लेखक परिचय

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा वर्तमान में गोवा में हिन्दी के क्षेत्र में सक्रिय लेखन कार्य कर रही हैं। डॉ. मिश्रा के हिन्दी में वैज्ञानिक लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं । उनकी अनेक हिन्दी कविताएँ विभिन्न कविता-संग्रहों में संकलित हैं। डॉ. मिश्रा की अँग्रेजी भाषा में वनस्पतिशास्त्र व पर्यावरणविज्ञान से संबंधित 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनकी पुस्तक "भारतीय अंटार्कटिक संभारतंत्र" को राजभाषा विभाग के "राजीव गाँधी ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार-2012" से सम्मानित किया गया है । उनकी एक और पुस्तक "धारा 370 मुक्त कश्मीर यथार्थ से स्वप्न की ओर" देश के प्रतिष्ठित वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है । मध्यप्रदेश हिन्दी प्रचार प्रसार परिषद् और जे एम डी पब्लिकेशन (दिल्ली) द्वारा संयुक्तरुप से डॉ. शुभ्रता मिश्रा के साहित्यिक योगदान के लिए उनको नारी गौरव सम्मान प्रदान किया गया है।

Posted On by &filed under विविधा.


hackभारत पाकिस्तान के बढ़ते तनावों के बीच रक्षामंत्री के गृहराज्य गोवा में पाकिस्तानी हैकरों ने सरकारी वेबसाइटों को हैक किया
डॉ. शुभ्रता मिश्रा

संयुक्त राष्ट्र संघ में सुषमा स्वराज की पाकिस्तान को करारा तमाचा मारने की गूँज ने पूरे विश्व में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे युद्धस्तरीय तनावों को और स्पष्ट कर दिया है। वैसे तो पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ पूरा विश्व एक है, परन्तु फिर भी कुछ निजी स्वार्थों के कारण चीन और ईरान जैसे देश पाकिस्तान को भारत के खिलाफ सम्भावित युद्ध में अपना समर्थन देने में संकोच नहीं करेंगे। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग पड़ जाने और महज चीन और ईरान के तथाकथित समर्थन से राहत की क्षणिक सांस लेने वाला पाकिस्तान भारत, उसकी सेनाओं, उसके रक्षा मंत्रालय और रक्षामंत्री से इस हद तक बोखलाया हुआ है, कि भारत के खिलाफ हर तरह के हथकण्डे अपना रहा है। उसकी ऐसी ही एक हरकत गोवा में देखने में आई है। गोवा सरकार की लगभग 16 महत्वपूर्ण सरकारी विभागों की वेबसाइटों को पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैक कर लिया गया है। हाँलाकि यह स्पष्ट नहीं है कि वेबसाइटों के हैक करने में सीधेतौर पर पाकिस्तान और उसकी सेना शामिल है या नहीं। पर यह भी सत्य है कि पाकिस्तान अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हैकिंग जैसे साइबर अपराध के लिए नहीं जाना जाता है। अतः यदि इस तरह की घटना पाकिस्तान की ओर से भारत के लिए की गई है, तो इसे सामान्य हैकिंग न समझते हुए प्रयोजनमूलक साइबर हैकिंग ही कही जा सकती है। यह अत्यंत शोचनीय व गम्भीर विषय है कि भारतीय सेनाओं द्वारा पाकिस्तानी आतंकी इरादों को बार बार रौंदने से तिलमिलाया पाकिस्तान कहीं भारत के रक्षामंत्री के गृहप्रदेश गोवा से साइबर आतंक फैलाने की की फिराक में तो नहीं है?
गम्भीरता से विचार किया जाए तो पाकिस्तान अपनी सेना और आतंकवादियों के साथ साथ साइबर क्राइम को भी तो अपना हथियार बना सकता है। आजकल भारतीय टीवी चैनलों पर वैसे भी लोगों को सावधान करते हुए पाकिस्तान से +92 नम्बर कोड से आ रहे फोन कॉलों को रिसीव न करने की हिदायत दी जा रही है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इन फोनकॉलों के माध्यम से महत्वपूर्ण सूचनाएं चुराई जा रही हैं। इसी 23 सितम्बर को पाकिस्तान के एक जासूसी सफेद कबूतर को पंजाब के होशियारपुर जिले में पुलिस ने पकड़ा है। अतः गोवा में वेबसाइटों को पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैकिंग की घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस बारे में सचेत होने की नितांत आवश्यकता है। देखा जाए तो चंद दिनों में ही भारत पाकिस्तान की सांकेतिक लड़ाई अब दूसरे चरण में पहुँचती जा रही है जहाँ कूटनीतिक और अन्य सभी क्षेत्रों में असफल होने के बाद पाकिस्तान साइबर आतंक जैसे हथकण्डों से भी भारत की अर्थव्यवस्था और बढ़ती सूचना प्रोद्यौगिकी को के द्वारा ध्वस्त करना चाहता है।
भारत की तरफ से पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए युद्धस्तर पर हो रहे प्रयास अब किसी से छिपे नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्पष्ट शब्दों में पाकिस्तान को हिदायत देते हुए उसे कश्मीर का स्वप्न न देखने की सलाह दे दी है। वहीं दूसरी ओर बलूचिस्तान और सिंध जैसे पाकिस्तानी प्रांतों में हो रही मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को विश्व मंच पर भारत ने उठाया है। भारत में उठ रही सिंधु जल संधि को समाप्त करने की चर्चा पूरे जोरों पर है, ये अलग बात है कि इस पर हमारे कुछ लोग नैतिकता की दुहाई देने में भी पीछे नहीं हैं। हाँलाकि भारत सरकार ने इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक कर विचारविमर्श शुरु कर दिया है, पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय निकलकर नहीं आया है। गोवा में पाकिस्तानी साइबर आतंकियों की सेंध इस ओर सचेत करना चाहती है कि भारत को कूटनीतिक, राजनीतिक और सैन्य नीतियों के साथ साथ अपनी साइबर व्यवस्था को भी दुरुस्त करना होगा, क्योंकि आधुनिक सैन्य संचालन में आईटी जैसी तकनीकी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत को सिंधु जल संधि से लेकर दूसरे अन्य विकल्पों पर भी विचार करने के साथ साथ अपनी साइबर प्रणाली की ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz