लेखक परिचय

रवि श्रीवास्तव

रवि श्रीवास्तव

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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देश के युवाओं में नशा का दौर लगातार बढ़ता जा रहा है. किसी को शौक है तो कोई इसका आदी बन चुका है. छोटी खुशी हो या बड़ी बस बहाना चाहिए पार्टी करने का. चलो पार्टी करते है और जाम छलकाते है. गिलास को टकराकर चेयर्स करते हैं. और टल्ली होकर हंगामा.

वाह क्या खूबी है इस शराब में. ऐसे में  दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शराब पर एक नई बात कह दी. दिल्ली में शराब पीने की उम्र को कम करने की बात कही है. अभी दिल्ली में शराब पीने की जो कानूनी उम्र है वो 25 साल है. मंत्री जी ने इसे कम करके 21 साल करना चाहते है.

मंत्री जी के मुताबिक दिल्ली में फिलहाल शराब पीने की उम्र ज्यादा है जिसे कम कर दिया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि कई बीजेपी शासित राज्यों में भी शराब पीने की उम्र 21 है। तो दिल्ली में शराब पीने की आयु 25 क्यों है?

वैसे आज कल देश का युवा नशे की लत में फंसता जा रहा है. ऐसे में ऐसी बातें करना कि उम्र सीमा घटा दो. दूसरे राज्यों में तो उम्र सीमा कम है. दिल्ली के जनता ने आप को गद्दी पर इसलिए बैठाया है कि उसकी समस्या दूर कर दिल्ली का विकास करे.

kapil mishraआप तो शराबी बनाने में जुट गए. वैसे ये लोगों का निजी मामला होता है. अब 18 साल  के ऊपर हो गए  तो अच्छा बुरा अपना सभी सोच सकते हैं. बोतल पर एक चेतावनी भी लिखी होती है. लेकिन अगर बीजेपी और कांग्रेस शासित राज्यों को देखते है तो कुछ दूसरी चीजो में देखें. जिसमें रोजगार, शिक्षा, मंहगाई, सुरक्षा, सम्बधित बातें.

और दिल्ली को और आगे लेकर जाओ. इन राज्यों से भी आगे. लेकिन अच्छी चीजों को कौन देखता है. रेस्तरां एसोसिएशन की मांग पर आप उम्र सीमा घटनी चाहिए ये तो कह दिया. दिल्ली की जनता ने जिस उम्मीद के साथ आप को ताज पहनाया उसके बारे में क्या ख्याल है. आज दिल्ली के वो नौजवान जो शराब पीना चाहते है लेकिन 25 साल उम्र कम होने की वजह से रेस्तरों में जाने से डरते हैं.

हालांकि वो भले ही अपना जुगाड़ ढ़ूढ लेते हो. लेकिन कानून का डर तो दोनों में देखा जाता है. वाह मंत्री साहब आप ने कहा कि हमने बाकी सभी राज्यों में देखा है कि कांग्रेस और बीजेपी शासित राज्यों में भी शराब पीने की उम्र 25 साल से कम है.

अगर वो विरोध करते हैं तो वो पहले अपने शासित राज्यों में देखें. चलो वो विरोध करते हैं वो तो इतने सालों से देश में और दिल्ली में कुछ नया नही कर पाए. दिल्ली की जनता ने आप पर तो काफी भरोसा किया था. इक बार अधेर में छोड़कर भाग गए थे.

लेकिन दोबारा से फिर भी पूरा मौका दिया. कहा गए वो वादे वो बातें. क्या ये सब और राजनीतिक दलों का चुनावी जुमला था. देश की राजधानी में कितने युवा पढ़ने और रोजगार की तलाश में आते हैं. तो शिक्षा और रोजगार पर क्यों नही विचार किया जाता.

कितने नाबलिक लड़के होटल  और ढाबों में काम करते हैं. उनपर क्यों नही ध्यान जाता है. कितने गरीब के बच्चें सड़को पर भीख मांगते हैं. वो इनको नजर नही आता. कुछ अच्छाई की शुरूआत तो करो. जिससे दूसरा राज्य भी सीख ले.

आप तो शराब में आकर अटक गए. चलो शायद मंत्रीजी चाहते हैं दिल्ली वाले झूम बराबर झूम की तरह रहे. यहां शराब को बैन करने की मांग होती रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि मंत्री जी चाहते हैं पी ले पी ले ओ मोरी जनता.

रवि श्रीवास्तव

 

 

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2 Comments on "पी ले, पी ले, ओ मोरी जनता"

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lalit
Guest

wah sir kya likha hai apne mujhe to apne desk ke punjab ki halat ki yad a gai .

sureshchandra karmarkar
Guest
sureshchandra karmarkar

में केजरीवाल सरकार की किरकिरी कई कारगुजारियों से हो गयी. (१) आप के संस्थापक सदस्यों को गली गलोच कर आप शब्दों का प्रयोग कर दल से निकालना (२)हर कांग्रेसी और भाजपाई को भरषट बताना किन्तु सिद्ध नहीं कर पाना (३) एक के बाद एक कानून मंत्रियों के कृत्य (४) पहिले उप राज्य पाल को गलत बताना असल प्रधानमंत्री कार्यालय को गलत बताना आदि. यह सरका र एक बातूनी मात्र है.,करना कुइ छ है नहीं ,दूसरे को जितना दोष दे सको दो. स्वयं को मत झांको।

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