लेखक परिचय

आर. के. गुप्ता

आर. के. गुप्ता

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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-आर.के. गुप्ता-  uttar pradesh
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद प्रदेश सरकार द्वारा एक धर्म विशेष के लोगों (मुस्लिमों) को एकतरफा मुआवजा देने की होड़ सी मच गई है। इस मुआवजा वितरण में मुस्लिम खुलकर ‘मालेगनीमत’ (लूट के माल) का मजा उठा रहे हैं। क्योंकि प्रदेश सरकार सिर्फ मुस्लिम समाज को मुआवजा देकर आने वाले लोकसभा चुनाव में अपना वोट बैंक पक्का करना चाहती है। विभिन्न समाचार पत्रों में भी समय-समय पर बांटे जा रहे मुआवजों में अनियमितताओं की खबरें आती रही हैं।
दैनिक जागरण समाचार पत्र के दिनांक 21 जनवरी, 2014 के अंक में खबर छपी है कि उत्तर प्रदेश के शामली में गांव मंसूरा-रोटन में कई मास से पानीपत (हरियाणा) से आकर कुछ मुस्लिम परिवार रह है जिनका इन दंगों से कोई सरोकार नहीं है। इन लोगों को कुछ मुस्लिम ठेकेदार बीस से चालीस हजार रुपये लेकर वन विभाग की जमीन पर तंबू डालकर इन्हें दंगा पीड़ित विस्थापितों के रूप में दिखा रहे हैं। दंगा पीड़ितों को मिलने वाले 10 लाख रुपये और जमीन आदि के लालच में यहां आकर बसे हैं। जबकि इनका इन दंगों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसका खुलासा तब हुआ जब पानीपत निवासी जावेद ने काफी समय बाद भी सरकार कुछ न मिलने पर वापिस अपने घर लौटने की बात ठेकेदार से कहीं और अपने रुपये वापस मांगे। इस पर ठेकेदार के लोगों रोटन निवासी अफसर, सादा, नासिर आदि ने जावेद तथा उसकी पत्नी के साथ मारपीट की तथा उनपर जानलेवा हमला किया।
इससे पहले भी केशव संवाद, मेरठ 28/09/2013 के अनुसार, इस प्रकार की खबर आई है कि प्रदेश के कई जिलों के मुस्लिम अपने घरों को ताला मारकर मुआवजा लेने के लिए मुजफ्फरनगर में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं। मुजफ्फरनगर के 32 ग्राम साम्प्रदायिक हिंसा के शिकार हुए थे परन्तु राहत शिवरों में 147 ग्रामों के मुस्लिम आकर रह रहे हैं। इनमें मुजफ्फरनगर के पास के जिलों जैसे मेरठ, सहारनपुर के ग्रामों, इनके अतिरिक्त ग्राम बट्टावडी, करकड़ा, खदड़ आदि के मुस्लिम भी आ गए हैं। अब ये शरणार्थी भयभीत होने का नाटक कर सरकार से अपने लिये शहरी क्षेत्र में निवास की मांग कर रहे हैं। मुआवजे के लिए बासौली ग्राम में रहमुद्दीन नाम के शख्स ने उस मस्जिद के दरवाजे पर मिट्टी का तेल छिड़ककर स्वयं आग लगा दी जिसमें वह खुद इबादत करता रहा है। मेरठ के खरदौनी गांव में नदीम नामक व्यक्ति को उसके पिता और बड़े भाई में पीट-पीटकर मरा जानकर हिन्दुओं के खेत में डाल दिया ताकि उन्हें साम्प्रदायिक हिंसा का मुआवजा मिल सके।
क्या सरकार द्वारा एक समुदाय को खुश करने के लिए इस प्रकार अंधा होकर मुआवजा बांटा जाना सही है ? मुजफ्फरनगर दंगों में क्या सिर्फ मुस्लिम ही पीड़ित हुए थे? हिन्दू नहीं?
उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार जिस प्रकार मुस्लिम तुष्टीकरण के कार्य करते हुए लगातार हिन्दुओं के अधिकारों का हनन कर रही है, उससे तो लगता है कि उत्तर प्रदेश इस्लामिस्तान बनने की ओर अग्रसर है। यह तो समाजवादी पार्टी की धर्मनिरपेक्षता के नाम पर खुला मुस्लिम साम्प्रदायिकता का नंगा नाच है।

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1 Comment on "दंगा पीड़ितों के नाम पर मुआवजे की लूट"

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mahendra gupta
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आपका सोचना बिलकुल सही है,पर आखिर कब तक मौलाना मुलायम यह चलाएंगे.संगठित जनता की शक्ति से शायद वे अभी अनजान है जब दुसरे वर्गों ने संगठित हूँ खिलाफत करनी शुरू कर दी उसी चुनाव में मुलायम के बिस्तर गोल हो जायेंगे. अभी तक उन्होंने समाज को बांटा ही है.वह समय भी अब दूर नहीं.

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