लेखक परिचय

अरूण पाण्डेय

अरूण पाण्डेय

मूलत: इलाहाबाद के रहने वाले श्री अरुण पाण्डेय अपनी पत्रकारिता की शुरुआत ‘दैनिक आज’ अखबार से की उसके बाद ‘यूनाइटेड भारत’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘देशबंधु’, ‘दैनिक जागरण’, ‘हरियाणा हरिटेज’ व ‘सच कहूँ’ जैसे तमाम प्रतिष्ठित एवं राष्ट्रीय अखबारों में बतौर संवाददाता व समाचार संपादक काम किया। वर्तमान में प्रवक्ता.कॉम में सम्पादन का कार्य देख रहे हैं।

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ek-saal-kejriwalगत दिनों केजरीवाल सरकार के एक साल पूरे हुए जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक दिन पहले केजरीवाल सरकार को नकारा साबित करने की कोशिश की। दिल्ली भाजपा ने कहा है कि विगत एक वर्ष दिल्ली के इतिहास का एक काला वर्ष साबित हुआ है।  15 वर्ष के कांग्रेस के भ्रष्ट शासन से त्रस्त दिल्ली की जनता ने गत वर्ष एक नया जनादेश दिया था और उन्हें एक परिवर्तन की उम्मीद थी, पर यह वर्ष विश्वासघात का वर्ष बन गया।  दिल्ली की जनता आज जब केजरीवाल सरकार के एक वर्ष का आंकलन करती है तो पूरी तरह हताशा दिखती है।  संवैधानिक संकटों को उत्पन्न करती सरकार ने दिल्ली के प्रशासन और विकास को ठप्प कर दिया है। उसने कहा कि दिल्ली के नगर निगमों को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए केजरीवाल सरकार द्वारा उत्पन्न आर्थिक संकट जिसके चलते दिल्ली की जनता को लगभग दो सप्ताह भारी संकट झेलना पड़ा, हम कड़ी निंदा करते हैं।इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने एक स्वतंत्र सर्वे और विभिन्न मीडिया सर्वे के आधार पर केजरीवाल सरकार के एक वर्ष के कार्य की समीक्षा कर उसका रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया।  इस अवसर पर पार्टी ने केजरीवाल सरकार के चुनाव घोषणा पत्र पर किये गये काम का आंकलन करते हुए एक बुकलेट जारी की जिसका शीर्षक है “केजरीवाल सरकार ने किया दिल्ली को निराश 70 वायदे.,70 धोखे।“तरूण चुघ एवं सरदार आर पी सिंह ने इस अवसर पर केजरीवाल सरकार की विफलताओं को जनता के बीच चर्चित करने के लिए पार्टी द्वारा निर्मित दो गानों का विमोचन किया।  उन्होंने केजरीवाल सरकार द्वारा सिखों से छलावे और जनता के पैसे को अपने राजनीतिक विकास पर खर्च करने की कड़ी निंदा भी की।लेकिन हुआ क्या ढाक के तीन पात , हाथी अपने रास्ते चलता गया और लोग भौंकते रहे।भाजपा की समझ में यह बात क्यों नही आती कि संविधान के प्रणेता डा0 बालासाहब भीमराव अम्बेडकर ने चुनी हुई सरकार को खत्म करने का अधिकार नही बनाया।  अगर एैसा होता तो पहले की सरकारें अपने कार्यकाल से पहले ही खत्म हो जाती। इस दौरान नेता विपक्ष गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार द्वारा संविधान एवं विधि द्वारा निश्चित कार्य प्रणालियों का पालन न करने के कारण आज दिल्ली एक संवैधानिक संकट में अटक गई है।  श्री रमेश बिधूड़ी ने केजरीवाल सरकार द्वारा अनधिकृत कालोनियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साथ किये जा रहे विश्वासघात पर वक्तव्य रखा और श्रीमती रेखा गुप्ता ने केजरीवाल सरकार द्वारा महिलाओं के साथ किये धोखे को उजागर किया।

 

इस पूरी कार्यशैली पर नजर डाले तो दिल्ली सरकार के पहले वर्ष की रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए सतीश उपाध्याय ने कहा कि हमारी महिला मोर्चा की कार्यकत्र्ताओं ने बहुत निष्पक्षता के साथ दिल्ली के बाजारों में, झुग्गी बस्तियों में, साप्ताहिक बाजारों में जाकर महिलाओं एवं युवाओं से सम्पर्क किया और सरकार के प्रति जनता की निराशा का जो भाव सामने आया वह चैकाने वाला है।  हमारे इस आंतरिक परन्तु पूर्णतः स्वतंत्र सर्वे में जो बातें सामने आईं उन्हें विगत तीन दिनों में विभिन्न टी.वी. चैनलों के सर्वे ने भी पुष्टि की है।  साधारणतः माने तो दिल्ली में अब हर पांच में तीन व्यक्ति केजरीवाल सरकार से हताश हो चुके हैं।सतीश उपाध्याय ने कहा कि जनता के आंकलन के आधार पर हम जब सरकार की रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हैं तो सरकार को 10 में से शून्य अंक ही दे पाते हैं।उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने जनता से अनेक वायदे किये थे और उन वायदों में प्रमुख थे आधे दाम की बिजली और सबको फ्री पानी, एक वर्ष बाद दिल्ली की जनता को बिजली पहले के ही दाम पर मिल रही है, हां यह जरूर है कि बिजली कम्पनियों को सब्सिडी खूब मिल रही है।  चाहे अनधिकृत कालोनियां हों या झुग्गी बस्तियां या गु्रप हाउसिंग सोसायटी या ग्रामीण अंचल या शहर की किसी भी कालोनी की बात करें कहीं भी पानी फ्री नहीं मिल रहा है।  फ्री पानी का लाभ शायद सरकार ही बता पाये कि समाज के किस वर्ग को मिल रहा है।  दिल्ली का निम्न आय वर्ग हो, मध्यम आय वर्ग हो या सम्पन्न वर्ग आज भी लोग मंहगे बिजली के बिल और भारी-भारी पानी के बिल को लेकर त्रस्त हैं। अब यहां सवाल यह उठता है कि केजरी वाल सरकार का इम्तहान लेने वाले वह होते कौन है। क्या केन्द्र ने उन्हें इसके लिये अधिकृत कर रखा है। नेता विपक्ष का पद भी उन्हें खैरात में मिला है और शैक्षिक योग्यता देखी जाय तो अध्यक्ष महोदय केजरीवाल के आस पास भी नही ठहरते । यह वही राजनीति है जो देश को आरक्षण के नाम पर अम्बेडकर दे गये है वरना भाजपा में और भी नेता है जो गर्दिशों में है लेकिन समय का इंतजार कर रहें है।

 

दिल्ली का युवा सरकार से पूरी तरह त्रस्त है क्योंकि फ्री वाई-फाई का वो वायदा जो केजरीवाल दल ने चुनाव में खूब बेचा था वह आज भी स्वपन ही बना है।  नये स्कूल और कालेज तो दूर पुराने स्कूलों में भी शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई ठप्प हो रही है।  शिक्षा लोन और कौशल योजनायें स्वपन ही बन कर रह गई हैं।  8 लाख रोजगारों का स्वपन दिखाने वाली सरकार ने पहले वर्ष में आम आदमी को 8 रोजगार भी नहीं दिये हाँ अपने वोलेन्टियरों की फौज को सरकार में मौटे वेतनों पर भर्ती कर लिया।उन्होने कहा कि भ्रष्टाचार, लोकपाल और स्वराज इन तीन शब्दों को चला-चला कर राजनीतिक शतरंज के खिलाड़ी बने अरविन्द केजरीवाल का भ्रष्टाचार के प्रति रवैया तो तभी स्पष्ट हो गया था जब सरकार द्वारा दिल्ली भर में लगाये झूठे आंकड़ों वाले बोर्डों का सच उजागर हुआ था और उसके बाद तो मानों एक के बाद एक मंत्रिओं और विधायकों के भ्रष्टाचार के किस्से सामने आते गये और मुख्यमंत्री की चुप्पी भ्रष्टाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पोल खोलती गई।  लोकपाल को जिस तरह केजरीवाल दल ने जोकपाल बनाया है उसे देखकर दिल्ली की जनता विस्मित है।  स्वराज का गाना गाने वालों ने जिस तरह स्वराज की पहली सीढ़ी नगर निगमों का गला घोटने का प्रयास किया वह स्वराज की भावना की हत्या से कम नहीं, हम सोच कर भी हतप्रभ रह जाते हैं कि स्वराज के प्रेरक महात्मा गांधी को इस सबको देखकर कितनी वेदना होती होगी। यहां यह बता देना उचित होगा कि जिस महात्मा गांधी की बात कर रहें है उनकी हत्या का इल्जाम आर एस एस पर है जिसकी भारतीय जनता पार्टी राजनैतिक ईकाई है।

 

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली का दलित विशेषकर बाल्मीकि समाज इस सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल के बाद शायद सबसे ज्यादा प्रताडि़त महसूस कर रहा है।  दिल्ली में सरकारी अस्थायी नौकरियों में सर्वाधिक दलित एवं बाल्मीकि समाजों के लोग हैं जो अपनी रात-दिन की मेहनत से दिल्ली को एक उत्कृष्ट शहर बनाकर रखते हैं।  चुनाव से पूर्व केजरीवाल दल ने इन सभी अस्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों विशेषकर सफाई कर्मचारियों को नियमित करने का वायदा किया था पर सत्ता में आते ही केजरीवाल सरकार ने सबसे पहले इन्हें ही प्रताडि़त करना शुरू किया।  इसकी हद तब आई जब 4 फरवरी, 2016 को केजरीवाल सरकार ने नगर निगमों को आदेश दिया कि सभी अस्थायी कर्मचारियों को तुरन्त सेवा मुक्त करने का प्लान शुरू किया जाये। दिल्ली के अस्थायी शिक्षक हों या डी.टी.सी. कर्मी सभी आज एक वर्ष बाद भी आंदोलनरत हैं। दिल्ली में स्वास्थ्य सेवायें चरमरा रही हैं।  सरकारी अस्पताल हों या सरकारी हेल्थ सेन्टर सब जगह अव्यवस्था का बोलबाला है।  आम आदमी पोलीक्लिनिक का स्वपन दिखाने वालों ने साल भर में सिर्फ एक पोलीक्लिीनिक खोली और पहले से चलते हुये हेल्थ सेन्टरों को ठप्प कर दिया।  अल्पसंख्यक हों या महिलायें सभी इस सरकार के सच से आज अवगत हैं और निराश हैं। यहां भाजपा अध्यक्ष को यह भी बताना चाहिये कि क्या यह सब केजरीवाल के एक साल में हुआ है या पहले से है जिसे खत्म किया जाना चाहिये। अपनी पूरी बात में उनका व्यवहार वैसा ही रहा जैसा कि चुनाव के दौरान निर्मला सीतारमन व रधुवंश प्रसाद का रहा ।

 

 

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि इस सरकार ने साल भर संवैधानिक संकट उत्पन्न कर बार-बार केन्द्र सरकार से टकराव की स्थिति बनाई। साल के प्रारम्भ में ही उन्होंने उपराज्यपाल से यह कहकर तलखी बढ़ाई कि कानून व्यवस्था, पुलिस और भूमि इन तीन को छोड़ आपका कहीं हस्तक्षेप नहीं होगा सिर्फ मेरा मंत्रिमंडल ही सब तय करेगा।  सरकार ने अधिकारियों को भी इसी तरह के आदेश देने का प्रयास किया और भारत के एटार्नी जनरल के संदेश को भी इस संबंध में मानने से कोताही की।

 

उन्होनेे कहा कि केजरीवाल सरकार ने लगातार खुद को एक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की नहीं बल्कि पूर्ण राज्य की सरकार के रूप में दर्शाने का प्रयास किया है और बार-बार केन्द्र सरकार की अवमानना की है।  लगातार केन्द्रीय गृह मंत्रालय एवं भारत सरकार की अवहेलना के चलते जरूरी प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों का सरकार पर से विश्वास डगमगाया है जिसके चलते प्रशासनिक स्तर और विकास दोनों ही कमजारे पड़े हैं।उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रशासन बेहद लचर स्थिति में पहुंच गया है।  संवैधानिक व्यवस्था टूट रही है। सरकार की हठधर्मी के चलते 13 आवश्यक बिल संवैधानिक संकट की भेंट चढ़ गये हैं क्योंकि सरकार ने उनके लिए जरूरी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की है।

 

दिल्ली सरकार ने और मुख्यमंत्री ने अनेक मौकों पर केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री के विरूद्ध असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है।  उन्होंने अनेक बार अपनी नाकामियों को छुपानें के लिए केन्द्र सरकार पर ओछे आरोप लगाने का प्रयास किया है।  राजनीतिक विकास करने की सभी का स्वतंत्रता है पर जिस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री एवं अनेक मंत्रियों के प्रति की हैं वह इस सरकार के चरित्र पर बदनुमा दाग है। केजरीवाल सरकार ने इसी तरीके का व्यक्तिवादी ओछापन सरकारी अधिकारियों के साथ भी किया है, विशेषकर दलित और पिछड़े वर्गों से जुड़े अधिकारियों के साथ।  हाल ही में जिस तरह दो दानिक्स अधिकारियों, श्री यशपाल गर्ग एवं श्री सुभाष चन्द्र को सरकार के मनमाने आदेशों का पालन करने से इंकार पर निलम्बित किया गया उसने एक अजीब संकट उत्पन्न किया और आज प्रशासनिक अधिकारी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

 

प्रिंसिपल सचिव गृह श्री धर्मपाल को जिस तरह श्री मुकेश कुमार मीणा की नियुक्ति के आदेशों को लेकर पदभार मुक्त किया गया वह अप्रत्याशित था और किसी सरकार में कभी नहीं हुआ।  मुख्यमंत्री के चहीते राजेन्द्र कुमार को उपराज्यपाल की अनुमति के बिना गृह विभाग का काम सौंपा जाना पूरी तरह असंवैधानिक था और एक ऐसी स्थिति बनी कि दिल्ली में गृह विभाग के काफी दिनों तक दो मुखिया रहे।

 

उन्होनेे कहा कि इसी तरह सरकार ने यह जानते हुये कि भूमि केन्द्र से जुड़ा विषय है, दिल्ली में स्टाम्प ड्यूटी बसूलने के लिए कृषि भूमि के मिनीमम रेट उपराज्यपाल से बात किये बिना ही तय कर डाले।  जिस पर बाद में उपराज्यपाल ने रोक लगाई पर फिर भी सरकार ने अपनी मनमानी करने के प्रयास किये। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने साल भर में एक बार भी दिल्ली के विकास के हित में केन्द्र के साथ मिलकर कोई प्रयास नहीं किया।  एक व्यक्तिगत रंजिश के साथ केजरीवाल सरकार ने केन्द्र सरकार पर राजनीतिक बांण चलाने का प्रयास किया।  सरकार ने अधिकार न होते हुये भी दो जांच कमीनशन बनाने का प्रयास किया जबकि कमीशन आफ इन्क्वारी एक्ट 1952 के तहत केवल केन्द्र सरकार को ही दिल्ली में ऐसा कोई कमीशन बनाने का अधिकार है। संवैधानिक मान्यताओं अनुसार केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जब इन कमीशनों को अनधिकृत घोषित किया तो फिर दिल्ली सरकार ने टकराव बढ़ाते हुये इन्हें चलाने की घोषणा की।

 

उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने 50 से अधिक नोटिफिकेशन नेशनल केपिटल टेरिटरी आफ दिल्ली के नाम और आदेश पर जारी कर दिये जबकि इनके लिए सक्षम प्राधिकारी दिल्ली के उपराज्यपाल से कोई स्वीकृति ही प्राप्त नहीं की गई। श्री गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार द्वारा संविधान एवं विधि द्वारा निश्चित कार्य प्रणालियों का पालन न करने के कारण आज दिल्ली एक संवैधानिक संकट में अटक गई है।

प्रदेश सह-प्रभारी  तरूण चुघ ने कहा कि दिल्ली की जनता ने बहुत उम्मीद के साथ केजरीवाल सरकार को चुना था पर यह सरकार पूरी तरह विफल रही है।  जनता का दुख यह देखकर और बढ़ जाता है कि श्री केजरीवाल ने सरकार में कोई जिम्मेदारी, कोई मंत्रालय अपने पास नहीं लिया और दिल्ली की जनता के गाढ़े खून पसीने की कमाई के सैकड़ों करोड़ रूपये स्व प्रचार एवं अन्य राज्यों में राजनीतिक विकास पर लुटा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि दिल्ली भाजपा सरकार की नाकामियों को जनता के बीच उजागर करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगी और हमारे कार्यकत्र्ता, सत्ताधारी दल के विधायकों एवं मंत्रियों को उनके भ्रष्टाचार के लिए लोकपाल एवं न्यायालयों के साथ-साथ जनता के कटघरे में भी ले जाकर सजा दिलवायेंगे।

 

राष्ट्रीय मंत्री सरदार आर पी सिंह ने कहा कि दिल्ली के सिख समुदाय ने केजरीवाल दल को बहुत उम्मीद के साथ विगत विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित समर्थन दिया था पर पिछले एक साल में केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सिख समुदाय को केवल छलावे दिये हैं।  केन्द्र सरकार द्वारा घोषित अतिरिक्त मुआवजे के लिए 10 माह इंतजार करवाया तो केन्द्र द्वारा गठित एस.आई.टी. को सहयोग न देकर अप्रत्यक्ष रूप से अपने कांग्रेस के सहयोगियों को बचाया।  इस सबकी हद तो तब हुई जब यह बात सामने आई कि 1984 के नरसंहार से जुड़ी सर्वाधिक संवेदनशील फाइल केजरीवाल सरकार के सचिवालय से गायब हो गई है।  सिख समुदाय का मानना है कि यह सब एक सोची समझी साजिश के तहत हुई और सिख समाज चाहता है कि अब यह फाइल सिखों के धार्मिक गुरूओं एवं वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के समक्ष रखी जायें।  सरदार आर पी सिंह ने कहा कि सिख समाज अब यह मानता है कि केजरीवाल राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उसका उदाहरण अभी हाल में पंजाब में श्री जरनैल सिंह भिंडरावाले की बरसी पर लगे उन पोस्टरों के बाद सामने आया जिनमें श्री केजरीवाल एवं उनकी पार्टी के अन्य नेताओं के चित्र लगे थे।  जब इस मुद्दे पर विवाद हुआ तो केजरीवाल दल ने इन पोस्टरोें से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया पर इन विवादित पोस्टरों के विरूद्ध पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।  केजरीवाल दल कभी भी खालिस्तान के मुद्दे पर कुछ नहीं बोलता और यह बिलकुल वैसे ही है जैसे कश्मीर के अलगाववादियों पर इनकी चुप्पी।

 

प्रदेश महामंत्री रमेश बिधूड़ी ने कहा कि यूं तो केजरीवाल सरकार ने पूरी दिल्ली को ठगा है पर दिल्ली की झुग्गी बस्तियों, दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों और दिल्ली के गांवों की जनता इस सरकार से निराश-हताश है।  जहां झुग्गी वहीं मकान का स्वपन बेचकर सत्ता में आये लोग आज झुग्गी बस्तियों में बुनियादी सफाई और पीने का पानी भी देने को तैयार नहीं।  एक साल में सरकार ने कोई ऐसा काम नहीं किया जिसके चलते झुग्गीवालों को नियमित सफाई और पानी की पाइप लाइन मिल सके।  एक झुग्गी बस्ती को भी माॅडल के रूप में लेकर मकान उपलब्ध कराने की योजना तक नहीं बनाई गई। उन्होनेे कहा कि सत्ता में आते ही केजरीवाल दल ने अनधिकृत कालोनियों को नियिमित करने और मकानों की रजिस्ट्री खोलने की घोषणा की थी पर आज एक वर्ष बाद एक भी कालोनी को नियमित नहीं किया गया है, किसी एक मकान की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है।  किसी भी कालोनी में कोई नई बुनियादी सुविधायें नहीं पुहंचाई गई हैं और न ही नगर निगमों को कालोनियों के लेआउट प्लान बनाने के लिए राशि उपलब्ध कराई गई है।  उन्होंने कहा कि इसी तरह दिल्ली के गांवों एवं किसानों के साथ भी सरकार ने केवल छलावा ही किया है।  विगत वर्ष फसल में हुये नुकसान के मुआवजे की घोषणा के बाद भी आज 8 माह का समय बीत चुका है पर किसान के हाथ कुछ नहीं लगा है।   प्रचार के लिए कुछ प्रारम्भिक चैक बांटे गये पर फिर किसानों को पटवारिओं के रहमों करम पर छोड़ दिया गया।  इसी तरह दिल्ली में ग्रामीण भूमि की लैण्डपुलिंग के काम जिससे किसानों को बहुत उम्मीदें हैं केजरीवाल सरकार ने लटका रखा है।  दिल्ली सरकार भ्रम फैला रही है कि केन्द्र सरकार की स्वीकृति नहीं है जबकि केन्द्र को इससे कुछ लेना-देना ही नहीं है।  केजरीवाल सरकार को योजना बनाना है पर वह अपने गुणा-भागों में मस्त है, उसे किसान की बदहाली से कुछ लेना-देना नहीं है।

 

प्रदेश महामंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने महिलाओं को पूरी तरह निराश ही नहीं उपेक्षित भी किया है।  जहां सरकार और प्रशासन में महिलाओं को स्थान नहीं दिया गया वहीं दिल्ली महिला आयोग हो या दिल्ली महिला हेल्प लाइन सभी को सरकार ने लाचार और लचर राजनीतिक अखाड़ा बना दिया है।  हेल्प लाइन को ठप्प कर दिया गया है तो महिला आयोग में अपनी पार्टी से जुड़े वोलेन्टियरों को कर्मचारी के रूप में भरकर ऐसा रूप दे दिया है कि महिला आयोग आने वाली महिलायें अब अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं करती।  उन्होंने कहा कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए गली-गली में सीसीटीवी के दिवास्वपन बेचने वाली सरकार ने एक वर्ष में एक भी कालोनी में सी.सी.टी.वी. का नया जाल नहीं बिछाया।  बसों में मार्शल अदृश्य हैं और सरकार ने महिलाओं के लिए कोई विशेष आॅटो या कैब विकसित करने पर ध्यान नहीं दिया है।  दिल्ली में आज भी महिलायें हर चैराहे पर आॅटो वाले से गंतव्य तक चलने के लिए गिड़गिड़ाती दिखाई देती हैं पर हम उस सरकार से उम्मीद भी क्या रख सकते हैं जिसमें सोमनाथ भारती जैसे महिला विरोधी को संरक्षण मिला हो।

 

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