लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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netajiमिलन सिन्हा

 

तिकड़म सब हो गए फेल

नेताजी पहुँच ही गए जेल

बनने लगे हैं नए समीकरण

बाहर शुरू हो गया है नया खेल

 

खूब खाया था, खिलाया था

पीया था, खूब पिलाया था

राजनीति को ढाल बनाया था

परिवार को आगे बढ़ाया था

 

जिनका खूब साथ दिया

उन्होंने ही दगा किया

भ्रष्टाचार के नाम पर

शिष्टाचार तक त्याग दिया

 

आगे क्या होगा, कितनी होगी सजा

पक्षवाले चिंतित, तो विपक्ष ले रहा मजा

पर एक बात पर हैं सब एकमत

बुरे काम का होता ही  है बुरा नतीजा ।

 

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