लेखक परिचय

वीरेन्द्र जैन

वीरेन्द्र जैन

सुप्रसिद्ध व्‍यंगकार। जनवादी लेखक संघ, भोपाल इकाई के अध्‍यक्ष।

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आदरणीय हजारे जी

सादर प्रणाम

दरअसल यह खत आपकी टीम के नाम है जिनकी सलाह से आपके वक्तव्य सामने आते हैं, किंतु किसी भी संस्था को जब कोई पत्र दिया जाता है तो वह संस्था के प्रमुख को सम्बोधित किया जाता है जैसे कि ठेकों के टेंडर तक सम्बन्धित बाबू को नहीं अपितु राष्ट्रपति भारत सरकार को सम्बोधित होते हैं। आपके अभियान के समांतर चलने वाले मायावान बाबा रामदेव के आचरण के विपरीत आपने अपने निश्चय और आचरण में जो दृड़ता दिखायी है उसके लिए देश में उन लोगों ने भी आपकी सराहना की है जो आपके जनलोकपाल से असहमत हैं। वैसे भी आपके जनलोकपाल से तो पूरी तरह कोई भी सहमत नहीं है, यहाँ तक कि इसे तैयार करने वालों ने भी इसे इसी तरह तैयार किया है ताकि सरकार से टकराव के अवसर आयें। वे इसमें सफल रहे हैं। इससे जनता के पास यह सन्देश पहुँचा है कि आपकी टीम देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाना चाहती है और देश की चुनी हुयी सरकार ऐसा नहीं चाहती। देश के विपक्षी दल भी सरकार की विकृत छवि के और विकृत होने से प्रसन्न हैं और आपके जनलोकपाल बिल के समर्थन में न होते हुए भी वे सरकार की छवि बिगाड़ने के अभियान में समानधर्मी महसूस करते हैं। आपके समर्थन में जो भीड़ उमड़ती दिख रही है वह भी विपक्षी दलों को सम्भावनाओं से भरी हुयी दिख रही है क्योंकि वह सतारूढ दल के विरोध में खड़ी नजर आ रही है। इन्हीं दिनों उज्जैन में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चिंतन व समंवय बैठक ने अपने संगठनों को सन्देश दिया है कि भले ही अन्ना हजारे भाजपा और संघ से दूरी बना कर चल रहे हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी और आन्दोलन से बने माहौल का फायदा उठाया जाना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष गडकरी को बैठक में आने के बजाय अन्ना की गिरफ्तारी के खिलाफ आन्दोलन आदि का नेतृत्व करने को कह दिया गया है। विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय नेत्तृत्व ने भी यूथ अगैंस्ट करप्शन फोरम के आन्दोलन में कूदने को कहा है [दैनिक भास्कर भोपाल दिनांक 18 अगस्त 2011 में उज्जैन से मनोज जोशी की रिपोर्ट] टालस्टाय के एक उपन्यास में नायक कहता है कि- वो मुझे चाहती है या नहीं चाहती यह जरूरी नहीं पर मैं उसे चाहता हूं यह मेरे लिए काफी है। इसी तरह आप भले ही राजनीतिक दलों से दूरी बनाये रखने की बात करते हों पर राजनीतिक दल तो भीड़ पर भिनभिनाने से नहीं चूक सकते क्योंकि यह गुड़ और मक्खियों जैसा रिश्ता है। श्रीमती इन्दिरा गान्धी ने प्रेमधवन को दिये अपने आखिरी साक्षात्कार में विभिन्न धर्मस्थलों पर जाने का यही कारण बताया था कि वे जनता के आस्था स्थल हैं और बड़ी संख्या में जनता वहाँ पर जाती है।

राजनीतिक दलों ने आपकी बात का लिहाज रखा है इसलिए वे अपनी पार्टी के झंडे बैनर लेकर आपके आन्दोलन में सम्मलित नहीं हुए किंतु सब ने अपने अपने झंडे बैनरों के साथ आपकी गिरफ्तारी पर विरोध किया। रिन्द के रिन्द रहे हाथ से जन्नत न गयी।

आइए उस भीड़ का विश्लेषण करें जो 15 अगस्त को सड़कों पर नाबालिग बाल मजदूरों द्वारा बेचे गये झंडे लेकर आपके समर्थन में उतरी। इस भीड़ में बहुत बड़ी संख्या युवाओं की थी जो कालेजों में पढते हैं, या पढने के बाद नौकरी की तलाश में हैं। कुछ संख्या उन वकीलों की थी जो युवा हैं और जिनकी प्रैक्टिस नहीं चलती। आपकी टीम का आवाहन था कि पूरा देश 16 अगस्त से एक सप्ताह की छुट्टी ले और तिरंगा लेकर सड़कों गलियों में घूमे व अपने अपने मन से चयनित भ्रष्टाचारियों का विरोध करे। मुझे प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 अगस्त को कहीं किसी ने छुट्टी नहीं ली, सारे दफ्तर सारे स्कूल भरे रहे यहाँ तक कि दुकानें भी खुली रहीं। जो युवा अलग अलग पार्कों, फास्ट फूड सेंटरों, या पिकनिक स्पाटों पर जेंडर मुक्त मित्रों के साथ मौसम का मजा लेते थे वे यही काम कुछ चौराहों या तयशुदा प्रदर्शन स्थलों पर कर रहे थे। उनके साथ कई जगह पैंट पर कुर्ता पहिनकर गान्धी थैला लटकाने वाले कुछ एनजियो नुमा लड़के और वैसी ही खिलखिलाती बिन्दास लड़कियां थीं। सारा माहौल एक उत्सव की तरह आल्हाद से भरा हुआ था, कहीं कोई गुस्सा नहीं था। कृप्या इसे अपने अहिंसा के सन्देश की शांति समझने की भूल न करें, क्योंकि इसमें एक रूमान छलक रहा था। हाथ उठा कर नारे लगाने में नृत्य था गीत था, आनन्द था।

इन लड़कों में से अधिकांश गरीब परिवारों से नहीं आये थे क्योंकि जो जितना गरीब है वह उतना ही प्रत्यक्ष भ्रष्टाचार से कम पीड़ित है। इनमें पिछड़े परिवारों के बच्चे भी नहीं थे क्योंकि वे बड़ी नौकरी न मिलने पर कोई छोटी नौकरी भी कर लेते हैं। इनमें अधिकांश उन परिवारों से आये बच्चे थे जिन परिवारों के मुखिया कहीं न कहीं स्वयं तो भ्रष्टाचार करते हैं किंतु उनके साथ दूसरे जो भ्रष्टाचार करते हैं उसको दूर करना चाहते हैं। इन्हें सत्ता पर बैठे व्यक्ति को गाली देने में और सरकार पलटने में अपनी भूमिका की कल्पना में एडवेंचर महसूस होता है। इनके पास भी आपकी टीम की तरह वैकल्पिक व्यवस्था का कोई ढांचा [विजन] नहीं है। ये कारों, मोटर साइकिलों वाले हैं, इनको पर्याप्त जेबखर्च मिलता है। आदरणीय, इसका मतलब यह नहीं कि मैं आपको अनशन न करने देने वाली और आपको गिरफ्तार करने वाली सरकार के पक्ष में हूं। मैं तो केवल यह बताना चाह रहा हूं कि आप जिनके सहारे बड़े परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं वे वही लोग हैं जिनके खिलाफ लड़ाई लड़ी जानी है। आपसे उम्मीद पाले जो निरीह लोग आशा से तक रहे हैं उनके वोट लूटने के लिए स्थापित राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है, इसलिए जरूरी है कि आप स्पष्ट करें कि भ्रष्टाचार के लिए आप जिस व्यवस्था को जिम्मेवार मानते हैं उसको हटाने के बाद नई व्यवस्था का आपका अगला खाका क्या है? क्या आपने अपने समर्थकों के लिए कुछ न्यूनतम पात्रताएं और आचार संहिताएं बनायी हैं, जिनके बिना किसी परिवर्तन की दशा में जार्ज की जगह जमुनाप्रसाद आ जायेंगे। यदि आप दल की सीमाओं में नहीं बँधना चाहते तो क्या उम्मीदवारों में कुछ न्यूनतम पात्रताएं, और कुछ न्यूनतम नकार बताना चाहेंगे, कि ये गुण होने चाहिए और ये अवगुण नहीं होने चाहिए। क्या आप चाहेंगे कि चयनित जन प्रतिनिधि पर लम्बित प्रकरणों की सुनवाई विशेष अदालतें दिन-प्रतिदिन के आधार पर करें और निश्चित समय में फैसला सुनाएं। क्या आप चाहेंगे कि एक बार चयनित होने के बाद विधायक, सांसद पेंशन पाकर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित कर चुका जनप्रतिनिधि अपनी सारी चल अचल सम्पत्ति त्याग दे तब शपथ ग्रहण करे।

आदरणीय, भ्रष्टाचार दोषयुक्त व्यवस्था की पैदाइश होता है और इसे दूर करने के लिए व्यवस्था को बदलना ही होगा। कृपा करके इस सम्बन्ध में आपने जो सपना देखा होगा उससे देश को परिचित कराइए अन्यथा यह सब एक तमाशा होकर रह जायेगा।

आपका एक प्रशंसक

वीरेन्द्र जैन

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9 Comments on "अन्ना हजारे के नाम खुला खत"

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Satyarthi
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पुनश्चः इसी प्रश्न का दूसरा पहलू है की क्या अन्ना वास्तव में भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हैं या की वे कोई दूसरा खेल खेल रहे हैं. अन्ना पर सरकार द्वारा यह आक्षेप भी लगाया जाता रहा है की अन्ना संविधान की मर्यादा के विपरीत देश के कानून बनाने के अधिकार का अपहरण कर रहे हैं आश्चर्य है की यह आक्षेप लगाने वालों में देश के कुछ प्रतिष्ठित विचारक भी सम्मिलित हैं. इस में कोई विवाद नहीं हो सकता की देश के लिए कानून बनाने का अधिकार जनता के निर्वाचित प्रतिनिधिओं के पास है परन्तु इस का मतलब यह कदापि नहीं हो… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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वीरेंद्र जैन जी का उपरोक्त पूरा लेख दुर्भावना और पूर्वाग्रहों का शिकार है. जनमत को भ्रमित करने का एक चतुर प्रयास है. अन्ना के आन्दोलन से त्रस्त भ्रष्ट शक्तियों का प्रायोजित प्रयास लगता है. (१)आप कहते हैं की आना हजारे पहले विकल्प दें की व्यवस्था क्या होगी. तो क्या जब तक कोई विकल्प न मिले चुपचाप सब कुछ सहते रहें? अरे भाई विकल्प देकना है तो रालेगनसिंदी (अन्ना हजारे के गाँव) जाकर देखो. विकल्प सामने नज़र आ जाएगा.. वह पसंद नहीं तो आप विद्वान है, आप ही विकल्प दे दें ? केवल कमियाँ ही निकालेंगे ? या समाधान की बात… Read more »
vivek
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आज के आन्दोलन क़ी, सरकार के आलावा, तो वे ही लोग आलोचना कर रहे है जो सत्ता कि मलाई खा रहें है(इसमें विपक्ष के तथाकथित चुने हुए जनप्रतिनिधि भी शामिल है ) या वे लोग जो इस आन्दोलन में,अपनी स्वयं रचित शेली के कारण, जुड नहीं पाए ! ये लोग बड़े मासूम से और अप्रासंगिक तर्कों के सहारे अपने आप को अलग रख रहें है ? कभी अन्ना क़ी टीम पर प्रश्न खड़े कर देतें हैं ,कभी इस आन्दोलन के मुद्दों में से किसी एक मुद्दे से असहमति जता देतें हैं ,कभी ऐसे आन्दोलनों से क्या होगा ये कह अपनी… Read more »
RAJ
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सही बात कही आप ने वीरेंदर जी मैं कांग्रेस भक्त नहीं हूँ , पर आज के माहोल में अगर कोइ अन्ना का विरोध करता है तो उसे तुरंत देशद्रोही ककार दिया जाता है , आप ने बहुत बड़ी हिम्मत जुताई आप ने अन्ना के आन्दोलन का सच्चा स्वरुप सामने रखा है, वैसे भी जन्लोक्पल बिल आने से क्या होंगा ब्रिटिश सषित कायदों को बदलना पड़ेंगा यहाँ पर स्वामी रामदेव सही है अन्ना दोंग कर रहा है मैं भी युवा वर्गे से अत हूँ पर मैंने १६ अगस्त को छुट्टी नहीं ली और ९९ % लोगों ने नहीं ली , मैं… Read more »
Satyarthi
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श्री वीरेन्द्र जैन ने कंग्रेसभक्ति से परिपूर्ण इस लेख में कुछ गंभीर प्रश्न उठाए हैं यथा ;- १.क्या सरकार देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलवाना चाहती है ? २.क्या बी जे पी, रा. स्व. संघ , ए बी वि पी तथा अन्य राजनितिक दल केवल अगले चुनाव में लाभ की आशा से ही अन्ना का समर्थन कर रहे हैं? ३. अन्ना के समर्थन में जुडी भीड़ किस कारण से आन्दोलन में भाग ले रही है? किसी मेले या पिकनिक जैसे वातावरण का आनंद लेने के लिए? ४ अन्ना के समर्थनकर्ता स्वयं भ्रष्ट परिवारों से हैं और उनके पास किसी वैकल्पिक… Read more »
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