लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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-प्रवीण दुबे-

pakistan‘थोथा चना बाजे घना’ पाकिस्तान पर यह कहावत पूरी तरह सही साबित होती है। सीमा पर लगातार घुसपैठ और खून-खराबे का दोषी पाकिस्तान उल्टे भारत पर आरोप लगा रहा है कि युद्ध विराम का उल्लंघन उसने नहीं भारत ने किया है, वह भी 57 बार। पाकिस्तान की इस हरकत पर जरा भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए। यह वही पाकिस्तान है जो सदैव से भारत की पीठ में छुरा घौंपता रहा है। उसे शांति नहीं आतंकवाद पसंद है। वह भारत को अस्थिर, कमजोर और परेशान देखना चाहता है यही वजह है कि जब-जब शांति की बात होती है पाकिस्तान द्वारा ऐसी हरकत को अंजाम दिया जाता है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ जाए।
ताजा घटनाक्रम भी इसी बात का प्रमाण है। ऐसे समय जब भारत पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की बातचीत में चंद दिन बाकी थे, पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों से बातचीत का राग अलापकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। जहां तक भारत का सवाल है अलगाववादी नेताओं से पाकिस्तानी हाई कमिश्नर की बातचीत पर २५ अगस्त से होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द करके एक सही जवाब दिया है।

यह सरासर गलत है कि जो अलगाववादी भारत के अभिन्न अंग कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करते रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान बातचीत के लिए भारत में ही क्यों आमंत्रित कर रहा है? इससे भी बड़ी बात तो यह है कि भारत द्वारा इस पर विरोध व्यक्त करने के बावजूद पाकिस्तान झुकने को तैयार नहीं है। नि:संदेह यह भारत को सीधी-सीधी चुनौती कही जा सकती है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान का भारत के अंदरुनी मामलों में सीधा हस्तक्षेप भी कहा जा सकता है।

यह एक अक्षम्य कृत्य है इसका कड़ा उत्तर तत्काल दिए जाने की आवश्यकता है। इस संपूर्ण घटनाक्रम से एक और गंभीर बात यह भी सामने आई है जैसा कि पाकिस्तान के हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने कहा है कि अलगाववादियों से मुलाकात की यह प्रक्रिया काफी पहले से चलती रही है। अब सवाल यह पैदा होता है कि पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं की? क्यों देश के भीतर ही देश विभाजन के षड्यंत्रों को संचालित होते रहने दिया गया? इस गलती पर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश से माफी मांगना चाहिए और इस पर अपना स्पष्टीकरण भी देना चाहिए। जहां तक पाकिस्तान के उस आरोप की बात है जिसमें उसने कहा है कि भारत ने जुलाई से अब तक 57 बार युद्ध विराम का उल्लंघन किया है, यह सरासर झूठ और असली बात से दुनिया का ध्यान बांटने की चाल है। पूरी दुनिया इस बात को भली प्रकार जानती है कि पाकिस्तान भारत में आतंकी घुसपैठ कराने के लिए किस प्रकार सीमा पर गोली बारी करता रहा है। पाकिस्तान द्वारा खुलेआम कश्मीर सीमा के निकट आतंकवादी प्रशिक्षण केन्द्र संचालित किए जाते हैं।

अब वक्त आ गया है कि भारत कश्मीर मामले  को लेकर पाकिस्तान से निर्णायक युद्ध का शंखनाद करे और पाकिस्तान द्वारा कब्जा करके रखे गए कश्मीर के एक हिस्से को मुक्त कराने का अभियान भी शुरु करे। जो लोग यह समझते हैं या मानते हैं कि पाकिस्तान भारत से दोस्ती कर लेगा या फिर बातचीत के द्वारा कश्मीर समस्या का समाधान हो जाएगा, तो यह एक बड़ी भूल है। यदि ऐसा होता तो पाकिस्तान अपने यहां से संचालित भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को रोकता तथा कब्जा करके बैठे कश्मीर के एक हिस्से को भारत के हवाले कर देता। लेकिन यह करना तो दूर वह भारत में ही कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात कर रहा है और इस पर आपत्ति उठाने पर भारत पर उल्टे आरोप लगाकर धमकियां दे रहा है। यह तो वही हुआ कि एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी।

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