ नागपुर आया। रोहित को दिल्ली में मीनाबाई के भाई के घर रखा गया था। मीनाबाई सतीश कर्मावत (40)कश्मीरी गली का एक ऐसा नाम हैं जहां गरीब मजबूर लड़कियों को खरीदकर उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे जिस्म फरोशी का धंधा कराया जाता है। मीनाबाई मूलत: आगरा की पिपरेटा खेडागर की रहने वाली है। मीना के साथ पुलिस ने अनारकली, कृष्णा, मुन्नीबाई टिकाराम कालफोर, रुखसाना, कश्मीरी बाई, आशा बाई, स्नेहल बुद्धम राऊत ने खुशबू को जबरन धंधे में उतारा था। पुलिस मीनाबाई के एक भाई की तलाश में आगरा भी गई थी। लेकिन वह वहां नहीं मिला।

    मीनाबाई के घर से नागपुर क्राइम ब्रांच और लकडग़ंज पुलिस ने संयुक्त रुप से कार्रवाई कर लड़कियों को पकड़ा। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ग्राहक शैलेष मिलिन्द मेश्राम, आदाम इसा खान वर्धा तथा राकेश यादवराव राऊत को गिरफ्तार किया है।

    मीनाबाई के घर से मिली लड़कियों में कई कम उम्र की लड़कियां भी हैं। मीनाबाई के पास खूशबू 8 महीने से है। पुलिस सूत्रों के अनुसार देह व्यापार का धंधा इतनी गहराई तक पैठ जमा चुका है कि एक धंधे वाला दूसरे धंधे वाले के पास अपनी लड़कियों को भेजता है और उसकी लड़कियों को अपने पास रखता है। इससे ग्राहकों को हर बार नई लड़की आई है का झांसा दिया जाता है। ग्राहक भी दलालों के झांसे में आ जाते हंै। नागपुर की गंगा जमुना में छापा मार कार्रवाई के दौरान खुशबू जब पुलिस के हाथ लगी तो एक ुपुलिसकर्मियों को उसने अपनी कहानी बताई कि उसे इस धंधे मेंं आखिर किस तरह ढकेल दिया गया। उस पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खुशबू मूलत: मुंबई की रहने वाली हैं। उसके माता-पिता की मौत के बाद छोटे भाई की जिम्मेदारी उस पर आ गई। वह कुछ गलत लोगों के चंगुल में फंस गई। उन लोगों ने उसके छोटे भाई रोहित को अगवा कर नई दिल्ली भेज दिया। खुशबू को धमकी दी गई कि अगर वह धंधा नहीं करेगी तो उसके भाई को मार दिया जाएगा। वह मजबूर हो गई। 8 महीने पहले उसे नागपुर की मीनाबाई के पास भेजा गया। उसे यकीन दिलाने के लिए कि उसका भाई जिन्दा है। रोहित से खुशबू की बात कराई जाती थी। खुशबू के मौसा को जब यह बात पता चली कि वह नागपुर में मीनाबाई के पास है तो वह मुंबई अपराध शाखा पुलिस की मदद ली। मुंबई पुलिस ने अपराध शाखा नागपुर पुलिस के फोन पर जानकारी दी कि मुंबई से एक लड़की को अगवा कर जिस्म फरोशी के धंधे में लगाया गया है। खुशबू की पहचान के लिए उसका मौसा भी मुंह पर कपड़ा बांधकर नागपुर की बदनाम गली में पुलिस के साथ पहुंचा। मीनाबाई के देहव्यापार अड्डे पर जब नागपुर क्राइम ब्रांच ने लकडग़ंज पुलिस के साथ छापा मारा तो वहां पर खुशबू भी मिली। उसके मौसा ने उसे पहचान लिया। इस घटना की खबर मिलने पर रोहित को मीनाबाई ने पकड़े जाने के डर से आजाद कर दिया। रविवार को रोहित भी नागपुर पहुंचा। खबर लिखे जाने तक रोहित लकडग़ंज थाने में थानेदार मकेश्वर के समक्ष था। थानेदार मकेश्वर यह सच जानने की कोशिश कर रहे थे कि खुशबू ने जो आपबीती जो बताई उसमें कितना सच और कितना झूठ है।
    उपरोक्त में देखने वाली बात ये है के हिंदुत्व के ठेकेदार यहीं से जन्म लेते हैं और देश को सुधारने नारी मुक्ति सम्मान का ठेका लेते हैं अपने शहर को घर को सुधर नहीं पाए ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है के हिन्दू धर्म में नारी का क्या हश्र हुआ है और क्या होने वाला है
    आपका अनुज

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    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

      विवेकानंद जी कहते हैं, कि हम सभी, (उसमें आप भी आते हैं) इस स्थितिके लिए जिम्मेदार हैं। समस्याएं सुलझाने के लिए कोई ठेकेदार नहीं हैं।कोइ किसी ठेकेदार को वेतन देता नहीं है। सारे अपना यथा शक्ति श्वेच्छांसे, योगदान करते हैं।
      आप यदि कहेंगे कि, समस्याएं हम सभीकी हैं, बहुत सारी हैं। आप सही हैं।
      कंधेसे कंधा लगा कर समस्याओंको जितना हो सके, सुलझानेका प्रयत्न करना हमारा काम है, आपका भी। बहुत सारे लोग दिन रात उसीमें लगे हैं। जो स्थिति है, आपके भी सामने हैं, हमारे भी सामने हैं। प्रयास कम पड रहा है, क्यों? क्यों कि हाथ बटानेवाले कम है। प्रश्न पूछनेवाले अधिक हैं।
      आप यदि केवल प्रश्न पूछेंगे, तो आप पराए हैं। आप भी इसी काम में अपने बन कर साथ दे, तो अपने हैं। पसंद आप करें। परायोंको उत्तर देने के लिए हम बाध्य नहीं हैं।

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  3. अनुज कुमार

    anuj kumar

    सरकार महिला सशक्तिकरण चिल्ला रही है मगर नारी की जी स्थिति है वो अभी भी शोचनीय है

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  4. deepak.mystical

    दीपक डुडेजा

    हर समस्या का निदान सरकार के पास नहीं है. सरकार के पास जो है – वो नहीं कर सकती. देह व्यापार – को कहीं न कहीं सामाजिक दर्ज़ा दिया जाना चाहिए. में ऐसा इसलिए कह रहा हूँ – जरूरी नहीं है हर शख्स का कोई साथी हो. परन्तु देह व्यापार में दलालों को सख्त सजा होने चाहिए. क्योंकि कर बाद कोई लड़की इस धंदे में आना भी नहीं चाहती , पर ये दलाल उसे किसी न किसी तरीके से घसीट लेते हैं.

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  5. sunil patel

    देह व्यापर आज की तारिख में बहुत बड़ा सामाजिक अभिशाप है. हर बड़े सहर में यह संगठित व्यवसाय है. छोटे सहर भी इनकी आंच से दूर नहीं है. सरकार चाहे तो हफ्तों नहीं दिनों में यह समस्या ख़त्म हो सकती है.

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