लेखक परिचय

बी एन गोयल

बी एन गोयल

लगभग 40 वर्ष भारत सरकार के विभिन्न पदों पर रक्षा मंत्रालय, सूचना प्रसारण मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय में कार्य कर चुके हैं। सन् 2001 में आकाशवाणी महानिदेशालय के कार्यक्रम निदेशक पद से सेवा निवृत्त हुए। भारत में और विदेश में विस्तृत यात्राएं की हैं। भारतीय दूतावास में शिक्षा और सांस्कृतिक सचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं। शैक्षणिक तौर पर विभिन्न विश्व विद्यालयों से पांच विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर किए। प्राइवेट प्रकाशनों के अतिरिक्त भारत सरकार के प्रकाशन संस्थान, नेशनल बुक ट्रस्ट के लिए पुस्तकें लिखीं। पढ़ने की बहुत अधिक रूचि है और हर विषय पर पढ़ते हैं। अपने निजी पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की पुस्तकें मिलेंगी। कला और संस्कृति पर स्वतंत्र लेख लिखने के साथ राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर नियमित रूप से भारत और कनाडा के समाचार पत्रों में विश्लेषणात्मक टिप्पणियां लिखते रहे हैं।

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al  india radioबी एन गोयल

आपात काल की  एक और घटना- उस समय के देश के प्रमुख नेताश्री बंसी लाल रक्षा मंत्री हरियाणा से थे लेकिन हरियाणा का उस समय तक कोई क्षेत्रीय आकाशवाणी केंद्र नहीं था क्योंकि उस  समय तक प्रदेश की राजधानी पर कोई निर्णय नहीं हुआ था. कुछ शहरों के नाम पर रस्साकशी चल रही थी लेकिन वे सब राजनैतिकथी. अतःरोहतक को ही हरियाणा का केंद्र मान कर वहीँ आकाशवाणी केंद्र निर्माणका काम शुरू किया गया था. अब1975 में वह लगभग पूरा हो गया था. 1975 मेंप्रोग्राम स्टाफ की नियुक्ति का काम शुरू हो गया. निर्देश हुए कि केंद्र जल्दी शुरू किया जाये.

 

सब से पहले दिल्ली से अलग अलग केडर के हम पांच व्यक्तिओं का ‘जत्था’ (हंसी में हम अपने को जत्थेदार ही कहते थे)जनवरी1976में वहां पोस्ट कर दिया गया. केंद्र निदेशक के रूप में श्रीबी एम् लाल की नियुक्ति हुई लेकिन वे अभी दिल्ली से ही काम करेंगे. ऐसा निर्देश दिया गया.अन्य कार्यक्रम अधिकारी के रूप में स्व० जगदीश बत्रा, श्रीमती पुष्पा अग्निहोत्री, भरत सिंह देसवालऔर मैं स्वयं दिल्ली से पोस्ट हुए. शिमला से जयभगवानगुप्ता और श्याम गुप्ता आये. अहमदाबाद से गुरमीत रामल को बुलाया. सब की पोस्टिंग उन की सहमति लेकर की गयी. धीरे धीरे और लोग भी जुड़ते गए. इसी तरह इंजीनियरिंग और प्रशासन अनुभाग में भी पोस्टिंग हुई.जनवरी 1976 तक सब लोग अपने अपने स्थान पर आगयेक्योंकिइन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मार्च तक का बजट भी मिला था .

 

8 मई 1976 को रोहतक केंद्र का उद्घाटन निश्चित हो गया. उद्घाटनसूचना प्रसारण  मंत्री श्री विद्या चरण शुक्लकी उपस्थिति में रक्षा मंत्री श्री बंसी लाल करेंगे. केंद्रनिदेशक बी एम् लाल मिलिट्री से निकलेव्यक्तिथे. वेपैनी नज़र वाले, दूरदर्शी, मंजे हुए और सुलझे हुए व्यक्ति थे.वे उद्घाटन समारोहको एक सर्वश्रेष्ठ,रंग बिरंगे औरअनुशासित ढंग से प्रस्तुत करना चाहते थे. इस की तैय्यारी में पूरी तरह जुट गए. मंच कार्यक्रम मेंसूक्ष्म से सूक्ष्म बिंदु को वे नज़र अंदाज़ नहीं होने देते थे. कलाकारों के चयन के लिए वे प्रदेशके गाँव गाँव घूमते जो भी उन्हें अच्छा लगता उसे रोहतक बुलाते, स्टूडियो में रिहर्सल देखते. यदिकिसीमें कोई कमी दिखाई देती, उसे वहीँ छोड़ आगे बढ़ जाते. अन्ततःउद्घाटन से एक दिनपहले यानी 7 मई की शाम को पूरा कार्यक्रम फाइनल कर दिया गया. फिर भी सब को कह दिया गया कि फाइनल स्टेज रिहर्सल 8 मई को सुबह् 9 बजे महानिदेशक श्री चटर्जी की उपस्थिति में होगी – यदिम.नि. कोकिसीकीप्रस्तुति पसंद नहीं आयी तो उसे बाहर होना होगा. सुबह 9 बजे म.नि. महोदय आगये. लाल सा० ने उन से फाइनल रिहर्सल देखने का निवेदन किया लेकिन चटर्जी सा० ने सपाट मनाकर दिया. उन्होंने कहा की आज मैं एक दर्शक हूँ. पूरे कार्यक्रम की अच्छाई और खराबी सब आप के जिम्मे.

 

कार्यक्रम ठीक समय सांय चारबजे शुरू हो गया. उद्घोषणा के लिए दिल्ली से वरिष्ठतम उद्घोषक श्री उमेश अग्निहोत्री आये थे. ( उमेश और पुष्प जी आकाशवाणी के एक सर्व श्रेष्ठ जोड़ी मानी जाती रही है.बाद में येवोयस ऑफ़ अमेरिकाचले गए. वहीँ से रिटायर हुए. आज भी मेरे घनिष्ठ मित्र हैं –दो दिन पहले ही उन से फोन पर बात हुई). सब कुछ सधे ढंग से चल रहा था. मंचपरएक पार्टी अपना प्रोग्राम समाप्त करती और उसी समय अगले की घोषणाशुरू होती तब तक स्टेज पर अगली पार्टी क्रमबद्ध हो जाती. कहीं कोई अन्तराल नहीं. आधाप्रोग्राम हुआ कि रक्षा मंत्री की तरफ से माइक पर घोषणा हुई की एक आइटम उनका अपनाएककलाकार भी प्रस्तुत करेगा. यह भी स्पष्ट कर दिया की उस कलाकार को किसीरिहर्सल की आवश्यकता नहीं है. लाल सा० थोडा सहमे कि कहीं उनकी मेहनत व्यर्थ न जाये लेकिन किस का साहस कि इसे मना कर दे. उन के कलाकार का कार्यक्रम हुआ और पूरा प्रोग्राम सहज रूप से संपन्न  हो गया. किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई. ये कलाकार थे चौ हरध्यान सिंह. ये प्रादेशिक जन संपर्क विभाग में कलाकार थे.

 

उद्घाटन से पहले कुछ दिन टेस्ट ट्रांसमिशन चलाया. 8 मई से केंद्र ने नियमितकाम करना शुरू कर दिया. कुछ लोग ट्रान्सफर पर आये जैसे रांची से चौहान इन्दर मोहन सिंह, कुछ नयी नियुक्तियां हुई जैसे अश्विनी त्यागी, स्व० श्रीमती रूप चांदनी खुराना, लोचनी अस्थाना, गोपालकृष्ण, हरि संधू, राजेश्वर वशिष्ठ. राम कुमार शर्मा, अवतार पराशर,आशाशुक्ला. अचानकएक रविवार के दिन शाम के 4 बजेलाल सा० नेहमसब को बुलाया. आदेश हुआ कि कहीं से भी चौ० हरध्यान सिंह को बुला कर लाओ. हम सब पसोपेश में क्योंकि न उद्घाटन से पहलेऔर न ही बाद में उन से कोई संपर्क हुआ था. कोई उन्हें जानता भी नहीं था.

लाल सा० ने बताया किकल यानी सोमवार से उन्हें बुला कर अपने केंद्र पर नियुक्ति देनी है. नियमानुसार किसी भी राजपत्रित पोस्ट पर नियुक्ति का अधिकार के. नि. को नहीं होता. यह नियुक्ति म.नि. ही कर सकता है. लेकिन आदेश आदेश है ‘आज के हालात में वहीनियम और क़ानूनहै जो ऊपर वाला चाहे’. अतः सोमवार को श्री हरध्यान सिंह जी को केंद्र का राजपत्रित अधिकारी बना दिया गया. उन के सारे कागजात तैयार कर म.नि. भेज दिए गए.

 

यहाँ यह कहना भी आवश्यक है श्री सिंह एक बहुत ही विनम्र, हंमुखऔर मिलनसार व्यक्ति निकले. किसी को नहीं लगा कि उन की पीठ पर कोई वरद हस्त है. आपातकाल समाप्त होने पर उन्होंने स्वयं ही वापस जाने की बात कही और वे सब से मिल कर विदा हुए. इसी तर्ज़ पर एक और नियुक्ति केंद्र पर लादीगयी थी लेकिन वह फलीभूतनहीं हो सकी क्योंकि अचानकआपातकाल समाप्त हो गया.

 

आपातकाल समाप्त होने पर गाड़ी का पहियाउल्टा चलाने का प्रयास किया गया. कुछ लोगों ने प्रतिशोध लेने शुरू किये. किसी ने मंत्रालय में शिकायत की कि लाल सा० इमरजेंसी के पक्के    समर्थक थे. सबूत में शिकायतकर्ता ने चौ० हरध्यान सिंह का मामला बताया. परिणाम स्वरुप लाल सा०का ट्रान्सफर गोवा कर दिया गया. कहाँ तो वे यहाँ से सेवानिवृत्तहो कर अपने घर जानाचाह रहे थे और कहाँ यह रोज़े गले पड़ गए. म.नि. चटर्जी भी इस में विवश दिखाई दिए. लेकिन हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम वाली उक्ति काम आयी.

 

जिस दिन चौ०हरध्यान सिंह कीनियुक्ति के आदेश फोन पर आये थेऔर जिस दिन उन्होंने ज्वाइन किया – उसपूरी गतिविधि और अपनी मानसिक स्थिति काब्यौरालाल सा० ने र्लिख कर अपनी एक फाइल में रखा हुआ था. उन्होंने अपने ट्रान्सफर को रुकवाने का आवेदन के साथ अपनी फाइल का यह पृष्ठ लगा कर म.नि. चटर्जी के पास भेजा. अब इतने वर्षों के बात मुझे कहने में कोई संकोच नहीं कि इस पत्र कोदिल्लीले जाने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का उत्तरदायित्व मेरा ही था. अंततःउन का वह ट्रान्सफर आदेश रद्द हुआ. बादमेंउन्हें पदोन्नति पर विदेश प्रसारण सेवा का निदेशक बना कर दिल्ली भेजा गया. देशके आकाश पर छा रहेबड़े सितारे की छत्र छाया में स्थानीय प्रद्योत भी निर्द्वंद आँख मिचौनी खेल रहे थे. हरियाणा भी इस का अपवाद नहीं था.  ,,,,

(क्रमशःचटर्जीसा० कीकिताबे – अवस्थीजी)

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1 Comment on "परम्पराएँ प्रसारण की (5) रोहतक केंद्र"

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yogeshwar sharma
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us kaalkhand ki itnee sahi aur gahree jankaaree dene ke liye B N Goyal sahab ka aabharee hoon. un dinon sach men PRADYOT hee khud ko SITAARE samjhne lage the.

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